बस्तर के सुरक्षा कैंप बनेंगे जनसेवा केंद्र, आदिवासियों को नौकरी में 15% आरक्षण: अमित शाह

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बस्तर के सुरक्षा कैंप बनेंगे जनसेवा केंद्र, आदिवासियों को नौकरी में 15% आरक्षण: अमित शाह

सारांश

बस्तर के नेतानार कैंप का रूपांतरण महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं — यह नक्सलवाद के बाद के भारत की नई तस्वीर है। 196 में से 70 सुरक्षा कैंप डेढ़ साल में जनसेवा केंद्र बनेंगे, आदिवासियों को 15% आरक्षण मिलेगा और 371 योजनाएँ एक छत के नीचे। शाह ने कहा — 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर में आजादी का सूर्य उदय हुआ है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को बस्तर में 'शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा' जन सुविधा केंद्र का शुभारंभ किया।
बस्तर के 196 कैंपों में से 70 कैंपों को डेढ़ साल के भीतर जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा।
सरकारी नौकरियों में आदिवासी भाई-बहनों के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया।
कॉमन सर्विस सेंटर के ज़रिए केंद्र व राज्य की 371 योजनाओं का लाभ एक ही भवन से मिलेगा।
प्रत्येक आदिवासी महिला को दो पशु देने और हर गाँव में डेयरी पहुँचाने का संकल्प नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से लिया गया।
केंद्रों के डिज़ाइन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन को परियोजना सौंपी जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में 'शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा' जन सुविधा केंद्र के शुभारंभ पर घोषणा की कि जिन स्थानों पर सुरक्षा बलों ने नक्सल-मुक्त भारत के लिए सुरक्षा कैंप स्थापित किए थे, वहाँ अब कॉमन सर्विस सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में 15 प्रतिशत आरक्षण आदिवासी भाई-बहनों के लिए सुनिश्चित किया गया है।

नेतानार कैंप का ऐतिहासिक रूपांतरण

नेतानार कैंप, जो 2013 से सुरक्षा चौकी के रूप में कार्यरत था, अब आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए समर्पित सेवा केंद्र में बदला जा रहा है। शाह ने कहा कि यह भूमि शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि है, जिन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध बस्तर के आदिवासियों को एकजुट किया था। उनसे प्रेरणा लेकर यह सुरक्षा केंद्र अब सेवा केंद्र का रूप ले रहा है।

गृह मंत्री ने कहा, बस्तर में अभी तक लगभग 196 कैंप हैं, जिनमें से 70 कैंपों को डेढ़ साल के भीतर इसी प्रकार के सेवा केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा।

आदिवासियों के लिए घोषित सुविधाएँ

शाह ने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही भवन से मिलेगा। इन केंद्रों में बैंकिंग सुविधा, आधार कार्ड, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं का भुगतान — सभी एक छत के नीचे उपलब्ध होगा। केंद्रों को बेहतर ढंग से डिज़ाइन करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन को यह परियोजना सौंपी जाएगी।

डेयरी क्षेत्र में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से हर गाँव तक डेयरी पहुँचाने और प्रत्येक आदिवासी महिला को दो पशु देने का संकल्प केंद्र व राज्य सरकार ने मिलकर लिया है। वन उपज की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की कोऑपरेटिव बनाने की भी घोषणा की गई।

नक्सलवाद के बाद विकास का नया अध्याय

शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर में 'आजादी का सूर्य उदय' हुआ है। उन्होंने नक्सलवाद के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय बच्चों को स्कूलों से उठाकर नक्सली कैंपों में ले जाया जाता था, निर्दोष लोगों को सार्वजनिक रूप से फाँसी दी जाती थी और स्कूल-अस्पताल उजाड़ दिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय 6 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी।

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि नक्सलियों ने यह गलतफहमी फैलाई कि विकास न होने के कारण उन्होंने हथियार उठाए, जबकि वास्तविकता यह थी कि उनके हथियारबंद होने के कारण ही विकास रुका रहा। अब उनके सरेंडर के बाद विकास की शुरुआत हो चुकी है।

शिक्षा और रोजगार पर जोर

शाह ने बताया कि बस्तर में पूर्ण साक्षरता के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी परिवारों से आग्रह किया कि एक बार बच्चों को पढ़ा दें, तो उन्हें सरकारी नौकरी और उद्योगों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। 15 प्रतिशत आरक्षण की गारंटी के साथ, सरकार ने आश्वस्त किया कि जनजातीय भाई-बहनों को वे सभी सुविधाएँ मिलेंगी जो दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में उपलब्ध हैं।

आगे की राह

शाह ने विश्वास दिलाया कि छह महीनों के भीतर यह केंद्र स्थानीय आदिवासियों की भागीदारी से जीवंत हो उठेगा। भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर बस्तर के नुकसान की भरपाई करेंगी। डेयरी, वन उपज और कॉमन सर्विस सेंटर — ये तीनों मिलकर इस क्षेत्र में रोजगार के नए युग की नींव रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी। 15% आरक्षण की घोषणा तब तक अधूरी है जब तक बस्तर के सुदूर गाँवों में शिक्षा का ढाँचा मज़बूत नहीं होता — क्योंकि आरक्षण का लाभ तभी मिलता है जब योग्य उम्मीदवार तैयार हों। 196 में से केवल 70 कैंपों का डेढ़ साल में रूपांतरण और बाकी 126 का भविष्य अस्पष्ट रहना, इस योजना की सीमाओं को रेखांकित करता है। 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा के बाद यह पहला बड़ा विकास कदम है — लेकिन दशकों की वंचना की भरपाई के लिए केवल घोषणाएँ नहीं, ज़मीनी जवाबदेही चाहिए।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बस्तर में सुरक्षा कैंपों को जनसेवा केंद्रों में क्यों बदला जा रहा है?
नक्सलवाद की समाप्ति के बाद जिन स्थानों पर सुरक्षा कैंप 'सिक्योरिटी वैक्यूम' भरने के लिए बनाए गए थे, वहाँ अब आदिवासियों को सरकारी सुविधाएँ देने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। यह कदम नक्सल-मुक्त क्षेत्रों में विकास को ज़मीन पर उतारने की रणनीति का हिस्सा है।
कितने सुरक्षा कैंप जनसेवा केंद्रों में बदले जाएँगे और कब तक?
बस्तर में कुल लगभग 196 कैंप हैं, जिनमें से 70 कैंपों को डेढ़ साल के भीतर जनसेवा केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। नेतानार कैंप, जो 2013 से सुरक्षा चौकी था, इस रूपांतरण का पहला उदाहरण है।
आदिवासियों को नौकरी में कितना आरक्षण मिलेगा?
अमित शाह ने घोषणा की कि किसी भी सरकारी नौकरी के विज्ञापन में आदिवासी भाई-बहनों के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही उद्योगों में भी रोजगार के अवसर दिलाने का संकल्प लिया गया है।
कॉमन सर्विस सेंटर में कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलेंगी?
इन केंद्रों में बैंकिंग, आधार कार्ड, राशन कार्ड और केंद्र व राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही भवन से मिलेगा। केंद्रों का डिज़ाइन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन तैयार करेगा।
बस्तर में डेयरी और वन उपज के लिए क्या योजना है?
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से हर गाँव में डेयरी पहुँचाई जाएगी और प्रत्येक आदिवासी महिला को दो पशु दिए जाएँगे। वन उपज की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर की एक कोऑपरेटिव बनाने की भी घोषणा की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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