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बीजे मेडिकल कॉलेज रैगिंग: तीन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 6 माह से 1 वर्ष के लिए निलंबित

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बीजे मेडिकल कॉलेज रैगिंग: तीन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 6 माह से 1 वर्ष के लिए निलंबित

सारांश

अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में ऑर्थोपेडिक्स विभाग एक बार फिर रैगिंग के केंद्र में है — 2022 के बड़े विवाद के बाद अब तीन और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर निलंबित। गुजरात सरकार की जीरो टोलरेंस नीति परीक्षण पर है।

मुख्य बातें

बीजे मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद में रैगिंग विरोधी जाँच के बाद द्वितीय वर्ष के 3 रेजिडेंट डॉक्टर निलंबित।
निलंबन की अवधि 6 माह से 1 वर्ष तक; आरोपी ऑर्थोपेडिक्स विभाग से संबंधित।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने रैगिंग के प्रति जीरो टोलरेंस नीति दोहराई।
यही विभाग 2022 में भी रैगिंग विवाद का केंद्र रहा था; तब भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई थी।
गुजरात के सभी मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग विरोधी नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश।

अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में रैगिंग विरोधी जाँच के बाद द्वितीय वर्ष के तीन रेजिडेंट डॉक्टरों को 6 माह से 1 वर्ष तक के लिए निलंबित कर दिया गया है। ये तीनों ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ रैगिंग में संलिप्त पाए गए थे। गुजरात सरकार ने इस कार्रवाई के साथ ही ऐसे व्यवहार के प्रति अपनी जीरो टोलरेंस नीति एक बार फिर स्पष्ट की है।

मुख्य घटनाक्रम

यह कार्रवाई प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शुरू हुई, जिसकी जाँच कॉलेज की रैगिंग विरोधी समिति ने की। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को बताया कि समिति के निष्कर्षों और प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर तीनों आरोपी छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने कहा कि सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, 'शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग जैसी असामाजिक गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' मंत्री ने छात्रों से आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग का वातावरण बनाने का आग्रह किया और कहा कि छात्रों की सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पूर्व घटनाओं से संदर्भ

गौरतलब है कि बीजे मेडिकल कॉलेज का ऑर्थोपेडिक्स विभाग 2022 के अंत में भी एक बड़े रैगिंग विवाद का केंद्र रहा था, जब कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों ने वरिष्ठों पर लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उस समय की शिकायतों में मौखिक दुर्व्यवहार, धमकी, जबरन शारीरिक व्यायाम और मारपीट के आरोप शामिल थे। उस मामले में भी कॉलेज की रैगिंग विरोधी समिति की जाँच के बाद वरिष्ठ स्नातकोत्तर छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी और जाँच के निष्कर्ष राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजे गए थे।

आम जनता और चिकित्सा जगत पर असर

इस ताज़ा मामले ने चिकित्सा संस्थानों, विशेष रूप से रेजीडेंसी कार्यक्रमों में रैगिंग को लेकर चिंताएँ फिर से गहरी कर दी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मेडिकल छात्रों की मानसिक सेहत और उनके कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुजरात के सभी मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में रैगिंग विरोधी नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। एक ही विभाग में दूसरी बड़ी कार्रवाई यह संकेत देती है कि निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की ज़रूरत बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अकेला पर्याप्त नहीं; असली परीक्षा यह है कि क्या संस्थान मानसिक स्वास्थ्य सहायता और स्वतंत्र निगरानी तंत्र भी खड़ा करता है। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतें बताती हैं कि रैगिंग एक पृथक घटना नहीं, बल्कि प्रणालीगत समस्या है जिसके लिए दंड से आगे जाकर सोचना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीजे मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के कारण किन्हें निलंबित किया गया?
ऑर्थोपेडिक्स विभाग के द्वितीय वर्ष के तीन रेजिडेंट डॉक्टरों को निलंबित किया गया है, जो प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ रैगिंग में संलिप्त पाए गए थे। निलंबन की अवधि 6 माह से 1 वर्ष तक है।
यह कार्रवाई कैसे शुरू हुई?
प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायत के बाद कॉलेज की रैगिंग विरोधी समिति ने जाँच की। समिति के निष्कर्षों और रिपोर्ट के आधार पर राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
गुजरात सरकार का इस मामले पर क्या रुख है?
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने कहा है कि सरकार ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और रैगिंग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग विरोधी नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या बीजे मेडिकल कॉलेज में पहले भी रैगिंग की घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, 2022 के अंत में इसी ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एक बड़ा रैगिंग विवाद सामने आया था, जिसमें कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों ने मौखिक दुर्व्यवहार, धमकी और मारपीट के आरोप लगाए थे। उस मामले में भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई थी और जाँच रिपोर्ट राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को भेजी गई थी।
रैगिंग की शिकायत कहाँ दर्ज कराई जा सकती है?
छात्र अपने संस्थान की रैगिंग विरोधी समिति में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के पास भी शिकायत की जा सकती है, जो नियामक स्तर पर कार्रवाई के लिए अधिकृत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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