चीनी एआई से अमेरिकी पेटेंट खतरे में: सीनेटर बैंक्स ने वाणिज्य विभाग से माँगी सख्त सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर जिम बैंक्स (इंडियाना) ने 8 जुलाई 2026 को अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक को एक औपचारिक पत्र लिखकर माँग की है कि अमेरिकी पेटेंट एवं ट्रेडमार्क कार्यालय (USPTO) पेटेंट सुरक्षा को और मज़बूत करे। उनका आरोप है कि चीनी कंपनियाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर अमेरिकी पेटेंट आवेदनों का विश्लेषण कर रही हैं और इससे अमेरिकी नवाचार, दवा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) तथा जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।
मुख्य आरोप: 'एआई-सक्षम नकल' का खतरा
सीनेटर बैंक्स ने अपने पत्र में दावा किया है कि चीनी कंपनियाँ एआई उपकरणों की सहायता से अमेरिकी जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े पेटेंट आवेदनों का तेज़ी से विश्लेषण कर रही हैं। उनके अनुसार, ये कंपनियाँ व्यावसायिक रूप से लाभदायक खोजों की पहचान कर अमेरिकी कंपनियों के बाज़ार में उत्पाद उतारने से पहले ही मिलते-जुलते पेटेंट दाखिल कर देती हैं।
बैंक्स ने पत्र में लिखा, 'पेटेंट स्क्रैपिंग चीन से जुड़े बौद्धिक संपदा (आईपी) खतरे को बढ़ा रही है और विशेष रूप से चीन की तेज़ दवा अनुमोदन प्रक्रिया को देखते हुए अमेरिकी आरएंडडी निवेश को कमज़ोर करने का जोखिम पैदा कर रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रतिस्पर्धी किसी आविष्कार में मामूली बदलाव कर नियामकीय मंजूरी पहले हासिल कर लेते हैं, तो आरएंडडी में निवेश का प्रोत्साहन कमज़ोर पड़ जाता है।
फार्मा सप्लाई चेन पर असर
बैंक्स के अनुसार, यह चुनौती केवल बौद्धिक संपदा की चोरी तक सीमित नहीं है — इसका असर अमेरिकी फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि 1980 के दशक से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने जैव प्रौद्योगिकी को रणनीतिक प्राथमिकता बनाया है, अनुसंधान अवसंरचना में भारी निवेश किया है और उत्पाद विकास को तेज़ करने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाया है।
उन्होंने दावा किया कि कम लागत के कारण कई अमेरिकी कंपनियों ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स और जेनेरिक दवाओं का उत्पादन चीन में स्थानांतरित कर दिया, जिससे अमेरिका की चीन के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग पर निर्भरता बढ़ती गई।
सर्वे के आँकड़े और निर्भरता की चिंता
2024 के बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (BIO) के सर्वे का हवाला देते हुए बैंक्स ने कहा कि 79 प्रतिशत अमेरिकी बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों ने चीन-स्थित या चीन के स्वामित्व वाली मैन्युफैक्चरर के साथ कम से कम एक अनुबंध या उत्पाद समझौते की बात कही है। उनके अनुसार, ऐसी निर्भरता 'न केवल घरेलू सप्लाई चेन में कमज़ोरियाँ पैदा करती है, बल्कि अमेरिका के बायोटेक सेक्टर को ऐसे देश के सामने और अधिक जोखिम में डालती है जो सक्रिय रूप से हमारे उद्योगों को कमज़ोर करने की कोशिश करता है।'
USPTO पर बोझ और सुधार की माँग
सीनेटर ने यह भी चेतावनी दी कि एआई से तैयार बड़ी संख्या में पेटेंट आवेदन USPTO पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, 'कम गुणवत्ता वाले एआई-जनित आवेदन पेटेंट प्रणाली पर बोझ बढ़ा सकते हैं। मशीन के ज़रिए बड़े पैमाने पर किए गए ऐसे आवेदन, जिनमें इंसानों का कोई खास योगदान नहीं होता, USPTO पर और दबाव डाल सकते हैं — इससे जाँच का काम पेंडिंग हो सकता है और प्रायर-आर्ट के विश्लेषण में मुश्किल आ सकती है।'
बैंक्स ने लुटनिक और USPTO के अंडर सेक्रेटरी स्क्वायर्स से आग्रह किया कि वे उन नवाचारों की रक्षा के लिए सुधारों को प्राथमिकता देना जारी रखें, जिनकी एआई की सहायता से नकल किए जाने का खतरा है। गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में बौद्धिक संपदा की सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बन चुकी है — विशेष रूप से जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में। वाशिंगटन लंबे समय से बीजिंग पर सरकारी समर्थन वाली औद्योगिक नीतियों और साइबर माध्यमों के ज़रिए विदेशी प्रौद्योगिकी हासिल करने के आरोप लगाता रहा है, जबकि चीन इन आरोपों से लगातार इनकार करता आया है।