बस्तर नक्सलमुक्त: एकनाथ शिंदे ने अमित शाह को दिया श्रेय, PM मोदी की दूरदर्शिता को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 19 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बस्तर को पूर्ण रूप से नक्सलमुक्त बनाने का ऐतिहासिक कार्य संपन्न किया है। शिंदे ने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कही, जिसमें उन्होंने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय के लिए 'सदी की सबसे बड़ी खुशखबरी' बताया।
शिंदे की एक्स पोस्ट में क्या कहा
शिंदे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को नक्सलमुक्त करने का जो संकल्प लिया, वह आज साकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान को सार्थक करते हुए अब बस्तर के हर कोने में विकास की सुनहरी किरण फैल रही है। शिंदे के अनुसार, लाल आतंक के खात्मे के बाद अब सड़क, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पशुपालन की योजनाओं का रोडमैप तेज़ गति से तैयार किया जा रहा है।
बस्तर के लिए विकास का नया अध्याय
शिंदे ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि बस्तर अब विकास और समृद्धि का प्रतीक बनेगा। उन्होंने नक्सलमुक्त भारत के सपने को प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और अमित शाह की अटूट इच्छाशक्ति का परिणाम बताया। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही हैं।
शिंदे की ईंधन बचत पहल
इसी दिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक और उल्लेखनीय कदम उठाया। वह अपने निजी विमान के बजाय एयर इंडिया के यात्री विमान से मंगलवार शाम 4 बजे मुंबई से दिल्ली रवाना हुए। यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचत अपील के समर्थन में लिया गया। मुंबई हवाई अड्डे पर उनका उत्साहपूर्ण स्वागत हुआ, जहाँ लोगों ने उनसे मुलाकात की, तस्वीरें खिंचवाईं और ज्ञापन सौंपे।
दिल्ली में स्वच्छ भारत मिशन की बैठक
शिंदे दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित 'स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0' की विशेष समीक्षा बैठक में भाग लेने गए। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी हाल ही में अपने काफिले का आकार छोटा किया है, जो ईंधन बचत मुहिम के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्रीय संदर्भ और आगे की राह
बस्तर के नक्सलमुक्त होने की घोषणा देशभर में चर्चा का विषय बनी है। यह क्षेत्र दशकों से वामपंथी उग्रवाद की चपेट में रहा है और सुरक्षाबलों ने इसे मुक्त कराने के लिए भारी कीमत चुकाई है। अब केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान इस क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर केंद्रित है।