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राम मंदिर दान राशि के कथित दुरुपयोग पर शिवसेना (यूबीटी) का केंद्र और UP सरकार पर हमला

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राम मंदिर दान राशि के कथित दुरुपयोग पर शिवसेना (यूबीटी) का केंद्र और UP सरकार पर हमला

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने राम मंदिर की दान राशि के कथित दुरुपयोग पर केंद्र और UP सरकार को घेरा। उनका आरोप है कि नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय जवाब देने से बच रहे हैं और सत्ता से जुड़े होने के कारण निष्पक्ष जाँच संभव नहीं दिखती।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 जून को राम मंदिर दान राशि के कथित दुरुपयोग पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा।
महाकुंभ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा दी गई करोड़ों रुपये की राशि के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए गए।
नृपेंद्र मिश्रा (मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष) और चंपत राय (ट्रस्ट महासचिव) पर मौन रहने का आरोप।
दुबे ने निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए कहा कि जाँच एजेंसियाँ और आरोपी दोनों सत्ता पक्ष से जुड़े हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने 9 सांसद जिताए; पार्टी ने 2022 की टूट के बावजूद जनाधार बनाए रखने का दावा किया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 जून को मुंबई में केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दान राशि के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएँ हो रही हैं। उनका कहना है कि भगवान राम के नाम पर जमा करोड़ों रुपये की राशि का उपयोग समाज कल्याण में होने के बजाय कथित दुरुपयोग की ओर जा रहा है, जबकि जवाबदेही तय करने वाला कोई तंत्र सक्रिय नहीं दिखता।

दान राशि के प्रबंधन पर सवाल

दुबे ने कहा कि महाकुंभ 2025 के दौरान और उसके बाद देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए भारी मात्रा में दान दिया। आम जनता की यह अपेक्षा थी कि यह धन अस्पताल निर्माण, स्कूल स्थापना, गरीबों को भोजन और वंचित वर्गों की सहायता जैसे कार्यों में लगाया जाएगा। उनके अनुसार, वास्तविकता इससे उलट है — दान राशि के प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन कोई स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आ रहा।

नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय पर मौन का आरोप

दुबे ने आरोप लगाया कि जब इस मामले में जवाब माँगे जा रहे हैं, तब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि यह चुप्पी स्वयं में संदेह पैदा करती है।

निष्पक्ष जाँच पर संदेह

जाँच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए दुबे ने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लग रहे हैं और जो जाँच एजेंसियों से जुड़े हैं, दोनों का संबंध सत्ता पक्ष से है — इसलिए निष्पक्ष जाँच की उम्मीद कम दिखती है। उन्होंने कहा, 'यदि यही मामला किसी गैर-भाजपा सरकार के कार्यकाल में सामने आया होता तो अब तक संबंधित लोग गिरफ्तार हो चुके होते।' उनके अनुसार, इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति और शिवसेना (यूबीटी) का पक्ष

महाराष्ट्र में कथित ऑपरेशन टाइगर, ऑपरेशन लोटस और दलबदल की चर्चाओं पर दुबे ने स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) किसी भी प्रकार की राजनीतिक तोड़फोड़ या भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करती। 2022 में शिवसेना में हुई टूट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को नया नाम और नया चुनाव चिह्न अपनाने पर मजबूर होना पड़ा, बावजूद इसके पार्टी ने जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी। उनके अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में तमाम चुनौतियों के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) ने 9 सांसद संसद में भेजे।

फडणवीस और शिंदे पर निशाना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी करते हुए दुबे ने कहा कि दोनों नेता जानते हैं कि जनता का झुकाव किस दिशा में है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच अपना संदेश पहुँचाती रहेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ महायुति के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल पहली बार नहीं उठे हैं — यह मुद्दा विपक्ष के लिए बार-बार उठाने योग्य बना हुआ है। असली सवाल यह है कि क्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सार्वजनिक ऑडिट या संसदीय समीक्षा के दायरे में आता है — जो अभी तक स्पष्ट नहीं है। जब तक ट्रस्ट स्वयं विस्तृत वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं करता, तब तक ऐसे आरोपों की काट मुश्किल रहेगी। यह मामला धर्म, राजनीति और जवाबदेही के उस नाज़ुक संगम पर खड़ा है जहाँ मुख्यधारा की मीडिया अक्सर सतर्क रहती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान राशि के दुरुपयोग का विवाद क्या है?
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने आरोप लगाया है कि श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर के लिए दी गई करोड़ों रुपये की दान राशि का समाज कल्याण कार्यों में उपयोग नहीं हो रहा और प्रबंधन में अनियमितताएँ हैं। उन्होंने महाकुंभ 2025 के दौरान जमा हुई राशि का विशेष उल्लेख किया।
आनंद दुबे ने नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय पर क्या आरोप लगाए?
दुबे का आरोप है कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय दान राशि के प्रबंधन से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे। उन्होंने इसे जवाबदेही की विफलता बताया।
शिवसेना (यूबीटी) ने निष्पक्ष जाँच की माँग क्यों की?
दुबे का तर्क है कि आरोपी और जाँच एजेंसियाँ दोनों सत्ता पक्ष से जुड़े हैं, इसलिए स्वतंत्र जाँच संभव नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि यदि यही मामला किसी गैर-भाजपा सरकार में सामने आता तो कार्रवाई बहुत पहले हो चुकी होती।
2022 की शिवसेना टूट के बाद शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति क्या है?
2022 में पार्टी में विभाजन के बाद शिवसेना (यूबीटी) को नया नाम और नया चुनाव चिह्न अपनाना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 9 सांसद जिताने का दावा किया है।
महाराष्ट्र में ऑपरेशन लोटस और दलबदल पर शिवसेना (यूबीटी) का क्या रुख है?
आनंद दुबे ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना (यूबीटी) किसी भी प्रकार की राजनीतिक तोड़फोड़, भ्रष्टाचार या दलबदल अभियान का समर्थन नहीं करती। पार्टी का कहना है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच अपनी लड़ाई लड़ती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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