सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का जम्मू-कश्मीर में पहला दौरा, एलजी मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला से सुरक्षा समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 7 जुलाई 2026 को जम्मू-कश्मीर का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया, जिसमें उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अलग-अलग मुलाकात कर केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी घाटी की पहली यात्रा है।
लोक भवन में उच्चस्तरीय बैठक
अधिकारियों के अनुसार, जनरल सेठ ने श्रीनगर स्थित लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। इस बैठक में क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमा प्रबंधन और आतंकवाद-रोधी अभियानों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में चिनार कोर (15 कोर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह और घाटी में सुरक्षा संचालन की निगरानी कर रहे कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात
दौरे के शुरुआती चरण में जनरल सेठ ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात की। यह बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह नागरिक प्रशासन और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय को रेखांकित करती है — विशेषकर ऐसे समय में जब घाटी में सुरक्षा अभियान जारी हैं।
अग्रिम क्षेत्रों का दौरा और 'विजय' सिद्धांत की समीक्षा
राजनीतिक नेतृत्व से मुलाकात के बाद जनरल सेठ नियंत्रण रेखा (एलओसी) और आतंकवाद-रोधी अभियानों वाले अग्रिम क्षेत्रों का दौरा करने वाले हैं। इस दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य उनके नए परिचालन सिद्धांत 'विजय' के तहत चल रहे अभियानों की प्रत्यक्ष समीक्षा करना भी है। गौरतलब है कि यह सिद्धांत सीमा सुरक्षा रणनीतियों और आतंकवाद-रोधी तंत्र को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
जनरल धीरज सेठ: परिचय और करियर
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के चार सितारा जनरल हैं, जो सेना का सर्वोच्च सक्रिय सैन्य पद है। वह भारतीय सेना के वर्तमान और 31वें सेना प्रमुख हैं। इससे पहले वह 49वें उप सेना प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के पद पर रह चुके हैं। उन्होंने दक्षिणी कमान, दक्षिण-पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और 21 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी सेवाएं दी हैं। वह आर्मर्ड कोर रेजिमेंट के कर्नल भी हैं।
आगे क्या
यह दौरा इसलिए भी रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है क्योंकि नए सेना प्रमुख सीधे ज़मीनी हकीकत का आकलन कर अपनी परिचालन प्राथमिकताएं तय करेंगे। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति और एलओसी पर गतिविधियों के मद्देनजर यह यात्रा सेना की भावी रणनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।