सूरत सिविल हॉस्पिटल डॉक्टर आत्महत्या: 24 घंटे में जांच, 4 सीनियर डॉक्टर निलंबित; एचओडी को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में फर्स्ट ईयर के एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या की घटना के बाद गुजरात सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर जांच पूरी कर ली और 4 सीनियर डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने 10 अगस्त को बताया कि विशेष जांच समिति की रिपोर्ट में मृतक डॉक्टर के साथ मानसिक उत्पीड़न की पुष्टि हुई है।
जांच समिति का गठन और कार्यवाही
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया के कड़े निर्देश पर गठित विशेष जांच समिति ने रात 9:30 बजे से काम शुरू किया और सुबह तक लगातार जांच जारी रखी। समिति ने फर्स्ट ईयर के 80 से अधिक जूनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज किए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पानसेरिया ने तत्काल पैनल पोस्टमार्टम के साथ-साथ फॉरेंसिक पोस्टमार्टम के भी आदेश जारी किए थे।
जांच में यह सामने आया कि मृतक डॉक्टर के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, परंतु उनके सहपाठियों के बयानों से स्पष्ट हुआ कि सीनियर डॉक्टरों द्वारा उन्हें अक्सर परेशान किया जाता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
निलंबन और कारण बताओ नोटिस
जांच रिपोर्ट में मानसिक उत्पीड़न की पुष्टि होते ही 4 जिम्मेदार सीनियर डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, इस प्रकार की घटना को रोकने में विफल रहने के लिए न्यू सिविल हॉस्पिटल के संबंधित विभाग की विभागाध्यक्ष (एचओडी) सहित टीचिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री की चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्री पानसेरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जूनियर डॉक्टरों का अपमान करना या उनका मानसिक उत्पीड़न करना हमारे संस्कार नहीं हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि चिकित्सा क्षेत्र में आए डॉक्टर यदि रैगिंग जैसी गतिविधियों में शामिल होंगे, तो यह कलंक उनके पूरे जीवन और भावी करियर को बर्बाद कर देगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे किसी भी तत्व के खिलाफ भविष्य में भी कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
विद्यार्थियों से अपील
पानसेरिया ने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी सीनियर द्वारा परेशान किया जाए, रैगिंग की जाए या परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाए, तो घबराने की बजाय बिना डरे तत्काल अपने डीन, कॉलेज निदेशक या सीधे राज्य सरकार से संपर्क करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों की सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए उनके साथ खड़ी है।
पीड़ित परिवार को सांत्वना
स्वास्थ्य मंत्री पानसेरिया ने मृतक डॉक्टर के पिता से टेलीफोन पर बातचीत की और परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और मृतक डॉक्टर एवं उनके परिवार को संपूर्ण न्याय दिलाया जाएगा। यह मामला भारत के मेडिकल शिक्षा तंत्र में रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न की गहरी जड़ों की ओर एक बार फिर ध्यान दिलाता है।