राम मंदिर दान चोरी पर निष्पक्ष जांच की माँग, शिवसेना (यूबीटी) ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 13 जुलाई को मुंबई में केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला — राम मंदिर दान चोरी विवाद, एनसीईआरटी पेपर खरीद मामले में जांच के आदेश, 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र की तैयारी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठते सवाल — इन सभी मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा। दुबे ने माँग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जवाबदेही के आधार पर अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
राम मंदिर दान विवाद: निष्पक्ष जांच की माँग
दुबे ने कहा कि भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं और यदि उनके मंदिर के दान पात्र में चोरी हुई है, तो इसकी पूरी तरह निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को उठाने वालों को 'औरंगजेब का वंशज' कहना पूरी तरह अनुचित है।
दुबे ने तीखे शब्दों में पूछा — 'अगर चोरी की बात उठाने वाला औरंगजेब का वंशज है, तो क्या चोरी करने वाले साधु-संतों के वंशज हो गए? चोर, चोर होता है और संत, संत होता है।' उन्होंने भाजपा नेता नितेश राणे पर निशाना साधते हुए माँग की कि वे अपने बयान का वास्तविक आशय स्पष्ट करें। दुबे ने आरोप लगाया कि जो भी चोरी करने वालों को बचाता है, वह भी उतना ही दोषी है।
एनसीईआरटी मामला: धर्मेंद्र प्रधान पर जवाबदेही का सवाल
एनसीईआरटी पेपर खरीद मामले में जांच के आदेश पर दुबे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हर बार किसी गड़बड़ी के बाद केवल जांच के आदेश देना पर्याप्त नहीं है।
दुबे के अनुसार, एनटीए में गड़बड़ी हो या एनसीईआरटी में अनियमितता — हर बार जांच बैठाई जाती है, लेकिन मंत्रालय अपनी जवाबदेही तय नहीं करता। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस विभाग पर आरोप है, उसी विभाग से जांच कराना निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।'
मानसून सत्र: जनता के मुद्दों पर गंभीर बहस की अपील
20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के संदर्भ में दुबे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महिला सुरक्षा, युवाओं की परेशानियाँ और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के असर जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया।
दुबे ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता एक साथ बैठकर बातचीत करें, जिससे लोकतांत्रिक माहौल मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिकता न बने, बल्कि सभी दलों की राय को समान महत्व मिले।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी की पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा चुनाव आयोग को 'लोकतंत्र की आत्मा' कहे जाने के संदर्भ में दुबे ने कहा कि पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर व्यापक विश्वास था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उस भरोसे पर सवाल उठ रहे हैं।
दुबे ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्त सेवानिवृत्ति के बाद सार्वजनिक जीवन से अलग रहते थे, जबकि अब अलग-अलग पदों पर नियुक्तियों को लेकर सवाल उठते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल संस्थागत स्वायत्तता को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहे हैं।
आगे क्या
मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है और इन तमाम मुद्दों — राम मंदिर दान विवाद, एनसीईआरटी अनियमितता और नीट विवाद — के संसद में गूँजने की पूरी संभावना है। विपक्ष की रणनीति इन मुद्दों को एकजुट होकर उठाने की दिखती है, जिससे सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं।