13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ट्विशा शर्मा मौत मामला: शरीर पर 7 चोटें, MP हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ट्विशा शर्मा मौत मामला: शरीर पर 7 चोटें, MP हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की

सारांश

ट्विशा शर्मा के शरीर पर मिलीं सात मृत्यु-पूर्व चोटें और जाँच में कथित असहयोग — इन्हीं आधारों पर MP हाईकोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार व्हाट्सऐप चैट से दहेज क्रूरता के और सबूत मिल सकते हैं।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की।
पीड़िता ट्विशा शर्मा के शरीर पर मृत्यु-पूर्व सात चोटों के निशान पाए गए, जिन्हें हाईकोर्ट ने केंद्रीय आधार माना।
निचली अदालत ने 15 मई को दी गई जमानत में केस डायरी, गवाहों की गवाही और व्हाट्सऐप चैट की पर्याप्त जाँच नहीं की थी।
एफआईआर में दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप; विवाह के छह महीने के भीतर अप्राकृतिक मृत्यु दर्ज।
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार आरोपी ने जाँच में कथित तौर पर अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।

मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने गुरुवार, 28 मई को बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की कथित दहेज मृत्यु के मामले की सुनवाई में यह तथ्य केंद्रीय माना कि पीड़िता के शरीर पर मृत्यु-पूर्व सात चोटों के निशान पाए गए थे। जबलपुर में दर्ज इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार को जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने भोपाल की एक सत्र अदालत द्वारा 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द किया। हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने केस डायरी, गवाहों की गवाही और व्हाट्सऐप चैट जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों की पर्याप्त जाँच किए बिना राहत दे दी थी।

पीठ ने स्पष्ट किया कि निचले न्यायालय के आदेश में गंभीर कमियाँ थीं क्योंकि उसने केस डायरी में दर्ज गवाहों की अहम गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ किया था, जो गिरिबाला सिंह की कथित संलिप्तता की ओर इशारा करते थे।

महाधिवक्ता के बयान के अहम बिंदु

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा, 'कल इस मामले में विस्तार से सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने जिन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया, उनमें से एक यह था कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर सात चोटें पाई गई थीं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं।'

उन्होंने यह भी बताया कि जाँच टीम ने गिरिबाला सिंह को कई नोटिस जारी किए थे, लेकिन आरोप है कि अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। सिंह ने कहा, 'अग्रिम जमानत देते समय अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि वह जाँच में सहयोग करेंगी। हालाँकि, जाँच टीम को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।'

एफआईआर में दहेज उत्पीड़न के आरोप

महाधिवक्ता के अनुसार एफआईआर में आरोपी के विरुद्ध क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। उन्होंने कहा, 'एफआईआर में साफ लिखा है कि ट्विशा शर्मा के साथ क्रूरता की गई थी। उनकी अप्राकृतिक मृत्यु छह महीने के भीतर हो गई, जिससे यह कथित तौर पर दहेज मृत्यु का मामला बन जाता है।'

गौरतलब है कि भारतीय दंड संहिता के तहत विवाह के सात वर्षों के भीतर अप्राकृतिक मृत्यु को दहेज मृत्यु की श्रेणी में जाँचा जाता है। इस मामले में मृत्यु छह महीने के भीतर होना इसे कानूनी दृष्टि से और गंभीर बनाता है।

व्हाट्सऐप चैट से और सबूत संभव

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि जाँच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान शिकायत में लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर व्हाट्सऐप चैट की जाँच की जाए, तो उनसे ट्विशा शर्मा द्वारा झेली गई दहेज से जुड़ी क्रूरता के और भी सबूत सामने आ सकते हैं।'

आगे क्या होगा

अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद अब गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मामले की आगे की सुनवाई में व्हाट्सऐप चैट और गवाहों के बयानों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यह मामला न्यायिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि आरोपी स्वयं पूर्व जिला न्यायाधीश हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि आरोपी स्वयं पूर्व जिला न्यायाधीश हैं। हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि निचली अदालतें उच्च-प्रोफाइल मामलों में साक्ष्यों की जाँच में कोताही बरत रही हैं। व्हाट्सऐप चैट को संभावित साक्ष्य के रूप में उजागर करना डिजिटल साक्ष्य की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है, लेकिन इसकी स्वीकार्यता और विश्वसनीयता अदालत में अभी परखी जानी बाकी है। दहेज मृत्यु के मामलों में अग्रिम जमानत की उदारता पर यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा मामला क्या है?
ट्विशा शर्मा की कथित दहेज मृत्यु का मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर से जुड़ा है, जिसमें उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप हैं। एफआईआर के अनुसार ट्विशा की अप्राकृतिक मृत्यु विवाह के छह महीने के भीतर हुई।
MP हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत क्यों रद्द की?
जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने पाया कि भोपाल की सत्र अदालत ने 15 मई को जमानत देते समय केस डायरी, गवाहों की गवाही और व्हाट्सऐप चैट जैसे अहम साक्ष्यों की पर्याप्त जाँच नहीं की थी। इसके अलावा, जमानत की शर्त के बावजूद आरोपी ने जाँच में कथित तौर पर सहयोग नहीं किया।
ट्विशा शर्मा के शरीर पर कितनी चोटें पाई गईं और इनका क्या महत्व है?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ट्विशा शर्मा के शरीर पर मृत्यु-पूर्व सात चोटों के निशान पाए गए। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार हाईकोर्ट ने इन्हें मामले की गंभीरता का प्रमुख संकेतक माना।
व्हाट्सऐप चैट इस मामले में कैसे अहम है?
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार व्हाट्सऐप चैट की जाँच से दहेज से जुड़ी क्रूरता के और सबूत सामने आ सकते हैं। हाईकोर्ट ने भी इसे उन महत्वपूर्ण साक्ष्यों में गिना जिन्हें निचली अदालत ने नज़रअंदाज़ किया था।
अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद आगे क्या होगा?
अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी का मार्ग खुल गया है। मामले की आगे की सुनवाई में व्हाट्सऐप चैट और गवाहों के बयान निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले