8 अगस्त 2026
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क्या कनाडा में ‘खालिस्तान दूतावास’ एक खुली उकसावे की कार्रवाई है, जिस पर ओटावा चुप है?

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क्या कनाडा में ‘खालिस्तान दूतावास’ एक खुली उकसावे की कार्रवाई है, जिस पर ओटावा चुप है?

सारांश

भारत और कनाडा के बीच बढ़ते तनावों के बीच 'खालिस्तान दूतावास' की स्थापना एक गंभीर सवाल उठाती है। क्या कनाडा इस उकसावे की कार्रवाई पर चुप रहेगा? जानें इस मुद्दे के पीछे की सच्चाई और इसके संभावित परिणाम।

मुख्य बातें

खालिस्तान दूतावास की स्थापना भारत-कनाडा संबंधों के लिए गंभीर चुनौती है।
कनाडा सरकार की प्रतिक्रिया की कमी चिंता का विषय है।
खालिस्तान समर्थक तत्वों का राजनीतिक दबदबा बढ़ता जा रहा है।

नई दिल्ली, 8 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत में प्रभाव डालने में असफल खालिस्तान समर्थक तत्वों ने कई वर्षों से कनाडा को अपनी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बना लिया है। इस कारण भारत और कनाडा के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। नई दिल्ली ने कई बार कनाडा पर आरोप लगाया है कि वह ऐसे तत्वों को संरक्षण दे रहा है जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं।

हाल ही में, ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में एक तथाकथित "खालिस्तान गणराज्य के दूतावास" की स्थापना की गई है। यह कदम भारत और कनाडा के पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और बढ़ाने वाला है।

पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्तों में काफी गिरावट आई थी, लेकिन जब मार्क कार्नी ने कनाडा के प्रधानमंत्री का पद संभाला, तो सुधार की उम्मीद जगी। फिर भी, खालिस्तान समर्थक तत्वों का राजनीतिक दबाव इतना अधिक है कि कोई भी दल उन्हें नजरअंदाज करने का साहस नहीं कर पाता।

यह दूतावास गुरु नानक सिख गुरुद्वारे में स्थित है, जिसकी अगुवाई पहले हरदीप सिंह निज्जर किया करते थे, जो भारत में एक नामित आतंकवादी थे। उनकी हत्या ने भारत-कनाडा संबंधों में कूटनीतिक टकराव को जन्म दिया।

यह दूतावास न केवल चिंता का विषय है बल्कि एक दुस्साहसी कदम भी है, जिसे आतंकवादी संगठनों, ड्रग माफिया और गिरोहों से जुड़े तत्वों द्वारा उठाया गया है। कनाडा सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है। उच्चायोग ने कनाडा सरकार से ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने भी इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

बताया जा रहा है कि इस दूतावास को राज्य सरकार से $1.5 लाख की फंडिंग मिली है। ब्रिटिश कोलंबिया में न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) की सरकार है, जिसके पूर्व नेता जगमीत सिंह को खालिस्तान समर्थक माना जाता है और जो ट्रूडो सरकार के सहयोगी भी थे।

भारत ने कनाडा को कई डोजियर सौंपकर इन तत्वों की आतंकी गतिविधियों के पुख्ता सबूत दिए हैं। कनाडा में बैठे लोग भारत में सक्रिय आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क को चला रहे हैं, ऐसे प्रमाण भी साझा किए गए हैं।

इसके बावजूद, कनाडा ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उल्टा, कनाडा ने कभी भारत पर ही निज्जर की हत्या करवाने का आरोप लगाया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं यह कह सकता हूँ कि भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। खालिस्तान समर्थक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या खालिस्तान दूतावास की स्थापना कानूनी है?
इस दूतावास की स्थापना पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कई सवाल उठते हैं।
कनाडा ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
कनाडा ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जो भारत की चिंता को बढ़ाता है।
भारत ने कनाडा को क्या सबूत दिए हैं?
भारत ने कनाडा को खालिस्तान समर्थक तत्वों की आतंकी गतिविधियों के पुख्ता सबूत दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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