असम में मिशन वसुंधरा: 23 लाख परिवारों को मिला भूमि अधिकार, मुख्यमंत्री सरमा का बयान

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असम में मिशन वसुंधरा: 23 लाख परिवारों को मिला भूमि अधिकार, मुख्यमंत्री सरमा का बयान

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 'मिशन वसुंधरा' के तहत 23 लाख से अधिक परिवारों को भूमि अधिकार देने की घोषणा की है। यह कदम स्वदेशी समुदायों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

Key Takeaways

  • मिशन वसुंधरा के तहत 23 लाख परिवारों को भूमि अधिकार दिए गए हैं।
  • सरकार का बेदखली अभियान अतिक्रमणकारियों के खिलाफ है।
  • स्वदेशी लोगों को भूमि अधिकारों का संरक्षण किया जा रहा है।
  • टी लाइन भूमि चाय बागान परिवारों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
  • भाजपा सरकार ने भूमि अधिकारों को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है।

गुवाहाटी, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली अभियान चलाकर "जाति, माटी, भेती" के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "हमारी सरकार ने न केवल अतिक्रमणकारियों से भूमि को मुक्त कराया है, बल्कि आजादी के बाद पहली बार स्वदेशी लोगों को भूमि अधिकार भी प्रदान किए हैं। असम की भूमि हमारे लोगों की है, अतिक्रमणकारियों की नहीं।"

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्रमुख पहल, मिशन वसुंधरा, ने राज्य में कई परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, मिशन वसुंधरा के तहत 23 लाख से अधिक परिवार अब भूमि मालिक बन चुके हैं, जिसे उन्होंने स्वदेशी समुदायों के लिए भूमि स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

इसके साथ ही, लगभग 3.5 लाख चाय बागान परिवारों को "टी लाइन" भूमि के लिए भूमि पट्टे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे भूमि स्वामित्व की पहुंच का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी दोहराया कि सरकार के बेदखली अभियान का उद्देश्य अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त करना और योग्य लाभार्थियों, विशेषकर स्वदेशी लोगों, के बीच इसका पुनर्वितरण सुनिश्चित करना है।

भाजपा सरकार ने लगातार भूमि अधिकारों और स्वदेशी पहचान के संरक्षण को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है, खासकर चुनावों से पहले। "जाति, माटी, भेती" का नारा इसके प्रचार का मुख्य केंद्र रहा है, जो पहचान, भूमि और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देता है।

अधिकारियों ने कहा कि इन पहलों से महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है क्योंकि इससे उन हजारों परिवारों को कानूनी स्वामित्व और सुरक्षा प्राप्त होगी जिनके पास पहले औपचारिक भूमि दस्तावेज नहीं थे।

यह पोस्ट असम में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी के बीच आई है, जहां विधानसभा चुनावों से पहले भूमि और पहचान के मुद्दे चुनावी चर्चा में प्रमुखता से उपस्थित हैं। 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

Point of View

बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।

NationPress
01/04/2026

Frequently Asked Questions

मिशन वसुंधरा क्या है?
मिशन वसुंधरा असम सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी लोगों को भूमि अधिकार प्रदान करना है।
कितने परिवारों को भूमि अधिकार मिला है?
मिशन वसुंधरा के तहत 23 लाख से अधिक परिवारों को भूमि अधिकार प्राप्त हुए हैं।
सरकार का बेदखली अभियान क्या है?
सरकार का बेदखली अभियान अतिक्रमित भूमि को वापस लेने और स्वदेशी लोगों के बीच इसका पुनर्वितरण सुनिश्चित करने का प्रयास है।
टी लाइन भूमि क्या है?
टी लाइन भूमि चाय बागान परिवारों के लिए विशेष भूमि पट्टे का एक प्रकार है।
असम विधानसभा चुनाव कब हैं?
असम विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा, और वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
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