ट्विशा शर्मा केस: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम की दी अनुमति, दिल्ली एम्स के डॉक्टर करेंगे जांच
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा केस में 22 मई 2026 को शव के दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति दे दी है। कोर्ट के निर्देशानुसार दिल्ली एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर भोपाल पहुँचकर यह जांच करेंगे। इस फैसले से ट्विशा के परिजनों को दस दिनों की कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है।
परिवार की प्रतिक्रिया
ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने इस निर्णय पर हाईकोर्ट और न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'शव के दोबारा पोस्टमार्टम की इजाजत मिल गई है और इसके लिए हम हाईकोर्ट और न्यायपालिका के बहुत आभारी हैं। अब प्रशासन को जो भी कार्रवाई करनी है, वह बिना किसी देरी के तुरंत की जानी चाहिए। उसके बाद हम अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।'
आशीष ने यह भी बताया कि परिवार पिछले दस दिनों से लगातार इसके लिए संघर्ष और अपील कर रहा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज या कल तक पूरी प्रक्रिया और कार्रवाई सही तरीके से पूरी हो जाएगी।
कोर्ट में तीखी बहस
दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली। याचिकाकर्ता पक्ष ने दोबारा जांच की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि आरोपी पक्ष के वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि पहला पोस्टमार्टम पर्याप्त था और यह मांग चिकित्सा बिरादरी का अपमान है।
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि यह मांग जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और डॉक्टरों की क्षमता पर अविश्वास जताने के समान है। हालांकि, लंबी बहस के बाद कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम पर सहमति जता दी।
कोर्ट के निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ट्विशा के शव को एम्स भोपाल में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली एम्स के डॉक्टर भोपाल आकर पोस्टमार्टम करेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि
ट्विशा शर्मा 12 मई की रात भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। पुलिस के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर 12 मई की रात लगभग 10:26 बजे घर की छत पर जिम्नास्टिक रिंग की रस्सी से लटका हुआ पाया गया था। उनका पोस्टमार्टम 13 मई को एम्स भोपाल के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग में किया गया था, जिसमें रस्सी से फांसी लगाने को मौत का कारण बताया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब परिवार पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा था। हाईकोर्ट का यह फैसला मामले की जांच में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अब दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।