नीतीश को कैबिनेट में पद देना पीएम मोदी का अधिकार, दखलअंदाजी उचित नहीं: जेडीयू विधायक श्याम रजक
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक श्याम रजक ने 2 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मोदी कैबिनेट में कोई अहम पद देना या न देना पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय में किसी भी प्रकार की बाहरी दखलअंदाजी उचित नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
मोदी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। जेडीयू के कुछ विधायकों ने नीतीश कुमार को उप प्रधानमंत्री बनाए जाने की माँग भी उठाई है। इसी पृष्ठभूमि में श्याम रजक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, 'कैबिनेट विस्तार या किसी भी पद का फैसला पूरी तरह प्रधानमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह निर्णय केवल प्रधानमंत्री की इच्छा और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर लिया जाता है।'
उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रधानमंत्री किसी वरिष्ठ नेता की सलाह मानते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक महानता को दर्शाता है। नीतीश कुमार के कद के बारे में बात करते हुए रजक ने कहा कि वे एक अनुभवी और विकासशील नेता हैं, जिनके पास मजबूत प्रशासनिक अनुभव और निर्णय क्षमता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में नीतीश को कोई बड़ा पद मिलता है, तो उसे राजनीतिक नहीं बल्कि विकास की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
तेजस्वी यादव पर तीखी टिप्पणी
श्याम रजक ने इसी बातचीत में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें तेजस्वी ने कहा था कि वे 'सर्वेंट क्वार्टर में पैदा हुए और दो कमरे में भी रह सकते हैं।' रजक ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि ऐसा है तो फिर हाय-तौबा किस बात की? उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी के आवास में लाखों-करोड़ों रुपये की सजावट कराई गई है और उनकी बंगले में लिफ्ट लगाने की माँग उनकी वास्तविक प्राथमिकताओं को उजागर करती है।
रजक ने यह भी कहा कि आरजेडी के गठन का मूल उद्देश्य बिहार के दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों का उत्थान था, लेकिन पार्टी अब परिवारवाद की गिरफ्त में आ गई है और अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है। उनके अनुसार, आरजेडी को हाल के चुनावों में जो हार मिली, वह इसी दिशाहीनता का परिणाम है।
संविधान संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 पेश कर सकती है। इस विधेयक में प्रावधान है कि गंभीर आपराधिक आरोपों के अंतर्गत 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को स्वतः पद से हटाया जाए।
इस पर श्याम रजक ने कहा, 'संविधान को बदला नहीं जा सकता, लेकिन उसमें संशोधन जरूर किया जा सकता है। संसद में फैसले आम सहमति और बहुमत से लिए जाते हैं, और यदि उस आधार पर कोई संशोधन पास होता है, तो वह पूरी तरह संवैधानिक होता है। यदि भ्रष्टाचार और अपराध पर अंकुश लगाने के लिए कोई संशोधन लाया जाता है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।'
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय आया है जब एनडीए गठबंधन के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें तेज हैं। गौरतलब है कि जेडीयू एनडीए का एक अहम घटक दल है और नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र के साथ मजबूत समन्वय बनाए हुए हैं। ऐसे में उनकी केंद्रीय भूमिका को लेकर उठ रही माँगें गठबंधन की आंतरिक राजनीति को भी दर्शाती हैं।
आने वाले दिनों में मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही कैबिनेट विस्तार और संविधान संशोधन विधेयक — दोनों मुद्दे संसद में केंद्रबिंदु बन सकते हैं।