क्या जाति गणना को लेकर सरकार की मंशा संदिग्ध है? जयराम रमेश ने ओबीसी का जिक्र न होने पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- जाति गणना की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।
- ओबीसी का उल्लेख न होना एक गंभीर चिंता का विषय है।
- केंद्र सरकार को सभी हितधारकों से परामर्श करना चाहिए।
- आर्थिक और सामाजिक न्याय के लिए सही विधि अपनाई जानी चाहिए।
- जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 से शुरू होगा।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जनगणना के संबंध में मोदी सरकार की नीयत पर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सरकार ने 22 जनवरी को जारी अधिसूचना में हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना के लिए 33 प्रश्नों की सूची प्रस्तुत की है। यह जनगणना का पहला चरण है, जो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चलेगा। इसमें मकानों की सामग्री, उपयोग, स्वामित्व, पीने के पानी, शौचालय, रोशनी, ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और मुख्य अनाज जैसी जानकारियाँ एकत्र की जाएँगी।
जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। पहला चरण हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का है, जबकि दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बर्फीले क्षेत्रों में सितंबर 2026 में और बाकी देश में फरवरी 2027 में होगी। जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 30 अप्रैल 2025 को मोदी सरकार ने अचानक यू-टर्न लिया और जाति जनगणना को जनगणना 2027 में शामिल करने की घोषणा की। बाद में 12 दिसंबर 2025 को स्पष्ट किया गया कि यह दूसरे चरण में होगी। इससे पहले सरकार लगातार जाति जनगणना का विरोध करती रही थी। उदाहरण के लिए, 20 जुलाई 2021 को लोकसभा में और 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में इसे खारिज किया गया था। यहाँ तक कि 28 अप्रैल 2024 को प्रधानमंत्री ने एक टीवी इंटरव्यू में जाति जनगणना की मांग करने वालों पर 'अर्बन नक्सल मानसिकता' का आरोप लगाया था। जयराम रमेश का कहना है कि आखिरकार व्यापक मांग के आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ा, जिसे कांग्रेस ने लगातार उठाया था।
अब जारी अधिसूचना में प्रश्न संख्या 12 में पूछा गया है कि क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या 'अन्य' श्रेणी से है, लेकिन ओबीसी और सामान्य श्रेणी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। जयराम रमेश ने इसे सरकार की असली नीयत पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि जब जाति गणना को शामिल करने का निर्णय हो चुका है, तो प्रश्न इस तरह से क्यों तैयार किए गए हैं जो व्यापक और निष्पक्ष जाति गणना की प्रतिबद्धता पर संदेह उत्पन्न करते हैं?
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि जाति गणना के विवरण को अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों से तुरंत चर्चा शुरू की जाए। जयराम रमेश ने तेलंगाना सरकार के 2025 के स्पीच सर्वे का उदाहरण दिया, जिसमें जाति-वार शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक भागीदारी की विस्तृत जानकारी इकट्ठा की गई थी। उनका कहना है कि यह तरीका आर्थिक और सामाजिक न्याय के लिए सबसे व्यापक और सही है।
यह अधिसूचना रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय द्वारा जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 8 के तहत जारी की गई है। इससे पहले 2020 की अधिसूचना को रद्द किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि जाति गणना को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता संदिग्ध है और सभी हितधारकों से सलाह लेना आवश्यक है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायपूर्ण हो।