अकाल तख्त पर भड़काऊ सामग्री के खिलाफ साहनी ने वैष्णव को लिखा पत्र, IT कानून के तहत कार्रवाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने 25 जून 2026 को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर अकाल तख्त, जत्थेदारों और सिख धर्म के पवित्र संस्थानों को निशाना बनाकर फैलाई जा रही नफरत, अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की है। साहनी ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए कहा कि ऐसी गैरकानूनी सामग्री को तुरंत हटाया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएँ।
मुख्य घटनाक्रम
साहनी ने अपने पत्र के साथ आपत्तिजनक पोस्टों के स्क्रीनशॉट की एक फाइल भी संलग्न की है। उनके अनुसार इन पोस्टों में जत्थेदार साहब के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ हैं और सिख धर्म के सर्वोच्च संस्थानों में से एक की पवित्रता को ठेस पहुँचाई गई है। सांसद ने कहा कि इस तरह की सामग्री भारत और विदेशों में लाखों सिखों की भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाती है और सांप्रदायिक सद्भाव एवं सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती है।
समन्वित प्रसार पर आशंका
साहनी ने इन पोस्टों की समन्वित प्रकृति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे आशंका बढ़ती है कि इन्हें पंजाब की सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर फैलाया जा रहा है। हालाँकि उन्होंने इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य पत्र में प्रस्तुत नहीं किया। यह आरोप राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है और अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा सत्यापित नहीं किया गया है।
संसद में पहले भी उठाया मुद्दा
साहनी ने स्मरण कराया कि उन्होंने संसद में ऑनलाइन घृणास्पद भाषण (रोकथाम) विधेयक, 2024 — एक निजी सदस्य विधेयक — पेश किया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर घृणास्पद भाषण को रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि वे लगातार सरकार से संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने का आग्रह करते रहे हैं ताकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी धर्म या समुदाय को लक्षित करने वाली सामग्री के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करें।
संवैधानिक मूल्यों का हवाला
साहनी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मूल्य है, लेकिन इसका विस्तार धार्मिक संस्थानों की निंदा या जानबूझकर उकसावे तक नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, भारत की सभ्यतागत परंपरा सभी धर्मों के प्रति आपसी सम्मान पर टिकी है और सोशल मीडिया का ऐसा दुरुपयोग न केवल सामाजिक सद्भाव को कमजोर करता है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर जनता के विश्वास को भी क्षति पहुँचाता है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। IT अधिनियम के तहत यदि सरकार संज्ञान लेती है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश जारी किए जा सकते हैं। सिख समुदाय और धार्मिक संगठनों की नजर अब सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है।