झारखंड में निवेश को मिलेगी रफ्तार: दावोस-यूके दौरे के बाद CM हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 अप्रैल, रांची में दावोस WEF और UK यात्रा के बाद निवेश एमओयू की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की।
- टेक्सटाइल, आईटी, फूड प्रोसेसिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, पर्यटन, ऑटोमोबाइल और ईवी कंपोनेंट्स में निवेश को प्राथमिकता दी गई।
- झारखंड से श्रम पलायन रोकने और महिला रोजगार बढ़ाने के लिए टेक्सटाइल पॉलिसी बनाने के निर्देश दिए गए।
- UK के संस्थानों के साथ संयुक्त साझेदारी में क्रिटिकल मिनरल्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना।
- मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों की जियो टैगिंग कर पर्यटन विकास की कार्ययोजना बनाने के निर्देश।
- बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित उद्योग, वित्त, आईटी और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में निवेश और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, रांची में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) और यूनाइटेड किंगडम (UK) की सफल यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित एमओयू (समझौता ज्ञापनों) को शीघ्र जमीन पर उतारने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में किन क्षेत्रों पर रहा फोकस
सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को टेक्सटाइल उद्योग, उच्च शिक्षा, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, क्रिटिकल मिनरल्स, पर्यटन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और ईवी कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सभी सेक्टरों में निवेश के लिए सरल, बेहतर और आकर्षक कार्ययोजना बनाना अनिवार्य है।
बैठक में उन सभी औद्योगिक संस्थानों और समूहों पर विशेष चर्चा हुई जो राज्य में निवेश के लिए अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के इच्छुक कंपनियों के प्रस्तावों को प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाए।
टेक्सटाइल नीति और महिला रोजगार पर जोर
सीएम सोरेन ने वस्त्र उद्योग (Textile Industry) को राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने एक गंभीर तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — झारखंड से बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में जाकर टेक्सटाइल सेक्टर में काम करते हैं। यदि राज्य में ही एक सुदृढ़ टेक्सटाइल पॉलिसी बने तो यह पलायन रुकेगा और स्थानीय रोजगार सृजन होगा।
यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि झारखंड से श्रम पलायन वर्षों से एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती रही है। सूरत, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में झारखंड के श्रमिकों की बड़ी उपस्थिति इस समस्या की गहराई को दर्शाती है।
दावोस में झारखंड की वैश्विक छवि
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि दावोस के विश्व आर्थिक मंच में झारखंड का प्रतिनिधित्व राज्य के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब था। उन्होंने बताया कि वैश्विक मंच पर झारखंड को एक निवेश-अनुकूल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। कई अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक संस्थानों और समूहों के साथ सकारात्मक वार्ता हुई, जिससे आने वाले समय में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में निवेश आकर्षित करने के लिए कई वैश्विक मंचों पर सक्रिय भागीदारी की है। इन्वेस्टमेंट समिट और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के माध्यम से एमओयू की संख्या बढ़ी है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन समझौतों को वास्तविक उद्योगों में बदलने की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है — यही कारण है कि सीएम सोरेन ने इस बार समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया।
क्रिटिकल मिनरल्स और UK साझेदारी
मुख्यमंत्री ने क्रिटिकल मिनरल्स के शोध, उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के प्रमुख संस्थानों के साथ संयुक्त साझेदारी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के निर्देश दिए। यह झारखंड की खनिज संपदा को वैश्विक हरित ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम है।
इसके अलावा मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों के विकास एवं संरक्षण के लिए राज्य के सभी संबंधित क्षेत्रों से जियो टैगिंग करने और विस्तृत जानकारी एकत्र करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, प्रधान सचिव (उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विभाग) राहुल पुरवार, सचिव (उद्योग विभाग) अरवा राजकमल, सचिव (वित्त विभाग) प्रशांत कुमार, सचिव (सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग) श्रीमती पूजा सिंघल, सचिव (पर्यटन विभाग) मुकेश कुमार और विशेष सचिव (आईपीआरडी) राजीव लोचन बक्शी सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि दावोस और यूके में हस्ताक्षरित एमओयू कितनी जल्दी वास्तविक उद्योगों और रोजगार में तब्दील होते हैं — यही हेमंत सोरेन सरकार की औद्योगिक नीति की असली परीक्षा होगी।