ब्रह्मपुर हवाई अड्डे के विकास की माँग: डॉ. सस्मित पात्रा ने नागरिक उड्डयन मंत्री को सौंपा विस्तृत ज्ञापन

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ब्रह्मपुर हवाई अड्डे के विकास की माँग: डॉ. सस्मित पात्रा ने नागरिक उड्डयन मंत्री को सौंपा विस्तृत ज्ञापन

सारांश

दक्षिणी ओडिशा के लाखों लोगों की वर्षों पुरानी माँग एक बार फिर संसद से सड़क तक गूँजी। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने नागरिक उड्डयन मंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर रंगेलूंदा को 'ब्रह्मपुर हवाई अड्डे' में बदलने की अपील की — जो उड़ान योजना की कसौटी पर भी खरी उतरती है।

मुख्य बातें

सस्मित पात्रा ने 19 मई 2026 को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
गंजाम जिले की रंगेलूंदा हवाई पट्टी को पूर्ण वाणिज्यिक हवाई अड्डे में बदलने की माँग; प्रस्तावित नाम 'ब्रह्मपुर हवाई अड्डा' ।
पात्रा ने फरवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच संसद में यह मुद्दा चार बार उठाया।
फरवरी 2026 में सरकार ने माना कि रंगेलूंदा को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) उड़ानों के लिए विकसित किया जाएगा।
परियोजना से गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगड़ा, मलकानगिरी और पड़ोसी आंध्र प्रदेश के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद।
AAI और ओडिशा सरकार के साथ संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने का अनुरोध किया गया।

ओडिशा से राज्यसभा सदस्य डॉ. सस्मित पात्रा ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर माँग की है कि गंजाम जिले में स्थित रंगेलूंदा हवाई पट्टी को शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण विकसित वाणिज्यिक हवाई अड्डे में परिवर्तित किया जाए। इस प्रस्तावित हवाई अड्डे को आधिकारिक रूप से 'ब्रह्मपुर हवाई अड्डा' नाम दिया जाएगा। 19 मई 2026 को नई दिल्ली में सौंपे गए इस ज्ञापन में डॉ. पात्रा ने दक्षिणी ओडिशा की दशकों पुरानी कनेक्टिविटी की कमी को रेखांकित किया।

क्षेत्र की ज़रूरत और पिछड़ापन

डॉ. पात्रा ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि गंजाम, गजपति, कंधमाल, कोरापुट, रायगड़ा और मलकानगिरी सहित दक्षिणी ओडिशा के अनेक जिले आर्थिक, शैक्षिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, परंतु विमानन सुविधाओं के मामले में अब भी गंभीर रूप से पिछड़े हुए हैं। ब्रह्मपुर दक्षिणी ओडिशा का प्रमुख वाणिज्यिक और शैक्षिक केंद्र है, जो न केवल ओडिशा के दक्षिणी जिलों बल्कि पड़ोसी आंध्र प्रदेश की बड़ी आबादी को भी हवाई सेवाएँ प्रदान कर सकता है।

संसद में उठाए गए पिछले प्रयास

डॉ. पात्रा ने इस मुद्दे पर अपने निरंतर संसदीय प्रयासों का विवरण भी ज्ञापन में दर्ज किया। फरवरी 2025 में उन्होंने रंगेलूंदा में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण से संबंधित प्रश्न उठाया था। मार्च 2025 में ओडिशा की विमानन परियोजनाओं में तेजी लाने की माँग की गई। दिसंबर 2025 में शून्यकाल के दौरान उन्होंने रंगेलूंदा को पूर्ण हवाई अड्डे में बदलने की जोरदार वकालत की। फरवरी 2026 में राज्यसभा में पुनः प्रश्न उठाने पर सरकार ने स्वीकार किया कि रंगेलूंदा को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) उड़ानों के लिए विकसित किया जाएगा।

हवाई अड्डे से होने वाले संभावित लाभ

डॉ. पात्रा के अनुसार, पूर्ण विकसित ब्रह्मपुर हवाई अड्डा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगा और गोपालपुर तथा तटीय ओडिशा के पर्यटन को नई ऊँचाई देगा। समुद्री भोजन, कृषि उत्पाद और लघु उद्योगों के निर्यात को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ, मेडिकल इवैक्यूएशन और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्य कहीं अधिक प्रभावी हो सकेंगे। औद्योगिक निवेश आकर्षित करने में भी यह परियोजना निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

