राम मंदिर ट्रस्ट तुरंत भंग हो, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो — कांग्रेस की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला ने 27 जून 2025 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। शुक्ला ने आरोप लगाया कि मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और मुख्य आरोपियों को अभी तक बचाया जा रहा है।
मुख्य आरोप और मांगें
शुक्ला ने दावा किया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषणों, गहनों और नकद दान का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया। उन्होंने एक विशिष्ट उदाहरण देते हुए कहा, 'यदि किसी ने ₹13 लाख का दान दिया, तो रिकॉर्ड में केवल ₹10 लाख दर्शाए गए और शेष राशि का कोई हिसाब नहीं मिला।' उनके अनुसार कई श्रद्धालुओं को अपने दान की रसीद तक नहीं मिली और भगवान राम का हीरे का हार भी कथित तौर पर गायब है।
कांग्रेस की ओर से दो प्रमुख मांगें रखी गईं — पहली, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच; दूसरी, मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर एक नया ट्रस्ट गठित करना जिसमें केवल धर्माचार्यों, शंकराचार्यों और साधु-संतों को शामिल किया जाए।
चंपत राय और 'बड़े लोगों' पर निशाना
राम मंदिर चढ़ावे में हेराफेरी के मामले में दर्ज एफआईआर पर शुक्ला ने कहा कि अब तक केवल 7-8 छोटे लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है जबकि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हजारों करोड़ का घोटाला हो जाए और किसी को पता न चले, यह सिर्फ चंपत राय के बस की बात नहीं है। यह मामला चंपत राय से ऊपर का है।' शुक्ला ने प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया।
राजनीतिक प्रभाव पर सवाल
शुक्ला ने तर्क दिया कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन राजनीति के बजाय धर्म और आस्था से जुड़े लोगों के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान ट्रस्ट के प्रबंधन में राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट दिखता है और सवाल उठाया कि राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों की मंदिर प्रबंधन में क्या आवश्यकता है।
राष्ट्रीय नीति और न्यायालय से दिशा-निर्देश की मांग
कांग्रेस सांसद ने मंदिरों में दान संग्रह की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और न्यायालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा, 'देश के विभिन्न हिस्सों से मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए जिसमें धार्मिक, निष्पक्ष और ईमानदार लोगों की नियुक्ति सुनिश्चित हो।' यह मांग ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर चढ़ावा घोटाले को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और एनडीए पर दबाव बना रहा है।