ट्विशा शर्मा मौत मामला: मध्य प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, दहेज के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने 22 मई 2026 को ट्विशा शर्मा की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की औपचारिक सिफारिश कर दी। राज्य के गृह विभाग ने केंद्र सरकार को संदेश भेजकर यह अनुरोध किया है कि इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई के हाथों में सौंपी जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित बाग मुगालिया एक्सटेंशन में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप सामने आए, जिसने राज्यभर में व्यापक चर्चा और आक्रोश को जन्म दिया।
एफआईआर और कानूनी धाराएँ
कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में अपराध संख्या 133/2026 के तहत पहले ही आपराधिक मामला दर्ज किया जा चुका है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 80(2), 85 और 3(5) के तहत आरोप शामिल हैं। इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 भी लगाई गई हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और सहमति
मध्य प्रदेश सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा, 'भोपाल के कटारा हिल्स स्थित बाग मुगालिया एक्सटेंशन में 12 मई को हुई दहेज से जुड़ी मौत की घटना के संबंध में दर्ज मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने का प्रस्ताव दिया गया है।' राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत अपनी सहमति भी दे दी है, जिससे सीबीआई के सदस्यों को पूरे मध्य प्रदेश में जांच के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने का अधिकार मिल गया है। अधिसूचना के अनुसार, इस सहमति में मामले से जुड़ी किसी भी उकसाने वाली कार्रवाई और आपराधिक साजिश की जांच भी शामिल है।
परिवार की माँग और राजनीतिक दबाव
यह घटनाक्रम ट्विशा के परिवार द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने और सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच का अनुरोध करने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। विभिन्न हलकों से स्वतंत्र जांच की उठती माँग के बीच राज्य सरकार ने यह कदम उठाया, जिसे पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की प्रक्रिया
औपचारिक प्रक्रियाएँ पूरी होने और मध्य प्रदेश पुलिस से संबंधित दस्तावेज़ प्राप्त होने के बाद सीबीआई इस मामले की जांच की कमान औपचारिक रूप से संभालेगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दहेज से जुड़े मामलों में जांच की निष्पक्षता को लेकर देशभर में बहस तेज़ है।