उड़ान योजना से साम्यता और की गई माँगें

डॉ. पात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना केंद्र सरकार की 'उड़ान' योजना के उद्देश्यों से पूरी तरह मेल खाती है, जिसका लक्ष्य देश के प्रत्येक कोने को हवाई सेवा से जोड़ना है। उन्होंने मंत्रालय से माँग की है कि रंगेलूंदा को क्षेत्रीय वाणिज्यिक हवाई अड्डे के रूप में अपग्रेड किया जाए, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और ओडिशा सरकार के साथ संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन शुरू किया जाए, टर्मिनल भवन, रनवे और नेविगेशन सुविधाओं का विकास किया जाए, और इसे औपचारिक रूप से 'ब्रह्मपुर हवाई अड्डा' नाम दिया जाए।

आगे की राह

डॉ. सस्मित पात्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू के नेतृत्व में दक्षिणी ओडिशा की इस दीर्घकालीन माँग पर सकारात्मक और त्वरित निर्णय लिया जाएगा। यह क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति दे सकता है और लाखों लोगों की जीवन-गुणवत्ता में सुधार ला सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्ण वाणिज्यिक हवाई अड्डे और क्षेत्रीय उड़ान सेवा के बीच का फर्क दक्षिणी ओडिशा के लिए बेहद मायने रखता है। गौरतलब है कि उड़ान योजना के तहत कई हवाई पट्टियाँ घोषित तो हुईं, पर उनमें से अनेक पर नियमित उड़ानें आज भी नहीं हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह ज्ञापन व्यवहार्यता अध्ययन की मेज तक भी पहुँचेगा, या फिर संसदीय रिकॉर्ड में एक और दर्ज माँग बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रह्मपुर हवाई अड्डा परियोजना क्या है?
यह दक्षिणी ओडिशा के गंजाम जिले में स्थित रंगेलूंदा हवाई पट्टी को पूर्ण विकसित वाणिज्यिक हवाई अड्डे में बदलने की परियोजना है, जिसे आधिकारिक रूप से 'ब्रह्मपुर हवाई अड्डा' नाम दिया जाएगा। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इसके लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को ज्ञापन सौंपा है।
डॉ. सस्मित पात्रा ने इस मुद्दे पर क्या माँगें रखी हैं?
उन्होंने रंगेलूंदा को क्षेत्रीय वाणिज्यिक हवाई अड्डे के रूप में अपग्रेड करने, AAI और ओडिशा सरकार के साथ संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने, टर्मिनल भवन-रनवे-नेविगेशन सुविधाओं के विकास और इसे 'ब्रह्मपुर हवाई अड्डा' नाम देने की माँग की है। यह माँगें 19 मई 2026 को सौंपे गए ज्ञापन में दर्ज हैं।
इस हवाई अड्डे से किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
गंजाम, गजपति, कंधमाल, कोरापुट, रायगड़ा और मलकानगिरी सहित दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों के साथ-साथ पड़ोसी आंध्र प्रदेश की बड़ी आबादी को भी इस हवाई अड्डे से सीधा लाभ मिल सकता है। पर्यटन, निर्यात और आपदा राहत कार्यों में भी सुधार की उम्मीद है।
क्या सरकार ने पहले इस परियोजना पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
फरवरी 2026 में राज्यसभा में प्रश्न उठाने पर सरकार ने स्वीकार किया था कि रंगेलूंदा को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) उड़ानों के लिए विकसित किया जाएगा। हालाँकि, पूर्ण वाणिज्यिक हवाई अड्डे के विकास को लेकर कोई औपचारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है।
यह परियोजना उड़ान योजना से कैसे जुड़ी है?
डॉ. पात्रा के अनुसार, ब्रह्मपुर हवाई अड्डा परियोजना केंद्र सरकार की 'उड़ान' (UDAN) योजना के उद्देश्यों से पूरी तरह मेल खाती है, जिसका लक्ष्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई सेवा से जोड़ना है। इस योजना के तहत रंगेलूंदा को विकसित करना सरकार की घोषित प्राथमिकताओं के अनुरूप होगा।
राष्ट्र प्रेस
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