पूर्वी भारत कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बने: शिवराज सिंह चौहान का भुवनेश्वर में आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार, 19 मई को भुवनेश्वर में स्पष्ट किया कि पूर्वी भारत देश के कृषि विकास का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता रखता है। मेफेयर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग, दलहन-तिलहन उत्पादन और टिकाऊ खेती को क्षेत्र की कृषि रणनीति की धुरी बनाने पर ज़ोर दिया।
सम्मेलन का उद्देश्य और संदेश
चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन महज औपचारिकता नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की कृषि, किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय कृषि रणनीति को नई दिशा देने के लिए गंभीर विचार-विमर्श का मंच है। उन्होंने पूर्वी भारत की खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ, वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने का सशक्त आह्वान किया। किसानों को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा है।
तीन प्रमुख कृषि लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने किसानों के सामने तीन प्राथमिक लक्ष्य रखे — 140 करोड़ देशवासियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषणयुक्त आहार की उपलब्धता और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना, नुकसान होने पर भरपाई और कृषि का विविधीकरण आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
फसल विविधीकरण पर ज़ोर
चौहान ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि केवल धान और गेहूँ पर निर्भरता पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने दलहन, तिलहन, फल, सब्जियाँ और अन्य उच्च मूल्य फसलों की दिशा में आगे बढ़ने की ज़रूरत बताई, क्योंकि पूर्वी भारत में इन सभी क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी राज्यों में छोटी जोत एक बड़ी वास्तविकता है, इसलिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को केवल नारा नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरा हुआ मॉडल बनाना होगा।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल
मंत्री ने बताया कि अनाज उत्पादन के साथ-साथ फल, सब्जियाँ, मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आय में बड़ी वृद्धि संभव है। यह बहु-आयामी दृष्टिकोण पूर्वी भारत के लघु किसानों के लिए आर्थिक स्थिरता का आधार बन सकता है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए इसे पूर्वी राज्यों के लिए कृषि भविष्य का साझा रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन पूर्वोदय की परिकल्पना को बल देगा और पूर्वी भारत की कृषि उत्पादकता, जलवायु-अनुकूल खेती तथा समावेशी कृषि विकास को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। आगे, क्षेत्रीय कृषि नीति के क्रियान्वयन और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में इस सम्मेलन के निष्कर्ष निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।