यमुना बचाओ: दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने क्षतिग्रस्त मूर्तियों की रीसाइक्लिंग के लिए विशेष केंद्र खोलने का ऐलान किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यमुना बचाओ: दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने क्षतिग्रस्त मूर्तियों की रीसाइक्लिंग के लिए विशेष केंद्र खोलने का ऐलान किया

सारांश

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने क्षतिग्रस्त मूर्तियों की रीसाइक्लिंग के लिए विशेष केंद्र खोलने की घोषणा की — यमुना में विसर्जन का सम्मानजनक विकल्प देने की यह पहल आस्था और पर्यावरण को एक साथ साधने की कोशिश है। जनता से केंद्रों के स्थान के सुझाव माँगे गए हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 19 मई को क्षतिग्रस्त मूर्तियों की सम्मानजनक रीसाइक्लिंग के लिए विशेष केंद्र खोलने का ऐलान किया।
यह पहल नागरिकों को यमुना नदी में धार्मिक सामग्री विसर्जित करने का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प देगी।
CM ने एक्स पर पोस्ट कर जनता से संग्रह केंद्रों के लिए स्थान सुझाव माँगे।
यह पहल उपराज्यपाल टीएस संधू के यमुना पुनर्जीवन और दिल्ली के पाँच-स्तंभीय विकास विजन के अनुरूप है।
केंद्रों की संख्या, स्थान और संचालन की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार, 19 मई को एक महत्वपूर्ण सरकारी अभियान की घोषणा की, जिसके तहत क्षतिग्रस्त धार्मिक मूर्तियों को सम्मानपूर्वक रीसाइकिल किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को यमुना नदी और अन्य जलाशयों में धार्मिक सामग्री विसर्जित करने का एक जिम्मेदार विकल्प प्रदान करना है। यह कदम यमुना के बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री की घोषणा और जनभागीदारी की अपील

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हम अपनी पूजनीय मूर्तियों को सम्मानपूर्वक रीसाइकिल करने के लिए विशेष केंद्र शुरू कर रहे हैं। यह स्वच्छ और सांस्कृतिक रूप से जागरूक विकसित दिल्ली की दिशा में एक भावनात्मक कदम है।' उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सुझाव दें कि ऐसे संग्रह और रीसाइक्लिंग केंद्र कहाँ खोले जाएँ।

गुप्ता ने आगे कहा, 'क्या आपके पास किसी स्थान का सुझाव है? जनता की भागीदारी हर अच्छे प्रयास को मजबूत बनाती है। अपने सुझाव साझा करें और आइए, आस्था का सम्मान जिम्मेदारी और गरिमा के साथ मिलकर करें।' इस अपील पर नागरिकों की तत्काल और सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई।

जनता की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए एक नागरिक ने सुझाव दिया कि 'जैसे हर मंदिर में दानपात्र होता है, वैसे ही हर इलाके में टूटी हुई मूर्तियों को सम्मानपूर्वक रखने के लिए 'मूर्ति कलश' होना चाहिए। अगर संग्रह केंद्र दूर होंगे तो लोग सही तरीके से मूर्तियाँ नहीं रख पाएंगे।' एक अन्य नागरिक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह 'आस्था, संस्कृति और धार्मिक भावनाओं के सम्मान की दिशा में बहुत ही सोच-समझकर उठाया गया कदम है।'

उपराज्यपाल के विजन से तालमेल

दिल्ली सरकार की यह पहल उपराज्यपाल टीएस संधू के उस व्यापक विजन के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने यमुना की सफाई और दिल्ली के समग्र विकास का संकल्प लिया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में आयोजित एक कार्यक्रम में उपराज्यपाल संधू ने कहा कि स्थिरता, समावेशन, संस्कृति, नवाचार, आर्थिक विकास और संवेदनशीलता — ये पाँच स्तंभ दिल्ली के भविष्य की नींव हैं।

