ट्विशा शर्मा मौत मामला: शरीर पर 7 चोटें, MP हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने गुरुवार, 28 मई को बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की कथित दहेज मृत्यु के मामले की सुनवाई में यह तथ्य केंद्रीय माना कि पीड़िता के शरीर पर मृत्यु-पूर्व सात चोटों के निशान पाए गए थे। जबलपुर में दर्ज इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार को जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने भोपाल की एक सत्र अदालत द्वारा 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द किया। हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने केस डायरी, गवाहों की गवाही और व्हाट्सऐप चैट जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों की पर्याप्त जाँच किए बिना राहत दे दी थी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि निचले न्यायालय के आदेश में गंभीर कमियाँ थीं क्योंकि उसने केस डायरी में दर्ज गवाहों की अहम गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ किया था, जो गिरिबाला सिंह की कथित संलिप्तता की ओर इशारा करते थे।
महाधिवक्ता के बयान के अहम बिंदु
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा, 'कल इस मामले में विस्तार से सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने जिन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया, उनमें से एक यह था कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर सात चोटें पाई गई थीं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं।'
उन्होंने यह भी बताया कि जाँच टीम ने गिरिबाला सिंह को कई नोटिस जारी किए थे, लेकिन आरोप है कि अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। सिंह ने कहा, 'अग्रिम जमानत देते समय अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि वह जाँच में सहयोग करेंगी। हालाँकि, जाँच टीम को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।'
एफआईआर में दहेज उत्पीड़न के आरोप
महाधिवक्ता के अनुसार एफआईआर में आरोपी के विरुद्ध क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। उन्होंने कहा, 'एफआईआर में साफ लिखा है कि ट्विशा शर्मा के साथ क्रूरता की गई थी। उनकी अप्राकृतिक मृत्यु छह महीने के भीतर हो गई, जिससे यह कथित तौर पर दहेज मृत्यु का मामला बन जाता है।'
गौरतलब है कि भारतीय दंड संहिता के तहत विवाह के सात वर्षों के भीतर अप्राकृतिक मृत्यु को दहेज मृत्यु की श्रेणी में जाँचा जाता है। इस मामले में मृत्यु छह महीने के भीतर होना इसे कानूनी दृष्टि से और गंभीर बनाता है।
व्हाट्सऐप चैट से और सबूत संभव
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि जाँच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान शिकायत में लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर व्हाट्सऐप चैट की जाँच की जाए, तो उनसे ट्विशा शर्मा द्वारा झेली गई दहेज से जुड़ी क्रूरता के और भी सबूत सामने आ सकते हैं।'
आगे क्या होगा
अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद अब गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मामले की आगे की सुनवाई में व्हाट्सऐप चैट और गवाहों के बयानों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यह मामला न्यायिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि आरोपी स्वयं पूर्व जिला न्यायाधीश हैं।