नीट छात्रा रेणु ने दिल्ली के पालम में की आत्महत्या, सुसाइड नोट में माता-पिता से माँगी माफी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के पालम इलाके (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) में नीट की तैयारी कर रही छात्रा रेणु ने कथित तौर पर 13 जून की शाम फाँसी लगाकर अपनी जान दे ली। मौके से बरामद सुसाइड नोट में उसने माता-पिता से माफी माँगी और लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: उस शाम क्या हुआ
पुलिस के अनुसार, रेणु ने 3 मई को नीट परीक्षा दी थी। परीक्षा रद्द होने के बाद से वह कथित तौर पर अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थी। 13 जून को उसके पिता अपने ससुर के निधन के कारण ससुराल गए हुए थे, जिससे रेणु घर पर अकेली थी। उसी शाम उसने यह कदम उठाया।
मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली रेणु का परिवार काम के सिलसिले में दिल्ली में बस गया था। सुसाइड नोट में उसकी गहरी मानसिक पीड़ा झलकती है — उसने स्वीकार किया कि परीक्षा को लेकर बना दबाव उसके लिए असहनीय हो गया था।
देशभर में नीट से जुड़े आत्महत्या के मामले
यह घटना अकेली नहीं है। इसी सप्ताह राजस्थान के सीकर ज़िले में 22 वर्षीय छात्र उमेश माली ने आत्महत्या कर ली। झुंझुनूं के नवलगढ़ निवासी उमेश नीट का तीसरा प्रयास देने की तैयारी कर रहा था, जो 21 जून को निर्धारित है। पुलिस के मुताबिक, उसके पिता मुंबई में टाइल कॉन्ट्रैक्टर का काम करते हैं और उमेश सीकर के उद्योग नगर थाना क्षेत्र में एक फ्लैट में माँ, बड़ी बहन और छोटे भाई के साथ रह रहा था। सीकर में यह इस तरह का दूसरा मामला बताया जा रहा है।
मंगलवार को देहरादून में 23 वर्षीय एक युवती ने भी कथित तौर पर नीट पास न कर पाने की पीड़ा में जान दे दी। उसने माता-पिता के नाम छोड़े नोट में लिखा, 'मम्मी-पापा, मैं आपसे प्यार करती हूँ।' पुलिस के अनुसार, वह लंबे समय से मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रही थी।
एनटीए का भरोसा और फर्जी पेपर लीक की चेतावनी
इस बीच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश में उम्मीदवारों को आश्वस्त किया कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनः परीक्षा के लिए कोई पेपर लीक नहीं हुआ है।
सिंह ने छात्रों और अभिभावकों को सोशल मीडिया पर सक्रिय उन रैकेट से सावधान रहने को कहा जो मोटी रकम लेकर लीक पेपर देने का दावा करते हैं। उन्होंने बताया कि 22 जून तक टेलीग्राम ऐप को अस्थायी रूप से बंद करने का उद्देश्य परीक्षा से संबंधित भ्रामक सूचनाओं और फर्जी दावों पर अंकुश लगाना था।
बढ़ता मानसिक दबाव और व्यापक चिंता
यह घटनाएँ ऐसे समय में सामने आई हैं जब नीट परीक्षा से जुड़े विवाद और पेपर लीक के आरोपों ने पहले से ही लाखों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित किया है। गौरतलब है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संकट की यह कोई पहली घटना नहीं है — विशेषज्ञ लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने की माँग करते रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और एनटीए परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ छात्रों की मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।