क्या विश्वविद्यालयों को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे?
सारांश
Key Takeaways
- यूजीसी का सख्त रवैया रैगिंग के खिलाफ है।
- उच्च शिक्षण संस्थानों को एंटी रैगिंग गाइडलाइंस लागू करना अनिवार्य है।
- रैगिंग की घटनाओं की जांच की जाएगी।
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- छात्रों को रैगिंग के खिलाफ जागरूक करना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूजीसी ने देश भर के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को रैगिंग के खिलाफ कठोर कदम उठाने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यूजीसी के अनुसार, इन सभी संस्थानों के लिए एंटी रैगिंग गाइडलाइंस को सख्ती से लागू करना अनिवार्य है।
दरअसल, यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए कई कड़े नियम बनाए हैं। जो उच्च शिक्षण संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी का मानना है कि किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान में रैगिंग और आत्महत्या जैसे मामलों का होना बेहद गंभीर है। ऐसे मामलों की गहन जांच की जाएगी और संबंधित विश्वविद्यालय को इसके लिए समन किया जाएगा।
यूजीसी के अनुसार, ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों को नेशनल एंटी रैगिंग मॉनिटरिंग कमिटी के सामने पेश होना पड़ेगा। यहां उनसे रैगिंग पर प्रश्न पूछे जाएंगे और उनका स्पष्ट उत्तर देना अनिवार्य होगा। यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।
गौरतलब है कि यूजीसी ने धर्मशाला स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज में एक छात्र की दुखद मृत्यु पर गंभीर संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्टों में रैगिंग के कारण आत्महत्या के आरोप सामने आने पर यूजीसी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन ने स्वतः संज्ञान लिया और शिकायत दर्ज की है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि सामान्य मृत्यु का है। फिलहाल मामले की पुलिस जांच जारी है।
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। रैगिंग रोकने के लिए नियमों के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी रैगिंग कमिटी, एंटी रैगिंग स्क्वाड, और एंटी रैगिंग सेल का होना अनिवार्य है। यूजीसी का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए जवाबदेही तय की है।
यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय को इस विषय में सतर्क रहना आवश्यक है। यदि किसी विश्वविद्यालय के परिसर में रैगिंग की घटना होती है और जांच में सिद्ध होता है कि यूजीसी नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो ऐसे संस्थान के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जो उच्च शिक्षा संस्थान रैगिंग के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे, उनके खिलाफ भी यूजीसी कठोर कार्रवाई करेगा।
यूजीसी का स्पष्ट कहना है कि शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के लिए कोई स्थान नहीं है। कैंपस में रैगिंग एक अपराध है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को यह निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों और अभिभावकों से रैगिंग के खिलाफ ऑनलाइन अंडरटेकिंग लें। सभी छात्रों को बताया जाए कि किसी को भी शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना रैगिंग की श्रेणी में आता है।
यूजीसी ने कॉलेजों से यह भी कहा है कि उनके परिसर में सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए। रैगिंग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए कैंपस में एंटी-रैगिंग वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित किए जाने चाहिए। शिक्षण संस्थानों को हेल्पलाइन नंबर और मेल आईडी भी जारी करने को कहा गया है। इसके साथ ही रैगिंग रोकने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी अनिवार्य है।
यूजीसी के अनुसार, प्राप्त होने वाली प्रत्येक शिकायत की जांच करना विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अनिवार्य है। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज से संबंधित शिकायतों पर रेगुलेटरी बॉडी और काउंसिल को समिति बनाकर जांच करनी होगी।