यमन सरकारी सेना का 24 घंटे में 181 सैन्य अभियान, हौती ठिकानों पर ड्रोन-मिसाइल हमले
सारांश
मुख्य बातें
यमन की सरकारी सेना ने रविवार, 17 अगस्त 2026 को दावा किया कि उसने पिछले 24 घंटों में हौती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में 181 सैन्य अभियान अंजाम दिए हैं। इस व्यापक कार्रवाई से यमन में जारी गृहयुद्ध में अचानक तीखी वृद्धि दर्ज की गई है।
अभियान का विवरण
सरकारी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल माजिद अल-नुजैली ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में बताया कि इन अभियानों में ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया गया। हौती समूह के ठिकानों, हथियारों के गोदामों, सैन्य वाहनों और कथित तौर पर हमलों के लिए उपयोग की जा रही अन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
अल-नुजैली के अनुसार, इन कार्रवाइयों में हौती समूह के दर्जनों सदस्य मारे गए या घायल हुए और सात प्रांतों में सैन्य उपकरणों को नष्ट किया गया। हालाँकि, उन्होंने हताहतों की कोई विस्तृत संख्या सार्वजनिक नहीं की।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ये अभियान हौती विद्रोहियों द्वारा हाल ही में सरकारी सैनिकों, नागरिक बुनियादी ढाँचे, आर्थिक प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों पर किए गए हमलों के जवाब में शुरू किए गए हैं।
मारिब पर मिसाइल हमला
इसी बीच, हौती समूह ने शनिवार शाम तेल-समृद्ध मारिब प्रांत की सरकार-नियंत्रित राजधानी मारिब शहर पर हमले का दावा किया। सरकार समर्थक मीडिया के अनुसार, हौतियों ने शहर के रिहायशी इलाकों की ओर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
राज्य-संचालित सबा टीवी चैनल ने बताया कि हमले में हताहतों या नुकसान की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई। हालाँकि, स्थानीय निवासियों ने बताया कि मिसाइल हमलों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
हौतियों की बढ़ती आक्रामकता
हौती समूह ने हाल के सप्ताहों में यमन के सरकार-नियंत्रित क्षेत्रों और पड़ोसी सऊदी अरब में स्थित ठिकानों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। सऊदी अरब यमन सरकार का प्रमुख समर्थक है और 2015 से सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है।
हौती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों के लिए समुद्री प्रतिबंध की घोषणा की थी। इसके बाद से समूह ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत से जारी है, जब हौतियों ने उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर — जिसमें राजधानी सना भी शामिल थी — कब्जा कर लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की कोशिशें बार-बार विफल हो चुकी हैं और यमन की आम जनता दशकों के सबसे गहरे मानवीय संकट से जूझ रही है।
गौरतलब है कि यह एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे इस संघर्ष में तेजी का एक और दौर है — और दोनों पक्षों के दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए जा सके हैं।