अखनूर सेक्टर में सर्विस राइफल से गलती से गोली चलने पर सैनिक की मौत, जाँच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में 3 अगस्त 2026 को एक दर्दनाक हादसे में भारतीय सेना के एक जवान की जान चली गई, जब खौर के फॉरवर्ड जोगवान इलाके में ऑपरेशनल ड्यूटी के दौरान उसकी अपनी सर्विस राइफल से गलती से गोली चल गई। अधिकारियों के अनुसार, जवान को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
घटनाक्रम का विवरण
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जाँच से संकेत मिलता है कि रविवार को हुई इस घटना में जवान के हथियार से अनजाने में गोली चली, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल जवान को फौरन नज़दीकी चिकित्सा केंद्र पहुँचाया गया, परंतु उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि जवान के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए अखनूर के मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया है। सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। सैन्य और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है।
हालिया आकस्मिक हादसों का सिलसिला
यह घटना जम्मू-कश्मीर में सैन्य कर्मियों की आकस्मिक मौतों की एक चिंताजनक श्रृंखला की नवीनतम कड़ी है। 9 जून को उरी सेक्टर के एक कैंप में रूटीन इक्विपमेंट हैंडओवर के दौरान ग्रेनेड के गलती से फटने से सेना के दो जवान मारे गए थे।
11 अप्रैल को डोडा जिले के भद्रवाह स्थित सरना कैंप में एक सैनिक हथियार का चैंबर खाली करते समय गलती से गोली चलने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके अलावा, 29 जुलाई को 8 राष्ट्रीय राइफल्स के दो जवानों — अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण — की कमलकोट के पास एक अचानक हुए विस्फोट में मौत हो गई थी।
लैंडमाइन से जुड़े खतरे
हथियारों से होने वाले हादसों के अलावा, लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर लैंडमाइन विस्फोटों से भी जवानों की जान जा रही है। उरी सेक्टर और पुंछ में हाल की घटनाएँ इसी का उदाहरण हैं। पुंछ और राजौरी के कृष्णा घाटी जैसे सेक्टरों में गश्त करने वाले दस्तों को तब नुकसान उठाना पड़ा जब जवान अनजाने में लैंडमाइन की चपेट में आ गए, या भारी बारिश व भूस्खलन के कारण बिना चिह्नित स्थानों पर खिसककर आई माइंस से टकरा गए।
गौरतलब है कि घुसपैठ रोकने के लिए सेना संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में डिफेंसिव लैंडमाइन बिछाती है। यह व्यवस्था घुसपैठ पर तो अंकुश लगाती है, लेकिन नियमित गश्त के दौरान अपने ही जवानों के लिए अनजाने में खतरा भी उत्पन्न करती है।
जाँच और आगे की प्रक्रिया
सैन्य और स्थानीय पुलिस अधिकारी हथियारों से जुड़े प्रत्येक आकस्मिक फायरिंग की परिस्थितियों की जाँच के लिए औपचारिक जाँच प्रक्रिया शुरू करते हैं। ऐसी सभी घटनाओं में घायल जवानों को तत्काल निकटतम मिलिट्री फील्ड या बेस हॉस्पिटल पहुँचाया जाता है, हालाँकि गंभीर चोटें अक्सर जानलेवा साबित होती हैं। अखनूर हादसे की जाँच रिपोर्ट आने के बाद सेना आगे की कार्रवाई तय करेगी।