पीयूष गोयल की चेतावनी: 5-10% निर्यात वृद्धि से संतुष्ट न हों, भारत को वैश्विक व्यापार में बड़ी छलांग लगानी होगी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून 2026 को लंदन में आयोजित एक बिजनेस प्लेनरी सेशन में भारतीय उद्योग जगत को कड़ा संदेश दिया — 5 से 10 प्रतिशत की सालाना निर्यात वृद्धि पर जश्न मनाने की मानसिकता अब काम नहीं आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत को वैश्विक व्यापार में अग्रणी शक्ति बनना है, तो देश को कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने होंगे।
मामूली वृद्धि क्यों नाकाफी है
गोयल ने तर्क दिया कि वैश्विक व्यापार स्वयं हर वर्ष लगभग 4 से 5 प्रतिशत की दर से बढ़ता है। उनके शब्दों में, 'अक्सर हम अपने आरामदायक माहौल में फंस जाते हैं और 5, 7 या 10 प्रतिशत की वृद्धि को बड़ी सफलता मानने लगते हैं।' यह वृद्धि दर वैश्विक औसत के लगभग बराबर है, जिसका अर्थ है कि भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी वास्तव में नहीं बढ़ा रहा — केवल उसी रफ्तार से चल रहा है।
मंत्री ने भारतीय निर्यातकों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता में सुधार लाने, मशीनीकरण अपनाने, ब्रांडिंग को मजबूत करने और बेहतर पैकेजिंग पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।
यूके बाज़ार में भारत की सीमित हिस्सेदारी
यूके ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के आँकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन का कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार लगभग 900 अरब पाउंड का है, जबकि भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल केवल 45 से 60 अरब पाउंड के बीच है। गोयल ने कहा कि भारत ने अब तक यूके में अपनी निर्यात संभावनाओं का केवल एक छोटा हिस्सा ही हासिल किया है — यह अंतर ही भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने वाला है। माना जा रहा है कि इस समझौते से दोनों देशों के कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुँच और नए व्यापारिक अवसर मिलेंगे।
मुक्त व्यापार समझौतों की भूमिका
गोयल ने व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत के बढ़ते व्यापारिक समझौते निर्यातकों के लिए नए द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे यूके जैसे बड़े बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बड़े और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें।
गौरतलब है कि भारत हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और अब यूके के साथ एफटीए पर सक्रिय रहा है — यह रणनीतिक बदलाव बहुपक्षीय निर्भरता से द्विपक्षीय व्यापार साझेदारी की ओर इशारा करता है।
भारतीय उद्योग पर असर और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि CETA के लागू होने के बाद भारतीय कपड़ा, फार्मास्यूटिकल, आईटी सेवाएँ और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं — जब तक घरेलू उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता मानक वैश्विक स्तर तक नहीं पहुँचते, बाजार पहुँच का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता।
गोयल की यह टिप्पणी भारतीय उद्योग जगत के लिए एक स्पष्ट संकेत है — 15 जुलाई के बाद खुलने वाले नए व्यापारिक अवसरों का फायदा उठाने के लिए तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।