22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 31 जुलाई तक पंचायत व शहरी निकाय चुनाव कराने का आदेश, दिसंबर तक टालने की अर्जी खारिज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 31 जुलाई तक पंचायत व शहरी निकाय चुनाव कराने का आदेश, दिसंबर तक टालने की अर्जी खारिज

सारांश

राजस्थान उच्च न्यायालय ने डेढ़ साल की देरी के बाद सरकार की दिसंबर तक मोहलत की माँग ठुकराते हुए 31 जुलाई की अंतिम समय-सीमा तय कर दी। ओबीसी कमीशन को 20 जून तक रिपोर्ट देनी होगी। यह आदेश स्थानीय लोकतंत्र की बहाली की दिशा में अदालत का निर्णायक हस्तक्षेप है।

मुख्य बातें

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 22 मई 2026 को पंचायत व शहरी स्थानीय निकाय चुनाव 31 जुलाई 2026 तक कराने का आदेश दिया।
सरकार की चुनाव दिसंबर 2026 तक टालने की याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी.
शर्मा की बेंच ने खारिज की।
ओबीसी कमीशन को 20 जून 2026 तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
इससे पहले 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर सुनवाई में कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 की समय-सीमा तय की थी, जिसका सरकार पालन नहीं कर सकी।
पूर्व विधायकों संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा ने सरकार पर करीब डेढ़ साल से जानबूझकर चुनाव टालने का आरोप लगाया।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 22 मई 2026 को राज्य सरकार और राजस्थान राज्य चुनाव आयोग को 31 जुलाई 2026 तक पंचायत एवं शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव संपन्न कराने का सख्त निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें इन चुनावों को दिसंबर 2026 तक स्थगित करने की मांग की गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने यह ऐतिहासिक आदेश सुनाया। बेंच ने ओबीसी कमीशन को भी निर्देश दिया कि वह चुनाव प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 20 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से सौंपे। गौरतलब है कि कोर्ट ने 11 मई को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा था।

यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप किया हो। इससे पहले 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव पूरे कराने का आदेश दिया था। किंतु सरकार तय समय-सीमा के भीतर चुनाव कराने में विफल रही और समय-सीमा बढ़ाने की माँग लेकर पुनः अदालत पहुँची।

सरकार के तर्क और कोर्ट का रुख

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कई कारण गिनाए। सरकार ने कहा कि ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट अभी लंबित है और बिना ओबीसी आरक्षण के प्रावधानों को अंतिम रूप दिए चुनाव संभव नहीं। इसके अलावा स्कूलों, कर्मचारियों, ईवीएम और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं की उपलब्धता जैसी प्रशासनिक चुनौतियों का भी हवाला दिया गया।

सरकार ने यह भी तर्क रखा कि कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच समाप्त होने वाला है। उसने दावा किया कि सभी चुनाव एक साथ कराने से 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा को बल मिलेगा। राजस्थान राज्य चुनाव आयोग ने भी कोर्ट के समक्ष सरकार के रुख का समर्थन किया। इन सभी दलीलों के बावजूद उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई की समय-सीमा बरकरार रखी।

विरोधी पक्ष की दलीलें

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा ने सरकार की याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जानबूझकर करीब डेढ़ साल से चुनाव टालती आ रही है। उनका तर्क था कि बार-बार चुनाव स्थगित किए जाने से जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमज़ोर हो रही हैं और निर्वाचित प्रतिनिधित्व का संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहा है।

आम जनता और लोकतंत्र पर असर

स्थानीय निकाय चुनावों में देरी का सीधा असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों एवं जन-प्रतिनिधित्व पर पड़ता है। बिना निर्वाचित पंचायतों और नगर निकायों के, प्रशासनिक निर्णय नियुक्त अधिकारियों पर निर्भर रहते हैं, जो जवाबदेही की दृष्टि से संवैधानिक मंशा के विपरीत माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने की बात हो रही है।

आगे क्या होगा

ओबीसी कमीशन को 20 जून 2026 तक रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके बाद चुनाव आयोग को अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यदि 31 जुलाई 2026 की समय-सीमा का पालन नहीं हुआ, तो न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही का जोखिम बना रहेगा। राजस्थान सरकार के लिए अब इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक चुनाव' का तर्क रचनात्मक था, लेकिन संवैधानिक रूप से कमज़ोर — स्थानीय निकायों का कार्यकाल संविधान की ग्यारहवीं और बारहवीं अनुसूची के तहत स्वतंत्र है, और उसे केंद्रीय चुनाव चक्र से नहीं जोड़ा जा सकता। असली सवाल यह है कि डेढ़ साल की देरी के बावजूद ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट अभी तक तैयार क्यों नहीं हुई — यह प्रशासनिक विफलता है, जिसे अदालत ने सही पहचाना। 20 जून की नई समय-सीमा कमीशन पर दबाव डालती है, लेकिन यदि रिपोर्ट में आरक्षण फॉर्मूला विवादास्पद निकला, तो चुनाव प्रक्रिया फिर कानूनी अड़चनों में फँस सकती है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने का आदेश क्यों दिया?
राजस्थान उच्च न्यायालय ने पाया कि सरकार पहले से तय 15 अप्रैल 2026 की समय-सीमा का पालन नहीं कर सकी और दिसंबर तक और मोहलत माँग रही थी। कोर्ट ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए हानिकारक मानते हुए 31 जुलाई की अंतिम समय-सीमा तय की।
ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट का चुनाव से क्या संबंध है?
राज्य सरकार और चुनाव आयोग का कहना था कि ओबीसी आरक्षण के प्रावधानों को अंतिम रूप दिए बिना चुनाव अधिसूचित नहीं किए जा सकते। इसीलिए हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन को 20 जून 2026 तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया, ताकि चुनाव प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके।
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव कितने समय से लंबित हैं?
पूर्व विधायकों के अनुसार राज्य सरकार करीब डेढ़ साल से चुनाव टालती आ रही है। नवंबर 2025 में कोर्ट ने अप्रैल 2026 की समय-सीमा दी थी, जो भी पूरी नहीं हुई।
सरकार ने चुनाव टालने के लिए क्या तर्क दिए थे?
सरकार ने ओबीसी कमीशन रिपोर्ट की अनुपलब्धता, ईवीएम व कर्मचारियों की लॉजिस्टिक चुनौतियाँ और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा का हवाला दिया। साथ ही कहा कि कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल सितंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त होगा, इसलिए सभी चुनाव एक साथ कराना बेहतर होगा।
इस आदेश से राजस्थान के मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा?
31 जुलाई 2026 की समय-सीमा लागू होने पर राजस्थान के लाखों ग्रामीण और शहरी मतदाताओं को अपने पंचायत प्रतिनिधि और नगर निकाय सदस्य चुनने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय विकास कार्यों में जन-प्रतिनिधित्व बहाल होगा और नियुक्त अधिकारियों पर निर्भरता समाप्त होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले