खालिस्तानी समूह का कनाडा में मंदिरों के बाहर विरोध, हिंदू संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- खालिस्तानी समूहों द्वारा धार्मिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन की योजना।
- हिंदू संगठनों की सुरक्षा के लिए अपील।
- एचसीएफ और सीओएचएनए की कड़ी प्रतिक्रिया।
- कनाडाई पुलिस द्वारा सुरक्षा उपायों का वादा।
- धार्मिक कट्टरता और लक्षित उत्पीड़न का मामला।
ओटावा, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विश्वभर में कई हिंदू समर्थित संगठनों ने शुक्रवार को खालिस्तानी कट्टरपंथी समूह सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) द्वारा कनाडा में हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध प्रदर्शन के आह्वान की कड़ी निंदा की।
इन संगठनों ने संभावित गड़बड़ी को लेकर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों से धार्मिक स्थलों व समुदायों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
एसएफजे ने हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (एचसीएफ) के खिलाफ 5 अप्रैल को ब्रैम्पटन में त्रिवेणी मंदिर और सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के समक्ष "खालिस्तान जिंदाबाद" रैलियों का आयोजन करने की घोषणा की।
एचसीएफ ने इन रैलियों पर अपनी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि "भारत में उनकी पुरानी जड़ों या स्थानीय सांस्कृतिक पहचान के कारण हिंदू समुदाय को निशाना बनाना स्पष्ट रूप से जेनोफोबिया और हिंदूफोबिया है।"
संगठन ने कनाडाई पुलिस से 5 अप्रैल को मंदिर परिसर और भक्तों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही, खालिस्तानी कट्टरपंथी समूहों के विरोध की योजनाओं को लेकर कहा गया कि उनका इतिहास हिंसक और कट्टरपंथी रहा है।
इस बीच, कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) ने भी एसएफजे के मंदिरों के बाहर विरोध करने की योजना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कट्टरपंथी समूह के हिंसा के पूर्व रिकॉर्ड पर चिंता जताई। सीओएचएनए ने हिंदू भक्तों पर मध्ययुगीन तरीके से हमले और 3 नवंबर, 2024 को मंदिरों पर हमलों का उल्लेख किया।
संगठन ने कहा कि जो हिंदू भक्त प्रार्थना और आध्यात्मिक जुड़ाव के लिए मंदिरों में जाते हैं, उन्हें अक्सर मंदिर के गेट पर जोरदार और गाली-गलौज वाले प्रदर्शनों का सामना करना पड़ता है।
सीओएचएनए ने कहा, "यह कुछ और नहीं बल्कि धार्मिक कट्टरता और लक्षित उत्पीड़न है, जिसे 'बोलने की आजादी' और 'राजनीतिक अभिव्यक्ति' के नाम पर प्रदर्शित किया जा रहा है। यह ध्यान देने योग्य है कि हिंदू कनाडाई फाउंडेशन को भी बोलने की आजादी है। एक संगठन को चुप कराने के लिए पूरे समुदाय के खिलाफ विरोध की धमकी देना कनाडा के निष्पक्षता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है।"
सीओएचएनए ने पील रीजनल पुलिस द्वारा ब्रैम्पटन में 'पब्लिक न्यूसेंस डेमोंस्ट्रेशन से पूजा स्थलों की सुरक्षा' से संबंधित बाय-लॉ को लागू करने के वादे का स्वागत किया और उसकी सराहना की। इसने कहा कि त्रिवेणी मंदिर के चारों ओर 100 मीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाकर, कनाडाई अधिकारियों ने यह मान लिया है कि बोलने के अधिकार में किसी समुदाय को शारीरिक या मानसिक रूप से घेरने का अधिकार नहीं है।
संगठन ने सरे की पुलिस और अधिकारियों से तुरंत ध्यान देने और लक्ष्मी नारायण मंदिर के लिए भी ऐसे ही सुरक्षा उपाय लागू करने की अपील की।