14 जुलाई 2026
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RBI और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम का MoU: भारत-वियतनाम के बीच क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट की राह खुली

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RBI और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम का MoU: भारत-वियतनाम के बीच क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट की राह खुली

सारांश

भारत और वियतनाम के केंद्रीय बैंकों ने 5 मई 2026 को MoU पर दस्तखत कर QR कोड-आधारित क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की नींव रखी। यह कदम भारत की वैश्विक फिनटेक विस्तार रणनीति को आगे बढ़ाता है और दोनों देशों के बीच व्यापार व पर्यटन को नई रफ़्तार दे सकता है।

मुख्य बातें

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (SBV) ने 5 मई 2026 को डिजिटल पेमेंट सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का मुख्य फ़ोकस QR कोड-आधारित क्रॉस-बॉर्डर व्यापारी भुगतान प्रणाली को जोड़ना है।
फास्ट पेमेंट सिस्टम , मैसेजिंग सिस्टम और कार्ड स्विच नेटवर्क में सहयोग और सूचना-साझाकरण का प्रावधान।
MoU पर RBI के डिप्टी गवर्नर और SBV के डिप्टी गवर्नर ने हस्ताक्षर किए; केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू।
नई व्यवस्था से रियल-टाइम सीमा पार भुगतान, पारदर्शी शुल्क संरचना और भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिलने की उम्मीद।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (SBV) ने 5 मई 2026 को एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान, वित्तीय नवाचार और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सहयोग को नई ऊँचाई देना है। आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह समझौता प्रभाव में आया और इसकी जानकारी 29 मई 2026 को सार्वजनिक की गई।

समझौते में क्या शामिल है

इस MoU के तहत भारत और वियतनाम QR कोड-आधारित व्यापारी भुगतान प्रणाली को परस्पर जोड़ने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों के बीच नई तकनीकों, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, नियामकीय ढाँचे और उभरते बाज़ार रुझानों से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी। इसमें फास्ट पेमेंट सिस्टम, मैसेजिंग सिस्टम और कार्ड स्विच नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विशेष प्रावधान है।

समझौते में संभावित संयुक्त परियोजनाओं और कार्यक्रमों का भी उल्लेख है। विशेष रूप से क्रॉस-बॉर्डर QR कोड-आधारित पेमेंट सिस्टम विकसित करने पर ज़ोर दिया जाएगा, ताकि सीमा पार लेन-देन सुगम, तेज़ और पारदर्शी हो सके।

उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर असर

सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद सीमा पार भुगतान रियल-टाइम में होगा और ग्राहकों को लेन-देन से पहले ही शुल्क की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इससे भारतीय निर्यातकों को वियतनाम के बाज़ार में नए अवसर मिलने की उम्मीद है। पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलने का अनुमान है, क्योंकि दोनों देशों के यात्री अब स्थानीय QR कोड से भुगतान कर सकेंगे।

हस्ताक्षरकर्ता और नियामकीय ढाँचा

इस समझौते पर RBI के डिप्टी गवर्नर और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के डिप्टी गवर्नर ने हस्ताक्षर किए। सरकार के मुताबिक यह MoU मुख्यतः एक रेगुलेटरी कोऑपरेशन फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तेज़ और सुरक्षित वित्तीय लेन-देन सुनिश्चित करना है।

वैश्विक फिनटेक रणनीति में महत्त्व

यह समझौता भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश को एक वैश्विक फिनटेक हब के रूप में स्थापित किया जा रहा है। गौरतलब है कि RBI पहले ही सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका के साथ UPI-आधारित क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट लिंकेज स्थापित कर चुका है; वियतनाम के साथ यह MoU उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है। RBI का कहना है कि डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी बढ़ने से भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। MoU के तहत संयुक्त परियोजनाओं की रूपरेखा तय होने के बाद दोनों देशों के केंद्रीय बैंक क्रियान्वयन की समय-सीमा और तकनीकी मानकों को अंतिम रूप देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि QR-आधारित इंटरऑपरेबिलिटी स्थापित होने से दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

UAE और श्रीलंका के बाद एक और द्विपक्षीय फिनटेक लिंकेज है — पैटर्न स्पष्ट है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति में है। QR इंटरऑपरेबिलिटी तकनीकी रूप से सरल लगती है, पर मुद्रा निपटान, साइबर सुरक्षा मानक और नियामकीय सामंजस्य जैसी जटिलताएँ अक्सर ऐसे समझौतों को कागज़ तक सीमित रखती हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि MoU में संयुक्त परियोजनाओं की कोई बाध्यकारी समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। वैश्विक फिनटेक हब बनने की महत्त्वाकांक्षा तभी साकार होगी जब ये फ्रेमवर्क मापने योग्य लेन-देन मात्रा और व्यापार वृद्धि में तब्दील हों।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के बीच MoU क्या है?
यह 5 मई 2026 को हस्ताक्षरित एक रेगुलेटरी कोऑपरेशन फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य भारत और वियतनाम के बीच डिजिटल पेमेंट, वित्तीय नवाचार और क्रॉस-बॉर्डर QR कोड-आधारित भुगतान प्रणाली को मज़बूत करना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह समझौता प्रभाव में आया।
इस समझौते से आम उपभोक्ताओं को क्या फ़ायदा होगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पार भुगतान रियल-टाइम में होगा और ग्राहकों को लेन-देन से पहले ही शुल्क की जानकारी मिलेगी। इससे वियतनाम जाने वाले भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को स्थानीय QR कोड से सीधे भुगतान की सुविधा मिलेगी।
इस MoU में किन क्षेत्रों में सहयोग का प्रावधान है?
समझौते में फास्ट पेमेंट सिस्टम, मैसेजिंग सिस्टम, कार्ड स्विच नेटवर्क और QR कोड-आधारित व्यापारी भुगतान प्रणाली में सहयोग शामिल है। इसके अलावा नई तकनीकों, नियामकीय ढाँचे और उभरते बाज़ार रुझानों पर जानकारी साझा करने की भी व्यवस्था है।
भारत ने इससे पहले किन देशों के साथ ऐसे डिजिटल पेमेंट समझौते किए हैं?
RBI पहले ही सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका के साथ UPI-आधारित क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट लिंकेज स्थापित कर चुका है। वियतनाम के साथ यह MoU उसी वैश्विक फिनटेक विस्तार रणनीति की अगली कड़ी है।
यह समझौता भारत-वियतनाम व्यापार को कैसे प्रभावित करेगा?
सरकार के अनुसार, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट अधिक पारदर्शी, तेज़ और कम खर्चीला होने से भारतीय निर्यातकों को वियतनाम के बाज़ार में नए अवसर मिलेंगे और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और प्रगाढ़ होंगे। पर्यटन क्षेत्र को भी इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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