संधू ने स्पष्ट किया कि 'यमुना को सिर्फ साफ ही नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे दिल्ली की एक जीवंत पर्यावरणीय और सांस्कृतिक जीवनरेखा के रूप में पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए।' उन्होंने वायु प्रदूषण, जलाशयों का पुनर्जीवन, प्रभावी कचरा प्रबंधन, टिकाऊ परिवहन और हरित क्षेत्र विस्तार को भी शहरी विकास की प्राथमिकताओं में रखा।

आम जनता पर असर

यह अभियान विशेष रूप से उन लाखों नागरिकों के लिए प्रासंगिक है जो त्योहारों — जैसे गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और नवरात्रि — के बाद मूर्तियाँ विसर्जित करते हैं। यमुना में मूर्ति विसर्जन से पेंट, प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों के कारण जल प्रदूषण बढ़ता है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाए बिना नदी की सेहत सुधारने का एक व्यावहारिक मॉडल बन सकती है।

आगे क्या होगा

अभी तक सरकार ने रीसाइक्लिंग केंद्रों की संख्या, स्थान और संचालन की समयसीमा स्पष्ट नहीं की है। जनता से सुझाव माँगे जा रहे हैं, जिसके आधार पर केंद्रों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। यह पहल दिल्ली में पर्यावरण-सचेत धार्मिक आचरण की दिशा में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — दिल्ली में इससे पहले भी यमुना सफाई के वादे कई सरकारों ने किए हैं और अधिकांश अधूरे रहे हैं। जनता से सुझाव माँगना जनभागीदारी का संकेत है, पर केंद्रों की संख्या, पहुँच और वित्त पोषण पर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है। यदि संग्रह केंद्र पर्याप्त और सुलभ नहीं हुए, तो नागरिक पुरानी आदत — नदी में विसर्जन — पर लौट सकते हैं। यह पहल तभी सार्थक होगी जब इसे त्योहारी कैलेंडर से पहले ज़मीन पर उतारा जाए और पारदर्शी निगरानी तंत्र बनाया जाए।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली CM रेखा गुप्ता का मूर्ति रीसाइक्लिंग अभियान क्या है?
यह दिल्ली सरकार की एक पहल है जिसके तहत क्षतिग्रस्त धार्मिक मूर्तियों को सम्मानपूर्वक रीसाइकिल करने के लिए विशेष संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य नागरिकों को यमुना नदी और अन्य जलाशयों में मूर्ति विसर्जन का एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प देना है।
यमुना में मूर्ति विसर्जन से क्या समस्या होती है?
मूर्तियों में प्रयुक्त प्लास्टर ऑफ पेरिस, रासायनिक रंग और प्लास्टिक सामग्री यमुना के जल को प्रदूषित करती है। यह नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाती है और जल की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
मूर्ति रीसाइक्लिंग केंद्र कहाँ और कब खुलेंगे?
अभी तक सरकार ने केंद्रों के स्थान और संचालन की आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की है। CM रेखा गुप्ता ने जनता से एक्स पर सुझाव माँगे हैं कि ये केंद्र किन इलाकों में खोले जाएँ।
उपराज्यपाल टीएस संधू का यमुना से जुड़ा विजन क्या है?
उपराज्यपाल टीएस संधू ने यमुना को महज साफ करने से आगे जाकर इसे दिल्ली की जीवंत पर्यावरणीय और सांस्कृतिक जीवनरेखा के रूप में पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने स्थिरता, समावेशन, संस्कृति, नवाचार और संवेदनशीलता को दिल्ली के विकास के पाँच मुख्य स्तंभ बताया है।
इस पहल से दिल्ली के नागरिकों को क्या फायदा होगा?
नागरिकों को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए क्षतिग्रस्त मूर्तियों के निपटान का एक गरिमापूर्ण और कानूनी विकल्प मिलेगा। साथ ही यमुना की सफाई में योगदान देने का अवसर भी मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक रूप से नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बेहतर हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले