RBI और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम का MoU: भारत-वियतनाम के बीच क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट की राह खुली
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (SBV) ने 5 मई 2026 को एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान, वित्तीय नवाचार और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सहयोग को नई ऊँचाई देना है। आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह समझौता प्रभाव में आया और इसकी जानकारी 29 मई 2026 को सार्वजनिक की गई।
समझौते में क्या शामिल है
इस MoU के तहत भारत और वियतनाम QR कोड-आधारित व्यापारी भुगतान प्रणाली को परस्पर जोड़ने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों के बीच नई तकनीकों, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, नियामकीय ढाँचे और उभरते बाज़ार रुझानों से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी। इसमें फास्ट पेमेंट सिस्टम, मैसेजिंग सिस्टम और कार्ड स्विच नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विशेष प्रावधान है।
समझौते में संभावित संयुक्त परियोजनाओं और कार्यक्रमों का भी उल्लेख है। विशेष रूप से क्रॉस-बॉर्डर QR कोड-आधारित पेमेंट सिस्टम विकसित करने पर ज़ोर दिया जाएगा, ताकि सीमा पार लेन-देन सुगम, तेज़ और पारदर्शी हो सके।
उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर असर
सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद सीमा पार भुगतान रियल-टाइम में होगा और ग्राहकों को लेन-देन से पहले ही शुल्क की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इससे भारतीय निर्यातकों को वियतनाम के बाज़ार में नए अवसर मिलने की उम्मीद है। पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलने का अनुमान है, क्योंकि दोनों देशों के यात्री अब स्थानीय QR कोड से भुगतान कर सकेंगे।
हस्ताक्षरकर्ता और नियामकीय ढाँचा
इस समझौते पर RBI के डिप्टी गवर्नर और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के डिप्टी गवर्नर ने हस्ताक्षर किए। सरकार के मुताबिक यह MoU मुख्यतः एक रेगुलेटरी कोऑपरेशन फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तेज़ और सुरक्षित वित्तीय लेन-देन सुनिश्चित करना है।
वैश्विक फिनटेक रणनीति में महत्त्व
यह समझौता भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश को एक वैश्विक फिनटेक हब के रूप में स्थापित किया जा रहा है। गौरतलब है कि RBI पहले ही सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका के साथ UPI-आधारित क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट लिंकेज स्थापित कर चुका है; वियतनाम के साथ यह MoU उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है। RBI का कहना है कि डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी बढ़ने से भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। MoU के तहत संयुक्त परियोजनाओं की रूपरेखा तय होने के बाद दोनों देशों के केंद्रीय बैंक क्रियान्वयन की समय-सीमा और तकनीकी मानकों को अंतिम रूप देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि QR-आधारित इंटरऑपरेबिलिटी स्थापित होने से दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।