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चीन ने ChatGPT से अमेरिकी AI बहस को प्रभावित करने की कोशिश की: OpenAI रिपोर्ट

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चीन ने ChatGPT से अमेरिकी AI बहस को प्रभावित करने की कोशिश की: OpenAI रिपोर्ट

सारांश

ओपनएआई की थ्रेट रिपोर्ट ने खुलासा किया कि चीन से जुड़े लोगों ने ChatGPT के ज़रिए अमेरिकी AI और टैरिफ बहस को गुप्त रूप से प्रभावित करने की कोशिश की। 'हाउस सेलेक्ट कमिटी' के चेयरमैन जॉन मूलनार ने इसे अमेरिकी खुलेपन का दुरुपयोग बताया और जाँच जारी रखने की घोषणा की।

मुख्य बातें

ओपनएआई ने जून 2026 की थ्रेट रिपोर्ट में चीन से जुड़े दो समूहों के ChatGPT अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी दी।
'डेटा सेंटर बैंडवैगन कैंपेन' के तहत एआई डेटा सेंटरों से बिजली कीमतें बढ़ने के झूठे दावे सोशल मीडिया पर फैलाए गए।
'टेक एंड टैरिफ्स' ऑपरेशन में अमेरिकी टैरिफ की आलोचना और राष्ट्रपति ट्रंप को निशाना बनाने वाली सामग्री तैयार की गई; शी जिनपिंग का उल्लेख न करने के निर्देश दिए गए।
इन नेटवर्क्स ने यह झूठा दावा भी फैलाया कि ChatGPT यूजर्स का डेटा लीक हुआ — ओपनएआई ने इसे पूरी तरह असत्य बताया।
ओपनएआई के अनुसार, इन अभियानों का ऑनलाइन प्रभाव बेहद सीमित रहा और कोई प्रामाणिक सहभागिता नहीं मिली।
जॉन मूलनार ने कहा कि उनकी कमिटी डेटा सेंटर बहस में चीनी प्रभाव की जाँच जारी रखेगी ।

ओपनएआई की जून 2026 की थ्रेट रिपोर्ट के अनुसार, चीन से जुड़े कुछ लोगों ने चैटजीपीटी का उपयोग कर अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति और टैरिफ से संबंधित सार्वजनिक बहसों को गुप्त रूप से प्रभावित करने का प्रयास किया। कंपनी ने ऐसे दो समूहों के चैटजीपीटी अकाउंट पर प्रतिबंध लगाया, जिनके बारे में आशंका थी कि उनका संचालन चीन से हो रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

'हाउस सेलेक्ट कमिटी ऑन द चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी' के चेयरमैन और अमेरिकी प्रतिनिधि जॉन मूलनार ने आरोप लगाया कि चीनी सरकार अमेरिका में आम नागरिकों के बीच होने वाली वैध चर्चाओं में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा, 'डेटा सेंटरों को लेकर जायज सवाल हैं और अमेरिकी लोगों को इनके जवाब मिलने चाहिए, क्योंकि कंपनियाँ हमारे देश के भविष्य के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही हैं।'

मूलनार ने आगे कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अपने 'यूनाइटेड फ्रंट' संगठनों और अन्य संस्थाओं के ज़रिए अमेरिकियों को बाँटने का काम करती है। उनके अनुसार, चीन के सरकारी मीडिया ने अंग्रेज़ी में ऐसे लेख प्रकाशित किए जिनमें डेटा सेंटर निर्माण के मुद्दे पर अमेरिकी जनमत को विभाजित करने की कोशिश की गई।

दो गुप्त अभियानों का खुलासा

ओपनएआई की रिपोर्ट में दो अलग ऑपरेशनों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पहले ऑपरेशन को 'डेटा सेंटर बैंडवैगन कैंपेन' नाम दिया गया, जिसके तहत सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट की गई जिसमें दावा किया गया कि एआई डेटा सेंटरों के कारण आम अमेरिकियों के लिए बिजली की कीमतें बढ़ रही हैं। ओपनएआई के अनुसार, यह सामग्री संभवतः नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स के ज़रिए प्रसारित की गई थी।

दूसरे ऑपरेशन 'टेक एंड टैरिफ्स' के तहत अमेरिकी टैरिफ की आलोचना करने वाले कमेंट और राजनीतिक कार्टून तैयार किए गए, जिनमें वॉशिंगटन को तकनीकी क्षेत्र में दबदबा बनाने की कोशिश करने वाले के रूप में चित्रित किया गया। ओपनएआई ने बताया कि इन ऑपरेटर्स ने सिस्टम को विशेष रूप से निर्देश दिया था कि वह केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम न आए।

