बस्तर नक्सलवाद मुक्त: अमित शाह ने जगदलपुर से किया विकास अभियान का शुभारंभ, 70 कैंप बनेंगे सेवा डेरे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 मई 2026 को जगदलपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि बस्तर अब नक्सलवाद के भय से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और इस दिन से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संपूर्ण विकास की परिकल्पना को औपचारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंदूक के साये में जीने का दौर समाप्त हो चुका है और बस्तर के लोगों के चेहरे पर अब उत्साह, आत्मविश्वास और भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई देती है।
चार महत्वपूर्ण तिथियाँ जिन्होंने बदला बस्तर का इतिहास
गृह मंत्री शाह ने अपने संबोधन में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की चार निर्णायक तिथियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पहली महत्वपूर्ण तिथि 13 दिसंबर 2023 थी, जब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी।
दूसरी निर्णायक तिथि 24 अगस्त 2024 बताते हुए शाह ने कहा कि उस दिन सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की बैठक के बाद यह घोषणा की गई थी कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम, साहस और बलिदान के कारण यह लक्ष्य तय समयसीमा से पहले ही हासिल कर लिया गया।
चौथी और सबसे अहम तिथि के रूप में उन्होंने 19 मई 2026 को रेखांकित किया, क्योंकि इस दिन से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई परिकल्पना का शुभारंभ हो रहा है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
गृह मंत्री ने दावा किया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पहले भी थी, लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि कई गैर-BJP सरकारों ने केंद्र का साथ दिया, किंतु भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की राज्य सरकार ने इस अभियान में सहभागिता नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों तक कुछ बुद्धिजीवी यह तर्क देते रहे कि विकास न पहुँचने के कारण नक्सलवाद फैला, जबकि उनके अनुसार सच्चाई यह थी कि नक्सलवाद की वजह से ही विकास इन इलाकों तक नहीं पहुँच पाया।
शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा: कैंपों का विकास केंद्रों में रूपांतरण
गृह मंत्री शाह ने बताया कि हाल ही में 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा' का उद्घाटन किया गया है। यह पहल उन सुरक्षा कैंपों को विकास केंद्रों में बदलने की योजना है, जिन्हें नक्सलवाद से लड़ने के लिए स्थापित किया गया था।
उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में करीब 200 सुरक्षा कैंप स्थापित किए थे, जहाँ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान तैनात थे। नक्सलवाद समाप्त होने के बाद इनमें से 70 कैंपों को 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा' में रूपांतरित किया जाएगा।
आदिवासी परिवारों को आर्थिक सशक्तिकरण की योजना
शाह ने कहा कि इन सेवा डेरों के माध्यम से बस्तर के प्रत्येक आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराई जाएगी। सहकारी मॉडल के जरिए उनके दूध का विपणन पूरे देश में किया जाएगा, जिससे आदिवासी परिवारों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि बस्तर में अब भय नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार और समृद्धि की नई कहानी लिखी जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार नक्सल-मुक्त क्षेत्रों में दीर्घकालिक पुनर्वास और बुनियादी ढाँचे के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है।