20 अगस्त 2026
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नीट में कम अंक से टूटा 19 वर्षीय सूरज, खंडाला गांव में आत्महत्या; सुसाइड नोट में लिखा 'अगले जन्म में डॉक्टर बनूंगा'

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नीट में कम अंक से टूटा 19 वर्षीय सूरज, खंडाला गांव में आत्महत्या; सुसाइड नोट में लिखा 'अगले जन्म में डॉक्टर बनूंगा'

सारांश

नीट में कम अंक आने की पीड़ा इतनी गहरी थी कि 19 वर्षीय सूरज शिंदे ने माँ-पिता के नाम दो लाइन की चिट्ठी छोड़ी — 'अगले जन्म में डॉक्टर बनूंगा' — और खंडाला गांव में अपनी जान दे दी। यह घटना नीट के दबाव और छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

सूरज सुभाष शिंदे (19 वर्ष), खंडाला गांव, वैजापुर तालुका, छत्रपति संभाजीनगर का निवासी, ने 20 अगस्त को आत्महत्या की।
पुलिस जांच के अनुसार, नीट परीक्षा में कम अंक आने की निराशा आत्महत्या का कारण बताई जा रही है।
सूरज ने दो पंक्तियों का सुसाइड नोट छोड़ा जिसमें माँ और पिता से माफी माँगी और लिखा — 'अगले जन्म में आपके लिए डॉक्टर बनूंगा।' छोटी बहन ने ऊपरी कमरे में फंदे से लटका पाया; वैजापुर उपजिला अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित किया।
वैजापुर पुलिस थाने में मामला दर्ज, जांच जारी।

छत्रपति संभाजीनगर के वैजापुर तालुका के खंडाला गांव में 20 अगस्त को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब नीट परीक्षा में अपेक्षित अंक न आने की निराशा में 19 वर्षीय छात्र सूरज सुभाष शिंदे ने आत्महत्या कर ली। प्राथमिक पुलिस जांच के अनुसार, सूरज घर पर ही नीट की तैयारी कर रहा था और परीक्षा परिणाम से वह बेहद परेशान था।

सुसाइड नोट में माता-पिता से माफी

आत्महत्या से पहले सूरज ने दो पंक्तियों की एक चिट्ठी छोड़ी, जिसमें उसने अपनी माँ और पिता को संबोधित करते हुए लिखा — 'सॉरी आई और अप्पा, अगले जन्म में आपके लिए डॉक्टर बनूंगा। अपना ख्याल रखना और खुश रहना।' इस नोट में डॉक्टर न बन पाने की पीड़ा साफ झलकती है।

घटनाक्रम: कैसे हुई दर्दनाक खोज

घटना के समय परिवार के सदस्य गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बाहर गए हुए थे। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे जब परिवार घर लौटा, तो सूरज का फोन बंद मिला।

इसके बाद उसकी छोटी बहन ऊपर के कमरे में गई, जहाँ उसने सूरज को फंदे से लटका हुआ पाया। बहन की चीख सुनकर परिजन तुरंत मौके पर पहुँचे और सूरज को वैजापुर उपजिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस जांच और अंतिम संस्कार

वैजापुर पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। सूरज का अंतिम संस्कार गमगीन माहौल में किया गया। परिवार शोक में डूबा हुआ है।

नीट दबाव और छात्र मानसिक स्वास्थ्य

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में नीट परीक्षा के परिणाम और उससे जुड़े छात्रों पर मानसिक दबाव को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई जा रही हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट परिणाम के बाद किसी छात्र द्वारा इस तरह का कदम उठाने की खबर आई हो। विशेषज्ञ लंबे समय से परीक्षा के अत्यधिक दबाव और परामर्श सेवाओं की कमी को इन घटनाओं का प्रमुख कारण मानते रहे हैं। सूरज की यह त्रासदी एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक व्यापक और गहरी प्रणालीगत विफलता का भी प्रतिबिंब है। नीट जैसी एकल, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा पर लाखों छात्रों के भविष्य को टिका देने की व्यवस्था में परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की घोर कमी है। यह पहली ऐसी घटना नहीं है और जब तक परीक्षा तंत्र में संरचनात्मक सुधार और छात्र सहायता प्रणाली नहीं बनती, यह आखिरी भी नहीं होगी। 'अगले जन्म में डॉक्टर बनूंगा' — ये शब्द केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक कठोर प्रश्न हैं।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरज शिंदे ने आत्महत्या क्यों की?
प्राथमिक पुलिस जांच के अनुसार, नीट परीक्षा में अपेक्षित अंक न आने की निराशा के कारण सूरज ने यह कदम उठाया। उसने सुसाइड नोट में डॉक्टर न बन पाने की पीड़ा व्यक्त की।
सूरज के सुसाइड नोट में क्या लिखा था?
सूरज ने दो पंक्तियों की चिट्ठी में माँ ('आई') और पिता ('अप्पा') से माफी माँगते हुए लिखा — 'सॉरी आई और अप्पा, अगले जन्म में आपके लिए डॉक्टर बनूंगा। अपना ख्याल रखना और खुश रहना।'
यह घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 20 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर के वैजापुर तालुका के खंडाला गांव में हुई। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे परिवार के घर लौटने पर सूरज की छोटी बहन ने उसे ऊपरी कमरे में फंदे से लटका पाया।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
वैजापुर पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पुलिस के अनुसार नीट में कम अंक आना आत्महत्या का कारण प्रतीत होता है।
नीट परीक्षा के दबाव से छात्रों को कैसे बचाया जा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, छात्रों को परीक्षा परिणाम से इतर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करना, स्कूल-कॉलेज स्तर पर परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराना और परिवार का भावनात्मक समर्थन इस दबाव को कम करने में सहायक हो सकता है। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक संकट में हो, तो iCall (9152987821) जैसी हेल्पलाइन से सहायता लें।
राष्ट्र प्रेस
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