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राम मंदिर ट्रस्ट तुरंत भंग हो, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो — कांग्रेस की मांग

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राम मंदिर ट्रस्ट तुरंत भंग हो, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो — कांग्रेस की मांग

सारांश

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने राम मंदिर ट्रस्ट पर दान में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए उसे तुरंत भंग करने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और संतों-धर्माचार्यों को प्रबंधन सौंपने की मांग की। उनका कहना है कि यह घोटाला चंपत राय से ऊपर के स्तर तक जाता है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने AICC मुख्यालय, नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की।
आरोप: ₹13 लाख का दान देने पर रिकॉर्ड में केवल ₹10 लाख दर्ज, शेष राशि का हिसाब नहीं; भगवान राम का हीरे का हार कथित तौर पर गायब।
कांग्रेस की मांग — सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच और नए ट्रस्ट में केवल धर्माचार्यों, शंकराचार्यों और संतों को स्थान।
शुक्ला ने कहा अब तक केवल 7-8 छोटे लोगों पर एफआईआर, चंपत राय सहित बड़े पदाधिकारियों को बचाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और मंदिर दान प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला ने 27 जून 2025 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। शुक्ला ने आरोप लगाया कि मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और मुख्य आरोपियों को अभी तक बचाया जा रहा है।

मुख्य आरोप और मांगें

शुक्ला ने दावा किया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषणों, गहनों और नकद दान का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया। उन्होंने एक विशिष्ट उदाहरण देते हुए कहा, 'यदि किसी ने ₹13 लाख का दान दिया, तो रिकॉर्ड में केवल ₹10 लाख दर्शाए गए और शेष राशि का कोई हिसाब नहीं मिला।' उनके अनुसार कई श्रद्धालुओं को अपने दान की रसीद तक नहीं मिली और भगवान राम का हीरे का हार भी कथित तौर पर गायब है।

कांग्रेस की ओर से दो प्रमुख मांगें रखी गईं — पहली, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच; दूसरी, मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर एक नया ट्रस्ट गठित करना जिसमें केवल धर्माचार्यों, शंकराचार्यों और साधु-संतों को शामिल किया जाए।

चंपत राय और 'बड़े लोगों' पर निशाना

राम मंदिर चढ़ावे में हेराफेरी के मामले में दर्ज एफआईआर पर शुक्ला ने कहा कि अब तक केवल 7-8 छोटे लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है जबकि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हजारों करोड़ का घोटाला हो जाए और किसी को पता न चले, यह सिर्फ चंपत राय के बस की बात नहीं है। यह मामला चंपत राय से ऊपर का है।' शुक्ला ने प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया।

राजनीतिक प्रभाव पर सवाल

शुक्ला ने तर्क दिया कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन राजनीति के बजाय धर्म और आस्था से जुड़े लोगों के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान ट्रस्ट के प्रबंधन में राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट दिखता है और सवाल उठाया कि राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों की मंदिर प्रबंधन में क्या आवश्यकता है।

राष्ट्रीय नीति और न्यायालय से दिशा-निर्देश की मांग

कांग्रेस सांसद ने मंदिरों में दान संग्रह की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और न्यायालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा, 'देश के विभिन्न हिस्सों से मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए जिसमें धार्मिक, निष्पक्ष और ईमानदार लोगों की नियुक्ति सुनिश्चित हो।' यह मांग ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर चढ़ावा घोटाले को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और एनडीए पर दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार किया था, और अब उसी मंदिर के प्रबंधन में 'धार्मिक शुचिता' की वकालत करना राजनीतिक विरोधाभास उत्पन्न करता है। चंपत राय 'से ऊपर' के संदर्भ बिना नाम लिए सत्ता के शीर्ष की ओर इशारा करते हैं, जो आरोप को गंभीर बनाता है लेकिन साक्ष्य की मांग भी करता है। जब तक सुप्रीम कोर्ट स्वयं संज्ञान न ले या ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य सामने न आएं, यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की सीमा से आगे नहीं बढ़ पाएगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग क्यों की?
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में दान और चढ़ावे का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया और नकद दान में अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि ट्रस्ट पर राजनीतिक प्रभाव है, इसलिए इसे भंग कर धर्माचार्यों और संतों को कमान दी जानी चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
राजीव शुक्ला के अनुसार अब तक केवल 7-8 छोटे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को कथित तौर पर बचाया जा रहा है। कांग्रेस की मांग है कि चंपत राय सहित उच्च स्तर तक जांच हो।
कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच क्यों चाहती है?
कांग्रेस का तर्क है कि मामले की संवेदनशीलता और आरोपों के स्तर को देखते हुए केवल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है। शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री को भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
नए राम मंदिर ट्रस्ट में कौन शामिल होंगे?
कांग्रेस की मांग है कि नए ट्रस्ट में केवल धर्माचार्यों, शंकराचार्यों और साधु-संतों को शामिल किया जाए। पार्टी का कहना है कि राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों की मंदिर प्रबंधन में कोई आवश्यकता नहीं है।
राम मंदिर दान में क्या अनियमितताएं बताई गई हैं?
शुक्ला ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को दान की रसीद नहीं दी गई, ₹13 लाख के दान को रिकॉर्ड में ₹10 लाख दर्शाया गया और भगवान राम का हीरे का हार कथित तौर पर गायब है। ये सभी आरोप अभी तक आरोप के स्तर पर हैं और स्वतंत्र जांच से सत्यापित नहीं हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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