जम्मू-कश्मीर में व्हाइट नाइट कोर कमांडर का ऑपरेशनल दौरा, ऐस ऑफ स्पेड्स डिवीजन की तैयारियों की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर के कमांडर (जीओसी) ने जम्मू-कश्मीर में ऐस ऑफ स्पेड्स डिवीजन और सीआईएफ रोमियो के ऑपरेशनल ठिकानों का दौरा किया और क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति तथा सैन्य तैयारियों का व्यापक मूल्यांकन किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा को लेकर सेना की सतर्कता उच्चतम स्तर पर बनाए रखी जा रही है।
दौरे का उद्देश्य और मुख्य घटनाक्रम
व्हाइट नाइट कोर की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जीओसी ने ऑपरेशनल ठिकानों पर तैनात जवानों से सीधी बातचीत की और उनकी सतर्कता, ऑपरेशनल क्षमता तथा निरंतर समर्पण की सराहना की। दौरे के दौरान कोर कमांडर को सुरक्षा हालात, ऑपरेशनल तैयारियों, क्षमता संवर्धन उपायों, निगरानी प्रणालियों और सटीक हमले की क्षमताओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
जवानों के मनोबल की सराहना
कोर कमांडर ने जवानों के उच्च मनोबल और पेशेवर रवैये की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और स्थिर माहौल बनाए रखने में जवानों की सतर्कता और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। व्हाइट नाइट कोर ने अपने संदेश में स्पष्ट किया — 'तैयारी के जरिए रोकथाम, तैयारी के जरिए जीत। हम सेवा करते हैं, हम सुरक्षा करते हैं।'
थलसेना प्रमुख का पूर्व दौरा
गौरतलब है कि इससे पहले थलसेना प्रमुख बनने के बाद जनरल धीरज सेठ ने जम्मू-कश्मीर में उत्तरी कमान का अपना पहला दौरा किया था। उन्होंने 7 से 9 जुलाई के बीच कुपवाड़ा, उरी और मानसबल जैसे सीमावर्ती इलाकों में अग्रिम तैनाती का निरीक्षण किया। इस दौरान श्रीनगर में सुरक्षा परिदृश्य और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा भी की गई, तथा जम्मू क्षेत्र में एलओसी और आतंकवाद-रोधी ग्रिड का आकलन किया गया।
राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय
जनरल सेठ ने अपने दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। यह समन्वय बैठक सेना और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। व्हाइट नाइट कोर ने इस दौरे की कई तस्वीरें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की हैं।
आगे की दिशा
सेना के अनुसार, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए तैयारियों को सुदृढ़ करना और ऑपरेशनल क्षमता की निरंतर समीक्षा सुनिश्चित करना था। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और ऑपरेशनल समीक्षाओं का यह क्रम आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है।