29 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: एसआईटी पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा से करेगी पूछताछ, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच तेज

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: एसआईटी पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा से करेगी पूछताछ, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच तेज

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित एसआईटी अब राम मंदिर चढ़ावा विवाद में पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ की तैयारी में है। बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह जांच उस वक्त और पेचीदा हो गई है जब ट्रस्ट ने खुद अपने सीईओ की नियुक्ति टाल दी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय के 20 जुलाई 2026 के आदेश पर गठित एसआईटी राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच तेज कर रही है।
अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू; बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ होगी।
पुलिस महानिरीक्षक किरण एस.
की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ.
जरूरत पड़ने पर गोपाल राव सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ संभव।
22 जुलाई 2026 की बैठक में ट्रस्ट ने पहले सीईओ की नियुक्ति एक माह के लिए टाली; प्रवक्ता और पूर्णकालिक महासचिव नियुक्त।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच ने 29 जुलाई 2026 को नई गति पकड़ ली, जब सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार, डॉ. मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और एसआईटी बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों तथा अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी।

मुख्य घटनाक्रम

जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले बैंक कर्मचारियों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सूत्रों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों — जिनमें गोपाल राव भी शामिल हैं — से भी पूछताछ की जा सकती है।

एसआईटी का गठन और संरचना

20 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गहन जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। इस टीम में अयोध्या रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक सोमेन वर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस एसआईटी का आधिकारिक तौर पर पुनर्गठन किया था। हालांकि, नई एसआईटी की अभी तक कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच लगातार और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है।

ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव

इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 22 जुलाई 2026 को हुई विशेष बैठक में अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति को करीब एक महीने के लिए टाल दिया। हालांकि, मंदिर से जुड़ी जानकारी को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने और संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने एक प्रवक्ता की नियुक्ति की।

उसी बैठक में ट्रस्ट ने पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति को भी मंजूरी दी। साथ ही, मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं की पवित्रता एवं परंपरागत स्वरूप बनाए रखने के लिए धार्मिक समिति के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर की प्रशासनिक संरचना को लेकर सार्वजनिक जवाबदेही की माँग तेज हो रही है। एसआईटी के सामने चुनौती यह है कि वह बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों को गवाहों के बयानों से मिलाकर एक ठोस जांच-रिपोर्ट तैयार करे, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। आने वाले सप्ताहों में डॉ. अनिल मिश्रा की पूछताछ इस जांच की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक यह जांच न्यायिक दबाव में चलने वाली कवायद ही बनी रहेगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोप सामने आए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जुलाई 2026 को इस मामले की गहन जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का आदेश दिया।
एसआईटी में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई है। इसमें अयोध्या रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक सोमेन वर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं।
डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ क्यों होगी?
डॉ. अनिल मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे पूछताछ करेगी; उन्हें नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने 22 जुलाई की बैठक में क्या फैसले लिए?
ट्रस्ट ने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति करीब एक महीने के लिए टाल दी। साथ ही एक प्रवक्ता और पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति को मंजूरी दी, और धार्मिक समिति के पुनर्गठन का निर्णय भी लिया गया।
आगे जांच किस दिशा में जाएगी?
सूत्रों के अनुसार, डॉ. अनिल मिश्रा के बाद जरूरत पड़ने पर गोपाल राव सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ हो सकती है। एसआईटी की जांच-रिपोर्ट अंततः सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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