झूठे दावे और सीमित प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, इन्हीं नेटवर्क्स ने यह झूठा दावा भी फैलाया कि चैटजीपीटी यूजर्स का डेटा लीक हो गया है। ओपनएआई ने स्पष्ट किया कि 'ये आरोप पूरी तरह झूठे थे।' कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि इन अभियानों का ऑनलाइन प्रभाव बेहद सीमित रहा — सोशल मीडिया पर इन्हें कोई उल्लेखनीय या प्रामाणिक सहभागिता नहीं मिली।

हालाँकि, कंपनी ने चेतावनी दी कि इन अभियानों का महत्व उन नैरेटिव्स में है जिनका परीक्षण किया जा रहा था — अमेरिकी तकनीकी नीतियों को आर्थिक चिंताओं से जोड़कर घरेलू बहसों में विदेशी हस्तक्षेप का प्रयास।

व्यापक संदर्भ: अमेरिका-चीन AI प्रतिस्पर्धा

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और चीन के बीच एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत कंप्यूटिंग क्षमता और अगली पीढ़ी की तकनीक में प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। दोनों देश इन क्षेत्रों में भारी निवेश कर रहे हैं, जिन्हें आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी ताकत पर अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने के लिए एआई टूल्स के दुरुपयोग का आरोप लगा हो।

आगे क्या होगा

मूलनार ने कहा कि उनकी कमिटी डेटा सेंटर विकास से जुड़े विदेशी प्रभाव की संभावित कोशिशों की जाँच जारी रखेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन बहसों में शामिल सभी अमेरिकी एक-दूसरे के साथ सम्मान से पेश आएँगे। ओपनएआई की यह रिपोर्ट एआई कंपनियों पर अपने प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की निगरानी को लेकर बढ़ते दबाव के बीच आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी एक बड़ी विडंबना यह है कि जिस कंपनी ने यह खुलासा किया, वही उस टूल की निर्माता है जिसका दुरुपयोग हुआ। यह सवाल उठता है कि क्या एआई कंपनियाँ अपने प्लेटफॉर्म के राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सतर्क हैं, या यह खुलासा नियामकीय दबाव से बचने की एक पारदर्शिता की कोशिश है। यह भी उल्लेखनीय है कि ओपनएआई ने स्वयं माना कि इन अभियानों का प्रभाव 'बेहद सीमित' रहा — फिर भी इसे 'थ्रेट' की श्रेणी में रखा गया, जो अमेरिकी AI नीति बहस में चीन-विरोधी आख्यान को मज़बूत करने का काम करता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इन अभियानों की 'सीमित सफलता' के बावजूद इन्हें इतनी प्रमुखता क्यों मिली।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन ने ChatGPT का उपयोग अमेरिकी बहस को प्रभावित करने के लिए कैसे किया?
ओपनएआई की जून 2026 की थ्रेट रिपोर्ट के अनुसार, चीन से जुड़े लोगों ने चैटजीपीटी के ज़रिए एआई डेटा सेंटर और अमेरिकी टैरिफ से संबंधित सामग्री तैयार की और उसे नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से प्रसारित किया। इसका उद्देश्य अमेरिकी जनमत को विभाजित करना और एआई नीति बहस को प्रभावित करना था।
'डेटा सेंटर बैंडवैगन कैंपेन' क्या था?
यह चीन से जुड़े ऑपरेटर्स द्वारा चलाया गया पहला गुप्त अभियान था, जिसमें सोशल मीडिया पर यह दावा फैलाया गया कि एआई डेटा सेंटरों के कारण आम अमेरिकियों की बिजली की कीमतें बढ़ रही हैं। ओपनएआई के अनुसार, यह सामग्री संभवतः नकली अकाउंट्स के ज़रिए पोस्ट की गई थी।
ओपनएआई ने इन अभियानों के बारे में क्या कार्रवाई की?
ओपनएआई ने चीन से संचालित संदिग्ध दो समूहों के चैटजीपीटी अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगा दिया और जून 2026 की थ्रेट रिपोर्ट में इसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि ChatGPT डेटा लीक के दावे पूरी तरह झूठे थे।
जॉन मूलनार कौन हैं और उनकी प्रतिक्रिया क्या रही?
'हाउस सेलेक्ट कमिटी ऑन द चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी' के चेयरमैन और अमेरिकी प्रतिनिधि जॉन मूलनार ने चीन पर अमेरिकी खुलेपन का फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी कमिटी डेटा सेंटर विकास में चीनी प्रभाव की जाँच जारी रखेगी।
क्या इन अभियानों का अमेरिकी जनमत पर कोई वास्तविक असर पड़ा?
ओपनएआई के अनुसार, इन अभियानों का ऑनलाइन प्रभाव बेहद सीमित रहा और सोशल मीडिया पर कोई उल्लेखनीय या प्रामाणिक सहभागिता नहीं मिली। हालाँकि, कंपनी ने चेतावनी दी कि इनका महत्व उन नैरेटिव्स में है जिनका परीक्षण किया जा रहा था।
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