26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीयूष गोयल की चेतावनी: 5-10% निर्यात वृद्धि से संतुष्ट न हों, भारत को वैश्विक व्यापार में बड़ी छलांग लगानी होगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीयूष गोयल की चेतावनी: 5-10% निर्यात वृद्धि से संतुष्ट न हों, भारत को वैश्विक व्यापार में बड़ी छलांग लगानी होगी

सारांश

लंदन में पीयूष गोयल का संदेश साफ था — 5-10% निर्यात वृद्धि वैश्विक औसत को छूती है, भारत की क्षमता नहीं। 900 अरब पाउंड के यूके बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 45-60 अरब पाउंड है। 15 जुलाई से CETA लागू होने के साथ यह अवसर और बड़ा हो सकता है — बशर्ते उद्योग जगत मानसिकता बदले।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून 2026 को लंदन में भारतीय उद्योग जगत को 5-10% निर्यात वृद्धि पर संतुष्ट न रहने की चेतावनी दी।
वैश्विक व्यापार स्वयं 4-5% सालाना की दर से बढ़ता है — मामूली वृद्धि भारत की बाजार हिस्सेदारी नहीं बढ़ाती।
यूके का कुल व्यापार 900 अरब पाउंड का, जबकि भारत-यूके द्विपक्षीय व्यापार केवल 45-60 अरब पाउंड — बड़ा अंतर और बड़ा अवसर।
भारत-यूके CETA 15 जुलाई से लागू होने वाला है, जिससे दोनों देशों के कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुँच मिलने की उम्मीद।
गोयल ने उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, मशीनीकरण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग सुधारने पर जोर दिया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून 2026 को लंदन में आयोजित एक बिजनेस प्लेनरी सेशन में भारतीय उद्योग जगत को कड़ा संदेश दिया — 5 से 10 प्रतिशत की सालाना निर्यात वृद्धि पर जश्न मनाने की मानसिकता अब काम नहीं आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत को वैश्विक व्यापार में अग्रणी शक्ति बनना है, तो देश को कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने होंगे।

मामूली वृद्धि क्यों नाकाफी है

गोयल ने तर्क दिया कि वैश्विक व्यापार स्वयं हर वर्ष लगभग 4 से 5 प्रतिशत की दर से बढ़ता है। उनके शब्दों में, 'अक्सर हम अपने आरामदायक माहौल में फंस जाते हैं और 5, 7 या 10 प्रतिशत की वृद्धि को बड़ी सफलता मानने लगते हैं।' यह वृद्धि दर वैश्विक औसत के लगभग बराबर है, जिसका अर्थ है कि भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी वास्तव में नहीं बढ़ा रहा — केवल उसी रफ्तार से चल रहा है।

मंत्री ने भारतीय निर्यातकों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता में सुधार लाने, मशीनीकरण अपनाने, ब्रांडिंग को मजबूत करने और बेहतर पैकेजिंग पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।

यूके बाज़ार में भारत की सीमित हिस्सेदारी

यूके ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के आँकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन का कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार लगभग 900 अरब पाउंड का है, जबकि भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल केवल 45 से 60 अरब पाउंड के बीच है। गोयल ने कहा कि भारत ने अब तक यूके में अपनी निर्यात संभावनाओं का केवल एक छोटा हिस्सा ही हासिल किया है — यह अंतर ही भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने वाला है। माना जा रहा है कि इस समझौते से दोनों देशों के कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुँच और नए व्यापारिक अवसर मिलेंगे।

मुक्त व्यापार समझौतों की भूमिका

गोयल ने व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत के बढ़ते व्यापारिक समझौते निर्यातकों के लिए नए द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे यूके जैसे बड़े बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बड़े और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें।

गौरतलब है कि भारत हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और अब यूके के साथ एफटीए पर सक्रिय रहा है — यह रणनीतिक बदलाव बहुपक्षीय निर्भरता से द्विपक्षीय व्यापार साझेदारी की ओर इशारा करता है।

भारतीय उद्योग पर असर और आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि CETA के लागू होने के बाद भारतीय कपड़ा, फार्मास्यूटिकल, आईटी सेवाएँ और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं — जब तक घरेलू उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता मानक वैश्विक स्तर तक नहीं पहुँचते, बाजार पहुँच का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता।

गोयल की यह टिप्पणी भारतीय उद्योग जगत के लिए एक स्पष्ट संकेत है — 15 जुलाई के बाद खुलने वाले नए व्यापारिक अवसरों का फायदा उठाने के लिए तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और बंदरगाह अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स लागत और गुणवत्ता मानकों की खामियाँ अभी भी प्रतिस्पर्धात्मकता की राह में बाधा हैं। CETA एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन बाजार पहुँच और बाजार में उपस्थिति दो अलग-अलग चीजें हैं — और भारतीय एमएसएमई अक्सर दूसरे पर संघर्ष करते हैं। मंत्री का आह्वान तब तक अधूरा रहेगा जब तक घरेलू नीति सुधार उसी गति से नहीं चलते।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने निर्यात वृद्धि को लेकर क्या चेतावनी दी?
गोयल ने कहा कि 5 से 10 प्रतिशत की सालाना निर्यात वृद्धि वैश्विक व्यापार की सामान्य रफ्तार (4-5%) के बराबर है और यह भारत की वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शाती। उन्होंने उद्योग जगत से आरामदायक मानसिकता छोड़कर बड़े लक्ष्य तय करने की अपील की।
भारत-यूके CETA क्या है और यह कब लागू होगा?
भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने वाला है। इस समझौते से दोनों देशों के कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुँच और नए व्यापारिक अवसर मिलने की उम्मीद है।
यूके में भारत की निर्यात हिस्सेदारी कितनी है?
यूके ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के अनुसार ब्रिटेन का कुल व्यापार लगभग 900 अरब पाउंड का है, जबकि भारत-यूके द्विपक्षीय व्यापार केवल 45 से 60 अरब पाउंड के बीच है। गोयल ने इसे भारत की अधूरी क्षमता का प्रमाण बताया।
भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी बनने के लिए क्या करना होगा?
गोयल ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, मशीनीकरण अपनाने, ब्रांडिंग मजबूत करने और बेहतर पैकेजिंग पर ध्यान देने की अपील की। उनके अनुसार ये कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अनिवार्य हैं।
मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय निर्यात को कैसे मदद करेंगे?
गोयल के अनुसार भारत के बढ़ते एफटीए नेटवर्क से निर्यातकों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं। यूके जैसे बड़े बाजारों में प्रवेश आसान होगा, लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब कंपनियाँ बड़े लक्ष्य तय करें और उत्पाद गुणवत्ता को वैश्विक मानकों तक पहुँचाएँ।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 10 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 7 महीने पहले