कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के कारण भारत-कनाडा संबंधों में बढ़ता तनाव

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कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के कारण भारत-कनाडा संबंधों में बढ़ता तनाव

सारांश

कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के कारण भारत और कनाडा के बीच तनाव गहराता जा रहा है। भारत ने कनाडा से इन गतिविधियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की है। यह मामला द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है।

मुख्य बातें

कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में वृद्धि भारत की चिंताओं का समाधान आवश्यक द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव उग्रवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता सिख समुदाय का अलगाववादी तत्वों से संबंध सीमित करना

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक समूहों की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता हुआ नजर आ रहा है। भारत की लगातार उठाई गई चिंताओं के बीच, कनाडा पर यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह अपनी ज़मीन का उपयोग भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे।

यह विषय भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है। नई दिल्ली ने बार-बार खालिस्तान समर्थक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों, प्रचार और भारतीय कूटनीतिक मिशनों को निशाना बनाने पर चिंता जताई है।

'खालसा वॉक्स' में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, ओटावा अब खालिस्तान की मांग करने वाले उग्रवादी तत्वों की गतिविधियों की अनदेखी नहीं कर सकता और उसे हिंसा एवं डर फैलाने वाले नेटवर्क के खिलाफ ठोस कदम उठाने आवश्यक हैं।

इस टिप्पणी में यह बताया गया कि यह मुद्दा वैध राजनीतिक अभिव्यक्ति को सीमित करने का नहीं है, बल्कि उन व्यक्तियों और संगठनों से निपटने का है जो हिंसा का महिमामंडन करते हैं, धमकियां देते हैं और प्रवासी समुदाय के कुछ वर्गों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का प्रयास करते हैं।

वहीं, लेख में यह भी कहा गया कि हाल के वर्षों में भारतीय राजनयिकों और संस्थानों के खिलाफ उग्रवादी बयानबाजी और अभियानों का सिलसिला जारी है, जिससे कनाडा की प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।

इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि कनाडा में मौजूद अधिकांश सिख अलगाववादी उग्रवाद का समर्थन नहीं करते हैं। पूरे समुदाय को कुछ चरमपंथी तत्वों के साथ जोड़ना गलत और हानिकारक होगा।

टिप्पणी में कहा गया कि उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर उन्हें लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग कर विभाजनकारी और हिंसक एजेंडा फैलाने का अवसर मिल सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।

भारत ने कई मौकों पर विदेशों में सक्रिय खालिस्तान समर्थक संगठनों की गतिविधियों को लेकर अपनी चिंताओं का इज़हार किया है और कनाडा से ऐसे समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

लेख में कहा गया कि उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कदम उठाने से न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा होगी, बल्कि भारत और कनाडा के बीच संबंधों में विश्वास को बहाल करने में भी सहायता मिल सकती है।

इसके साथ ही, इस मुद्दे को सख्ती से संबोधित करने से यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि लोकतांत्रिक समाज में हिंसा और धमकी की वकालत का कोई स्थान नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह कनाडा में रहने वाले सिख समुदाय के लिए भी समस्याएँ उत्पन्न कर सकती हैं। दोनों देशों को इस प्रकार की गतिविधियों के खिलाफ मिलकर काम करना आवश्यक है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने कनाडा से क्या मांग की है?
भारत ने कनाडा से खालिस्तान समर्थक समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या सभी सिख अलगाववादी उग्रवाद का समर्थन करते हैं?
नहीं, कनाडा में अधिकांश सिख अलगाववादी उग्रवाद का समर्थन नहीं करते हैं।
भारत और कनाडा के संबंधों में यह तनाव क्यों है?
खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के कारण भारत और कनाडा के संबंधों में यह तनाव उत्पन्न हुआ है।
उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई क्यों आवश्यक है?
उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई न करने से वे लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग कर सकते हैं।
कनाडा को इस मुद्दे पर क्या कदम उठाने चाहिए?
कनाडा को खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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