CGTN सर्वेक्षण: 83.5% लोगों को अमेरिका के तकनीकी संरक्षणवाद से वैश्विक AI पर खतरे की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
बीजिंग में 31 जुलाई 2026 को जारी एक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, 83.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने चिंता जताई कि अमेरिका तकनीक के प्रति खुलेवादी रुख से हटकर संरक्षणवादी बन रहा है, जिसका वैश्विक एआई अनुसंधान और उसके व्यावहारिक उपयोग पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा। यह सर्वेक्षण चाइना मीडिया ग्रुप के अधीन संचालित अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल सीजीटीएन ने वैश्विक नेटिजनों के बीच उस समय कराया, जब अमेरिका ने कथित राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर चीन की एआई कंपनियों पर प्रतिबंध और संबंधित तकनीकों के निर्यात पर अतिरिक्त सीमाएँ लगाने की नीति प्रस्तुत की।
सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष
सीजीटीएन के इस सर्वेक्षण में कई महत्त्वपूर्ण आँकड़े सामने आए। 89.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि एआई मॉडल तभी तेज़ी से विकसित होते हैं जब अधिक से अधिक लोग उनका उपयोग करें, फीडबैक दें और उन्हें बेहतर बनाएँ — अर्थात खुली भागीदारी ही प्रगति की कुंजी है।
89.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं के अनुसार एआई से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार के विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय नियमों के ढाँचे के भीतर किया जाना चाहिए, न कि किसी एक देश द्वारा एकतरफा मनमाने प्रतिबंधों से।
90.1 प्रतिशत लोगों का मत है कि तथाकथित 'चीनी एआई मॉडल के खतरे' का कथन वास्तव में सुरक्षा पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसका असली उद्देश्य वैश्विक एआई परिवेश पर अमेरिका का एकाधिकार बनाए रखना है।
एकाधिकार बनाम वैश्विक सहयोग
88.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं का विचार है कि एआई प्रौद्योगिकी का नवाचार वैश्विक अनुसंधान की सामूहिक उपलब्धियों पर आधारित होना चाहिए — किसी एक देश का इस पर एकाधिकार न हो। इसी क्रम में 82.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार के बहाने दूसरे देशों के एआई विकास पर नियंत्रण थोपने से अंततः पूरे वैश्विक एआई परिवेश को नुकसान होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई नीति-निर्माण को लेकर बहस तेज़ हो रही है और कई देश अपनी तकनीकी संप्रभुता की रक्षा के लिए नए नियामक ढाँचे बना रहे हैं।
खुलेपन और सहयोग की पैरवी
86.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं का स्पष्ट मत है कि खुलेपन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर प्रौद्योगिकी उपलब्धियों को साझा करने से ही एआई का सृजनात्मक और समावेशी विकास संभव है। आलोचकों का कहना है कि एकतरफा प्रतिबंध नवाचार की गति को धीमा करते हैं और वैश्विक तकनीकी असमानता को और गहरा करते हैं।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा पिछले कई वर्षों से तीव्र होती जा रही है। सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण से लेकर एआई मॉडल तक, दोनों देशों के बीच तकनीकी विभाजन की रेखा और गहरी होती दिख रही है। सर्वेक्षण के आँकड़े यह संकेत देते हैं कि वैश्विक जनमत अमेरिकी प्रतिबंध नीति को संतुलित नहीं मानता।
आगे देखें तो यह सर्वेक्षण वैश्विक एआई शासन पर होने वाली बहसों में एक नया आयाम जोड़ता है — और यह प्रश्न उठाता है कि क्या तकनीकी नीतियाँ राष्ट्रीय हितों से परे वैश्विक भलाई को प्राथमिकता दे सकती हैं।