अहमदाबाद नगर निगम का बड़ा एक्शन: जल निकासी घोटाले में 4 इंजीनियर निलंबित, करोड़ों की वसूली के आदेश

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अहमदाबाद नगर निगम का बड़ा एक्शन: जल निकासी घोटाले में 4 इंजीनियर निलंबित, करोड़ों की वसूली के आदेश

सारांश

अहमदाबाद नगर निगम के सतर्कता ऑडिट ने तूफानी जल निकासी ठेकों में माप-पुस्तकों में हेरफेर और डुप्लीकेट बिलिंग का पर्दाफाश किया। नतीजा — 4 इंजीनियर निलंबित, PMC फर्म ब्लैकलिस्ट होने की कगार पर और करोड़ों की वसूली के आदेश। यह मामला शहरी ठेका निगरानी की खामियों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने 19 मई 2025 को पूर्वी जोन के 4 इंजीनियरिंग अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
निलंबित अधिकारियों में राजेश राठवा (अतिरिक्त नगर अभियंता), उत्कर्ष भाभोर (उप नगर अभियंता), रमेश बारिया और अल्पेश मकवाना शामिल हैं।
रामोल-हाथीजान वार्ड की ₹6.68 करोड़ की परियोजना में ₹5.81 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका था; विस्ट कंस्ट्रक्शन से ₹2.34 करोड़ से अधिक की वसूली प्रस्तावित।
वस्त्राल वार्ड मामले में ब्याज सहित ₹81 लाख से अधिक की वसूली का आकलन।
PMC फर्म TÜV Rheinland (India) प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू।
दोषी ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच पूरी होने तक संलिप्त एजेंसियों को नया ठेका न देने के निर्देश।

अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने 19 मई 2025 को शहर की तूफानी जल निकासी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद पूर्वी जोन के चार वरिष्ठ इंजीनियरिंग अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निगम के सतर्कता विभाग के ऑडिट में माप-पुस्तकों में हेरफेर, डुप्लीकेट बिलिंग और साइट पर किए गए कार्य तथा दर्ज मात्रा के बीच गंभीर बेमेल सामने आए। दोषी ठेकेदारों और पीएमसी फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और करोड़ों रुपये की वसूली के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

सतर्कता ऑडिट में क्या मिला

निगम के सतर्कता विभाग ने पूर्वी क्षेत्र (ईस्ट जोन) में कई ठेकों की प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इस जांच में माप-पुस्तकों में फेरबदल, डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ, पिछले कार्यों से कॉपी-पेस्ट किए गए रिकॉर्ड और वास्तविक साइट पर किए गए काम तथा दर्ज मात्रा के बीच स्पष्ट बेमेल जैसी गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुईं। जांच में ठेकेदार, परियोजना प्रबंधन सलाहकार (PMC) और इंजीनियरिंग अधिकारी — तीनों स्तरों पर संलिप्तता के संकेत मिले।

जांच के दायरे में विस्ट कंस्ट्रक्शन, मीरल इंफ्रास्ट्रक्चर, ध्रुवी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, रो-गोल्ड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और विन्सेन्ज़ो प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सहित PMC फर्म TÜV Rheinland (India) प्राइवेट लिमिटेड और IR Class System and Solution प्राइवेट लिमिटेड के बयान दर्ज किए गए।

रामोल-हाथीजान वार्ड: सबसे बड़ा मामला

ड्राफ्ट टीपी योजनाओं 107, 108 और 115 के तहत रामोल-हाथीजान वार्ड में तूफानी जल निकासी का ठेका विस्ट कंस्ट्रक्शन को दिया गया था, जिसमें TÜV Rheinland (India) प्राइवेट लिमिटेड PMC के रूप में कार्यरत थी। इस परियोजना का मूल मूल्य ₹7.33 करोड़ और स्वीकृत लागत ₹6.68 करोड़ थी, जबकि अब तक ₹5.81 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका था।

जांचकर्ताओं ने पाया कि माप-पुस्तकों के पन्नों में कथित तौर पर जांच से पहले ही फेरबदल किया गया था और काम को आगे किसी अन्य एजेंसी को सौंप दिया गया था। विस्ट कंस्ट्रक्शन और मीरल इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच पाइपलाइन कार्यों में डुप्लीकेट माप प्रविष्टियाँ मिलने पर अकेले विस्ट कंस्ट्रक्शन से ₹2.34 करोड़ से अधिक की वसूली का प्रस्ताव रखा गया है।

वस्त्राल वार्ड में अलग मामला

वस्त्राल वार्ड में ध्रुवी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और भागीरथ कंस्ट्रक्शन से जुड़े एक अलग मामले में जांचकर्ताओं को तूफानी पानी और ड्रेनेज लाइन के कार्यों में 2024 के पुराने प्रोजेक्ट के मापों की नकल और बिलिंग में अनियमितताएँ मिलीं। माप-पुस्तकों की कुछ प्रविष्टियाँ पहले से किए गए कार्यों से मेल खाती थीं, जिसके कारण काम पूरा हुए बिना ही भुगतान कर दिए गए। इस मामले में ब्याज सहित ₹81 लाख से अधिक की वसूली का आकलन किया गया है। मैनहोल निर्माण के मापों में गड़बड़ियों से हुए अतिरिक्त नुकसान की भी पहचान की गई है।

