बीजे मेडिकल कॉलेज रैगिंग: तीन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 6 माह से 1 वर्ष के लिए निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में रैगिंग विरोधी जाँच के बाद द्वितीय वर्ष के तीन रेजिडेंट डॉक्टरों को 6 माह से 1 वर्ष तक के लिए निलंबित कर दिया गया है। ये तीनों ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ रैगिंग में संलिप्त पाए गए थे। गुजरात सरकार ने इस कार्रवाई के साथ ही ऐसे व्यवहार के प्रति अपनी जीरो टोलरेंस नीति एक बार फिर स्पष्ट की है।
मुख्य घटनाक्रम
यह कार्रवाई प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शुरू हुई, जिसकी जाँच कॉलेज की रैगिंग विरोधी समिति ने की। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को बताया कि समिति के निष्कर्षों और प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर तीनों आरोपी छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने कहा कि सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, 'शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग जैसी असामाजिक गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' मंत्री ने छात्रों से आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग का वातावरण बनाने का आग्रह किया और कहा कि छात्रों की सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पूर्व घटनाओं से संदर्भ
गौरतलब है कि बीजे मेडिकल कॉलेज का ऑर्थोपेडिक्स विभाग 2022 के अंत में भी एक बड़े रैगिंग विवाद का केंद्र रहा था, जब कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों ने वरिष्ठों पर लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उस समय की शिकायतों में मौखिक दुर्व्यवहार, धमकी, जबरन शारीरिक व्यायाम और मारपीट के आरोप शामिल थे। उस मामले में भी कॉलेज की रैगिंग विरोधी समिति की जाँच के बाद वरिष्ठ स्नातकोत्तर छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी और जाँच के निष्कर्ष राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजे गए थे।
आम जनता और चिकित्सा जगत पर असर
इस ताज़ा मामले ने चिकित्सा संस्थानों, विशेष रूप से रेजीडेंसी कार्यक्रमों में रैगिंग को लेकर चिंताएँ फिर से गहरी कर दी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मेडिकल छात्रों की मानसिक सेहत और उनके कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुजरात के सभी मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में रैगिंग विरोधी नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। एक ही विभाग में दूसरी बड़ी कार्रवाई यह संकेत देती है कि निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की ज़रूरत बनी हुई है।