बड़ा फैसला: MP सरकार ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मरीज परिजनों के लिए 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' को मंजूरी दी

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बड़ा फैसला: MP सरकार ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मरीज परिजनों के लिए 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' को मंजूरी दी

सारांश

मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने मेडिकल कॉलेज परिसरों में मरीज परिजनों के लिए 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' को मंजूरी दी। परोपकारी संस्थाएं अपने खर्च पर इन्हें बनाएंगी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को ₹5,479 करोड़ और सीएम केयर 2025 के लिए ₹3,628 करोड़ स्वीकृत किए गए।

Key Takeaways

  • मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने 22 अप्रैल 2025 को मेडिकल कॉलेज परिसरों में मरीज परिजनों के लिए 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' को मंजूरी दी।
  • इन रेस्ट हाउसों का निर्माण और संचालन परोपकारी संगठन अपने खर्च पर करेंगे; सरकार कोई अनुदान नहीं देगी।
  • आवास शुल्क राज्य सरकार की विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  • स्वास्थ्य विभाग को ₹5,479 करोड़ का बजट आवंटित किया गया, जिसमें मंडला में नया सरकारी मेडिकल कॉलेज भी शामिल है।
  • सीएम केयर 2025 योजना के पांच वर्षीय संचालन के लिए ₹3,628 करोड़ स्वीकृत किए गए।
  • इस निर्णय से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

भोपाल, 22 अप्रैल 2025मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने बुधवार को एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य के चयनित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के परिसरों में मरीजों के परिजनों के लिए 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' स्थापित करने की स्वीकृति दी। यह सुविधा परोपकारी संगठनों द्वारा उनके स्वयं के संसाधनों से विकसित की जाएगी और राज्य सरकार इस पर कोई वित्तीय भार नहीं उठाएगी। इस कदम का उद्देश्य दूरदराज से आने वाले मरीजों के तीमारदारों को सस्ती और सुरक्षित छत मुहैया कराना है।

क्यों पड़ी इस योजना की जरूरत?

मध्य प्रदेश के सुदूर जिलों और आदिवासी क्षेत्रों से हजारों मरीज हर माह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में इलाज के लिए आते हैं। ये मरीज अक्सर अपने परिजनों के साथ होते हैं, जो आर्थिक तंगी के कारण अस्पताल परिसर के बाहर होटल या लॉज में ठहरने में असमर्थ होते हैं।

परिणामस्वरूप, परिजन अस्पताल के बरामदों, सीढ़ियों और खुले परिसर में रात गुजारने को मजबूर होते हैं। इससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ता है और मरीज-परिजन व अस्पताल कर्मचारियों के बीच तनाव भी उत्पन्न होता है।

योजना की मुख्य संरचना

परोपकारी एवं स्वयंसेवी संगठन अपने स्वयं के संसाधनों से इन रेस्ट हाउसों का निर्माण और संचालन करेंगे। राज्य सरकार इस उद्देश्य के लिए कोई अनुदान या वित्तीय सहायता नहीं देगी, जिससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

इन सुविधाओं के लिए संगठनों द्वारा ली जाने वाली शुल्क दरें राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित की जाएंगी, ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी या शोषण की संभावना न रहे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में ₹5,479 करोड़ का बड़ा निवेश

मंत्रिपरिषद ने इसी बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत ₹5,479 करोड़ के आवंटन को भी मंजूरी दी। इस राशि का उपयोग राज्यभर में उन्नत चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने, मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन और मंडला में एक नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए किया जाएगा।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री की व्यापक एवं उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवा संस्थान सुदृढ़ीकरण योजना — जिसे सीएम केयर 2025 कहा जा रहा है — के सुचारू संचालन के लिए पांच वर्षों की अवधि हेतु ₹3,628 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

आम जनता पर असर

इस निर्णय से सबसे अधिक लाभ ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को होगा, जो इलाज के दौरान परिजनों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर सबसे अधिक परेशान रहते हैं। किफायती दरों पर आवास मिलने से परिजनों का मानसिक तनाव कम होगा और वे मरीज की बेहतर देखभाल कर सकेंगे।

अस्पताल प्रशासन की दृष्टि से भी यह निर्णय महत्वपूर्ण है — परिसर में अनधिकृत रूप से ठहरने वाले लोगों की संख्या घटने से स्वच्छता, सुरक्षा और समग्र प्रशासनिक प्रबंधन में सुधार आएगा।

व्यापक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों — जैसे तमिलनाडु, केरल और राजस्थान — में सरकारी अस्पतालों के परिसरों में मरीज परिजनों के लिए आवास सुविधाएं पहले से संचालित हैं। मध्य प्रदेश का यह कदम उस दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा सकता है, हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक परोपकारी संगठनों की भागीदारी और समिति द्वारा तय शुल्क की वास्तविक किफायत पर निर्भर करेगी।

आलोचकों का यह भी कहना है कि सरकार को केवल निजी संगठनों पर निर्भर रहने के बजाय इस सुविधा के लिए एक न्यूनतम सरकारी अनुदान तंत्र भी विकसित करना चाहिए, ताकि यह योजना दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बन सके।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीएम केयर 2025 के तहत मंडला मेडिकल कॉलेज का निर्माण कब शुरू होता है और 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' योजना किन-किन जिलों में पहले लागू की जाती है।

Point of View

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि परोपकारी संगठनों पर पूरी तरह निर्भरता एक दीर्घकालिक जोखिम है। यह भी विचारणीय है कि जब राज्य ₹5,479 करोड़ का स्वास्थ्य बजट स्वीकृत कर सकता है, तो परिजन आवास के लिए एक छोटी सी सब्सिडी क्यों नहीं? सीएम केयर 2025 एक महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन का इतिहास मिला-जुला रहा है — इसलिए जमीनी निगरानी जरूरी है। असली बदलाव तब आएगा जब दूरदराज का एक गरीब परिवार बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने बीमार को इलाज दिला सके।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश में 'रिलेटिव रेस्ट हाउस' क्या है और यह कहां बनेगा?
'रिलेटिव रेस्ट हाउस' मेडिकल कॉलेज परिसरों में मरीजों के परिजनों के लिए बनाई जाने वाली किफायती आवास सुविधा है। यह राज्य के चयनित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के परिसरों में परोपकारी संगठनों द्वारा स्थापित की जाएगी।
क्या इस सुविधा के लिए सरकार कोई पैसा खर्च करेगी?
नहीं, मध्य प्रदेश सरकार इस योजना के लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी। परोपकारी संगठन अपने स्वयं के संसाधनों से इन रेस्ट हाउसों का निर्माण और संचालन करेंगे।
रेस्ट हाउस में रहने की फीस कौन तय करेगा?
शुल्क दरें राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दरें आम मरीज परिजनों की पहुंच में हों।
सीएम केयर 2025 योजना क्या है और इसके लिए कितना बजट मिला है?
सीएम केयर 2025 मध्य प्रदेश की व्यापक तृतीयक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण योजना है। इसके पांच वर्षीय संचालन के लिए ₹3,628 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
मंडला में नया मेडिकल कॉलेज कब बनेगा?
मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने मंडला में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना को ₹5,479 करोड़ के स्वास्थ्य आवंटन के तहत मंजूरी दी है। निर्माण की सटीक समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
Nation Press