शोपियां में ड्यूटी के दौरान पुलिस कांस्टेबल की गलती से चली गोली से मौत

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शोपियां में ड्यूटी के दौरान पुलिस कांस्टेबल की गलती से चली गोली से मौत

सारांश

जम्मू-कश्मीर के शोपियां में ड्यूटी के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल की आकस्मिक फायरिंग में जान चली गई। यह घटना सुरक्षा बलों की सावधानी बरतने की आवश्यकता को दर्शाती है।

Key Takeaways

  • जम्मू-कश्मीर में पुलिस कांस्टेबल की आकस्मिक फायरिंग में मौत।
  • घटना के बाद कांस्टेबल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
  • जांच की जा रही है कि फायरिंग किस परिस्थिति में हुई।
  • सुरक्षा बलों को फायरिंग की घटनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
  • ड्रग तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान जारी है।

श्रीनगर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में मंगलवार को ड्यूटी के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल की आकस्मिक फायरिंग में जान चली गई। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना दो दिन पूर्व हुई थी, जब ड्यूटी के दौरान एक साथी पुलिसकर्मी की बंदूक से गलती से गोली चल गई।

जिस कांस्टेबल ने अपनी जान गंवाई, वह शोपियां जिले के नूरपोरा गांव का निवासी था। घटना के तुरंत बाद उसे सेना के बेस हॉस्पिटल बादामी बाग कैंटोनमेंट ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए, उसे वहां से श्रीनगर के एसकेआईएमएस सौरा रेफर किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि कांस्टेबल को पेट के दाहिने हिस्से में गोली लगी थी। उसे एसकेआईएमएस के क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

फिलहाल इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि यह फायरिंग किस परिस्थिति में हुई। मामले से जुड़ी और जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान इस तरह की आकस्मिक फायरिंग की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा बलों द्वारा समय-समय पर जांच कराई जाती है और जवानों को ट्रेनिंग व रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से हथियारों को सावधानी से संभालने के निर्देश दिए जाते हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। ये बल आतंकियों, उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स, समर्थकों, ड्रग तस्करों और हवाला नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।

बताया जाता है कि ड्रग तस्करी और हवाला के माध्यम से जुटाया गया पैसा आतंकवाद को बढ़ावा देने में प्रयोग होता है। वहीं, सेना और बीएसएफ नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात रहकर घुसपैठ, ड्रग तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखते हैं। पाकिस्तान की आईएसआई की मदद से आतंकी संगठन ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद, ड्रग्स और नकद भेजते हैं, जिन्हें बाद में उनके सहयोगियों तक पहुंचाया जाता है।

Point of View

NationPress
31/03/2026

Frequently Asked Questions

यह घटना कब हुई?
यह घटना 31 मार्च को हुई।
कांस्टेबल का नाम क्या था?
कांस्टेबल का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
घटना के बाद कांस्टेबल को कहाँ ले जाया गया?
उसे पहले सेना के बेस हॉस्पिटल बादामी बाग कैंटोनमेंट और फिर एसकेआईएमएस सौरा ले जाया गया।
क्या इस घटना की जांच हो रही है?
हाँ, इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है।
जम्मू-कश्मीर में ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं?
जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान आकस्मिक फायरिंग की घटनाएं सुरक्षा की कमी और प्रशिक्षण की आवश्यकता को दर्शाती हैं।
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