भारत में एआई जॉब पोस्टिंग 2019 के मुकाबले 6 गुना बढ़ीं, 2025 तक 2.9 लाख पार: रेडसीर रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी नौकरियों की माँग में असाधारण तेज़ी आई है — रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की 20 मई 2025 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में एआई जॉब पोस्टिंग 2019 के मुकाबले लगभग छह गुना बढ़ चुकी हैं और 2025 तक 2.9 लाख का आँकड़ा पार कर गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत तेज़ी से वैश्विक एआई टैलेंट और एआई कार्यान्वयन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
'एआई एंड द फ्यूचर ऑफ फ्लेक्सिबल वर्कस्पेसेस' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मशीन लर्निंग, जेनरेटिव एआई और एमएल ऑप्स जैसे विशेष क्षेत्रों में प्रतिभाओं की बढ़ती माँग इस उछाल की मुख्य वजह है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई टैलेंट की सघनता (कंसंट्रेशन) में वृद्धि के मामले में भारत अब दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर एआई में बढ़ता निवेश है, जो लगभग 582 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत ने पहले भी तकनीकी बदलावों को रोज़गार और आर्थिक विकास के अवसरों में सफलतापूर्वक बदला है, और यह प्रवृत्ति एआई के युग में और मज़बूत होती दिख रही है।
ऑफिस स्पेस पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, एआई-आधारित भर्ती में आई इस तेज़ी का सीधा असर भारत के कार्यालय बाज़ार पर पड़ेगा। अनुमान है कि 2025 से 2030 के बीच भारत के नॉलेज-इकोनॉमी ऑफिस स्पेस में लगभग 7.9 करोड़ वर्ग फुट की अतिरिक्त माँग उत्पन्न हो सकती है — यह माँग एआई से पहले के अनुमानित विकास से भी अधिक होगी। इसके अलावा, अकेले एआई-आधारित भर्ती से 2030 तक फ्लेक्स सीट लीजिंग की कुल माँग में लगभग 31 प्रतिशत योगदान होने की उम्मीद है।
भारत का कुल ऑफिस स्पेस 2025 तक लगभग 91.5 करोड़ वर्ग फुट हो गया है, जबकि कुल कार्यबल करीब 33 करोड़ कामगारों तक पहुँच चुका है।
फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस का विस्तार
रिपोर्ट में भारत के फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार का ज़िक्र किया गया है। 2020 में जहाँ इसका आकार लगभग 3.3 करोड़ वर्ग फुट था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 10.3 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो गया है। सर्वे में शामिल लगभग 82 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि वे अगले दो वर्षों में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस का उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एसोसिएट पार्टनर छवि सिंह ने कहा, "अब तक एआई को लेकर चर्चा मुख्य रूप से रोज़गार पर पड़ने वाले असर तक सीमित थी, लेकिन ज़मीन पर हम ऑफिस स्पेस के उपयोग के तरीके में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "एआई-आधारित टीमें अब ज़्यादा विशेषज्ञता वाली, सहयोग-आधारित और तेज़ी से बदलने वाली हो गई हैं। इससे 'कोर प्लस फ्लेक्स' वर्कप्लेस मॉडल की माँग बढ़ रही है, जहाँ कंपनियाँ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों के अनुभव से समझौता किए बिना लचीलापन चाहती हैं।"
आगे की राह
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर एआई में निवेश और भारत की तकनीकी प्रतिभा की माँग दोनों तेज़ी से बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि भारत का आईटी और तकनीकी क्षेत्र पहले भी वैश्विक डिजिटल परिवर्तन की लहरों का लाभ उठाने में सफल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह गति बनी रही तो भारत एआई टैलेंट के मामले में अमेरिका के बाद दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।