निलंबित अधिकारी और कार्रवाई

नगर आयुक्त ने जांच के नतीजों के आधार पर पूर्वी जोन इंजीनियरिंग विभाग के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में अतिरिक्त नगर अभियंता राजेश राठवा, उप नगर अभियंता उत्कर्ष भाभोर, सहायक नगर अभियंता रमेश बारिया और सहायक अभियंता अल्पेश मकवाना शामिल हैं। सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।

इसके अलावा, PMC फर्म TÜV Rheinland (India) प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फर्म पर कथित तौर पर MPR, ढुलाई रिकॉर्ड, पाइप-बिछाने के रजिस्टर और दैनिक प्रगति रिपोर्ट जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की निगरानी में गंभीर लापरवाही का आरोप है।

सुधार के उपाय और आगे की राह

अहमदाबाद नगर निगम ने घोषणा की है कि जब तक चल रही जांच पूरी नहीं होती, तब तक संलिप्त एजेंसियों को कोई नया ठेका नहीं दिया जाएगा। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रणालीगत सुधार के तहत माप-पुस्तकों के रिकॉर्ड रखने की संशोधित प्रक्रिया और बिल प्रोसेसिंग के लिए कड़ी प्री-ऑडिट जांच को एक आधिकारिक सर्कुलर के माध्यम से पहले ही लागू किया जा चुका है। यह कार्रवाई शहरी निकायों में ठेका प्रबंधन की पारदर्शिता को लेकर एक बड़े संकेत के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि माप-पुस्तकों में वर्षों तक चलती रही हेरफेर सतर्कता ऑडिट से पहले क्यों नहीं पकड़ी गई। PMC फर्म की भूमिका विशेष रूप से चिंताजनक है — निगरानी के लिए नियुक्त एजेंसी ही यदि अनिवार्य रजिस्टर नहीं रखती, तो तीसरे पक्ष की निगरानी का पूरा तंत्र खोखला हो जाता है। यह पहला मामला नहीं है जब शहरी निकायों में ठेका प्रबंधन की खामियाँ सामने आई हों; असली परीक्षा यह है कि क्या नई प्री-ऑडिट प्रणाली केवल कागजी सुधार बनकर रह जाएगी या इसे नियमित तृतीय-पक्ष सत्यापन से बल मिलेगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद नगर निगम ने किन अधिकारियों को निलंबित किया और क्यों?
AMC ने पूर्वी जोन के चार इंजीनियरिंग अधिकारियों — अतिरिक्त नगर अभियंता राजेश राठवा, उप नगर अभियंता उत्कर्ष भाभोर, सहायक नगर अभियंता रमेश बारिया और सहायक अभियंता अल्पेश मकवाना — को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया। सतर्कता ऑडिट में तूफानी जल निकासी परियोजनाओं में माप-पुस्तकों में हेरफेर, डुप्लीकेट बिलिंग और वास्तविक कार्य व दर्ज मात्रा के बीच गंभीर बेमेल पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
रामोल-हाथीजान वार्ड की परियोजना में क्या गड़बड़ी मिली?
₹6.68 करोड़ की स्वीकृत लागत वाली इस परियोजना में ₹5.81 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका था। जांचकर्ताओं को माप-पुस्तकों में कथित हेरफेर, काम आगे सौंपे जाने और विस्ट कंस्ट्रक्शन व मीरल इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच डुप्लीकेट माप प्रविष्टियाँ मिलीं। विस्ट कंस्ट्रक्शन से अकेले ₹2.34 करोड़ से अधिक की वसूली प्रस्तावित है।
TÜV Rheinland (India) पर क्या कार्रवाई हो रही है?
AMC ने PMC फर्म TÜV Rheinland (India) प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फर्म पर MPR, ढुलाई रिकॉर्ड, पाइप-बिछाने के रजिस्टर और दैनिक प्रगति रिपोर्ट जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की निगरानी में कथित लापरवाही का आरोप है।
वस्त्राल वार्ड मामले में कितनी वसूली होगी?
वस्त्राल वार्ड में ध्रुवी बिल्डकॉन और भागीरथ कंस्ट्रक्शन से जुड़े मामले में ब्याज सहित ₹81 लाख से अधिक की वसूली का आकलन किया गया है। इसके अतिरिक्त मैनहोल निर्माण के मापों में गड़बड़ियों से हुए नुकसान की भी पहचान की गई है।
भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए AMC ने क्या कदम उठाए हैं?
AMC ने माप-पुस्तकों के रिकॉर्ड रखने की संशोधित प्रक्रिया और बिल प्रोसेसिंग के लिए कड़ी प्री-ऑडिट जांच को आधिकारिक सर्कुलर के माध्यम से लागू किया है। जांच पूरी होने तक संलिप्त एजेंसियों को कोई नया ठेका नहीं दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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