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कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई को आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले की नई जांच तेज करने का आदेश दिया

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई को आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले की नई जांच तेज करने का आदेश दिया

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई को आरजी कर मामले की नई जांच में तेजी लाने का कड़ा आदेश दिया है। न्यायालय ने साफ कहा — पुरानी जांच को एक तरफ रखें और मामले को बिल्कुल नए सिरे से देखें। 28 अगस्त की सुनवाई अब असली कसौटी होगी।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को सीबीआई को आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले की नई जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने जांच की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जताई।
न्यायालय ने सीबीआई को पुरानी जांच का प्रभाव छोड़कर मामले को नए सिरे से देखने का स्पष्ट निर्देश दिया।
अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी, जिसमें ठोस और सकारात्मक प्रगति की अपेक्षा है।
एकमात्र दोषी संजय रॉय को पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है; नई जांच पीड़िता परिवार की माँग पर न्यायालय के आदेश से शुरू हुई थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बलात्कार-हत्या मामले में जारी नई जांच की गति तेज करने का कड़ा निर्देश दिया। न्यायालय ने प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के बाद जांच की धीमी रफ्तार पर खुली नाराजगी जताई और अगली सुनवाई तक ठोस परिणाम की अपेक्षा रखी।

न्यायालय की फटकार और निर्देश

न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने सीबीआई द्वारा अतिरिक्त समय की माँग पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह 28 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में नई जांच में 'कुछ ठोस और सकारात्मक प्रगति' देखना चाहती है।

न्यायमूर्ति सरकार ने सीबीआई की नई टीम को सीधे शब्दों में कहा — 'पिछली जांच को भूल जाइए। उसे एक तरफ रख दीजिए और मामले को नए सिरे से देखिए। पिछली जांच से प्रभावित होकर कोई नई जांच न कीजिए।'

मामले की पृष्ठभूमि

अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ जघन्य बलात्कार और हत्या की घटना सामने आई थी। कोलकाता पुलिस ने शुरुआती जांच में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को एकमात्र आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया, जिसे बाद में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

यह ऐसे समय में आया जब सीबीआई की पहली जांच टीम पर आरोप लगे कि उसने कोलकाता पुलिस की जांच पर ही हस्ताक्षर कर दिए — यानी स्वतंत्र पुनर्जांच नहीं की। इससे असंतुष्ट पीड़िता के परिवार ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जिसके बाद न्यायालय ने सीबीआई की नई टीम से ताज़ा जांच का आदेश दिया।

नई जांच पर न्यायालय की आपत्ति

गुरुवार की सुनवाई में पीठ ने पाया कि सीबीआई की नई टीम भी पुरानी जांच से प्रभावित होकर काम कर रही है। न्यायालय ने कहा कि उसने बार-बार निर्देश दिया था कि बलात्कार और हत्या से जुड़े सभी बिंदुओं की स्वतंत्र रूप से पुनर्जांच की जाए, लेकिन इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

गौरतलब है कि यह मामला देशभर में चिकित्सा संस्थानों में महिला सुरक्षा को लेकर व्यापक विरोध का कारण बना था और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस पर संज्ञान लिया था।

आगे क्या होगा

अब सीबीआई की नई जांच टीम को 28 अगस्त तक ठोस प्रगति के साथ न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा। न्यायालय के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने में किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला न केवल न्यायिक जवाबदेही का प्रश्न है, बल्कि देश की जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दर्शाता है कि एजेंसी परिवर्तन नाम में हुआ, व्यवहार में नहीं। न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है — यह संकेत है कि जांच तंत्र में स्वतंत्र पुनर्जांच की संस्कृति अभी भी कमज़ोर है। 28 अगस्त की सुनवाई न केवल इस मामले की, बल्कि सीबीआई की साख की भी परीक्षा होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरजी कर बलात्कार-हत्या मामला क्या है?
अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ जघन्य बलात्कार और हत्या की घटना हुई थी। कोलकाता पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया, जिसे बाद में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सीबीआई को नई जांच का आदेश क्यों दिया गया?
पीड़िता का परिवार सीबीआई की पहली जांच से असंतुष्ट था, क्योंकि उस टीम पर कोलकाता पुलिस की जांच को ही दोहराने का आरोप लगा था। परिवार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद न्यायालय ने सीबीआई की नई टीम से स्वतंत्र पुनर्जांच का आदेश दिया।
6 अगस्त की सुनवाई में न्यायालय ने क्या कहा?
कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई की नई जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताई और कहा कि नई टीम पुरानी जांच से प्रभावित हो रही है। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार ने सीबीआई को स्पष्ट निर्देश दिया कि पुरानी जांच को एक तरफ रखकर मामले को बिल्कुल नए सिरे से देखा जाए।
अगली सुनवाई कब होगी और क्या अपेक्षा है?
अगली सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित है। न्यायालय ने कहा है कि वह उस तारीख तक नई जांच में ठोस और सकारात्मक प्रगति देखना चाहता है, अन्यथा एजेंसी को और कड़े निर्देशों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या संजय रॉय के अलावा कोई और आरोपी है?
अब तक संजय रॉय ही एकमात्र दोषी ठहराए गए व्यक्ति हैं, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली है। नई जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या मामले में अन्य बिंदु या संभावित आरोपी हैं जिनकी पहले अनदेखी हुई।
राष्ट्र प्रेस
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