नीट में कम अंक से टूटा 19 वर्षीय सूरज, खंडाला गांव में आत्महत्या; सुसाइड नोट में लिखा 'अगले जन्म में डॉक्टर बनूंगा'
सारांश
मुख्य बातें
छत्रपति संभाजीनगर के वैजापुर तालुका के खंडाला गांव में 20 अगस्त को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब नीट परीक्षा में अपेक्षित अंक न आने की निराशा में 19 वर्षीय छात्र सूरज सुभाष शिंदे ने आत्महत्या कर ली। प्राथमिक पुलिस जांच के अनुसार, सूरज घर पर ही नीट की तैयारी कर रहा था और परीक्षा परिणाम से वह बेहद परेशान था।
सुसाइड नोट में माता-पिता से माफी
आत्महत्या से पहले सूरज ने दो पंक्तियों की एक चिट्ठी छोड़ी, जिसमें उसने अपनी माँ और पिता को संबोधित करते हुए लिखा — 'सॉरी आई और अप्पा, अगले जन्म में आपके लिए डॉक्टर बनूंगा। अपना ख्याल रखना और खुश रहना।' इस नोट में डॉक्टर न बन पाने की पीड़ा साफ झलकती है।
घटनाक्रम: कैसे हुई दर्दनाक खोज
घटना के समय परिवार के सदस्य गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बाहर गए हुए थे। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे जब परिवार घर लौटा, तो सूरज का फोन बंद मिला।
इसके बाद उसकी छोटी बहन ऊपर के कमरे में गई, जहाँ उसने सूरज को फंदे से लटका हुआ पाया। बहन की चीख सुनकर परिजन तुरंत मौके पर पहुँचे और सूरज को वैजापुर उपजिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच और अंतिम संस्कार
वैजापुर पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। सूरज का अंतिम संस्कार गमगीन माहौल में किया गया। परिवार शोक में डूबा हुआ है।
नीट दबाव और छात्र मानसिक स्वास्थ्य
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में नीट परीक्षा के परिणाम और उससे जुड़े छात्रों पर मानसिक दबाव को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई जा रही हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट परिणाम के बाद किसी छात्र द्वारा इस तरह का कदम उठाने की खबर आई हो। विशेषज्ञ लंबे समय से परीक्षा के अत्यधिक दबाव और परामर्श सेवाओं की कमी को इन घटनाओं का प्रमुख कारण मानते रहे हैं। सूरज की यह त्रासदी एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला देती है।