27 जुलाई 2026
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नीट री-एग्जाम में कम अंक के सदमे में अहिल्यानगर की छात्रा अंकिता सांगले ने की आत्महत्या

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नीट री-एग्जाम में कम अंक के सदमे में अहिल्यानगर की छात्रा अंकिता सांगले ने की आत्महत्या

सारांश

नीट पेपर लीक के कारण हुए री-एग्जाम में कम अंक आने के बाद अहिल्यानगर की छात्रा अंकिता सांगले ने आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उसने डॉक्टर बनने का सपना टूटने की बात लिखी। परिवार ने पेपर लीक की घटनाओं पर सवाल उठाते हुए भविष्य में ऐसी त्रासदियाँ रोकने की माँग की।

मुख्य बातें

अंकिता सुरेश सांगले , निवासी जलालपुर गाँव, कर्जत तालुका, अहिल्यानगर , ने 27 जुलाई को आत्महत्या की।
परिवार के अनुसार, नीट री-एग्जाम में कम अंक आने के सदमे में उसने यह कदम उठाया।
सुसाइड नोट में अंकिता ने डॉक्टर बनने का सपना टूटने का उल्लेख किया और अभिभावकों को दोषमुक्त किया।
पहली नीट परीक्षा में अच्छे अंक मिले थे, लेकिन पेपर लीक के कारण री-एग्जाम कराया गया जिसमें अंक कम रहे।
चाचा अण्णासाहेब सांगले ने पेपर लीक पर रोक लगाने और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की माँग की।

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका स्थित जलालपुर गाँव की छात्रा अंकिता सुरेश सांगले ने रविवार, 27 जुलाई को आत्महत्या कर ली। परिवार के अनुसार, नीट री-एग्जाम में कम अंक आने के सदमे में उसने यह दुखद कदम उठाया। यह घटना देश में नीट परीक्षा और पेपर लीक को लेकर चल रहे व्यापक विवाद के बीच सामने आई है।

सुसाइड नोट में क्या लिखा था

अंकिता ने अपने सुसाइड नोट में स्पष्ट किया कि नीट में कम अंक मिलने से उसका डॉक्टर बनने का सपना टूट गया। उसने नोट में यह भी लिखा कि इस कदम के लिए उसके अभिभावकों को जिम्मेदार न ठहराया जाए — यह उसका अपना निर्णय था।

पेपर लीक और री-एग्जाम का असर

परिवार ने बताया कि पहली नीट परीक्षा में अंकिता को अच्छे अंक मिले थे, लेकिन पेपर लीक की घटना के कारण री-एग्जाम कराना पड़ा। दोबारा परीक्षा में अंक कम आने के बाद वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगी थी। परिजनों के अनुसार, वह परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह समर्पित थी और चिकित्सा क्षेत्र में जाने की गहरी इच्छा रखती थी।

परिवार की पीड़ा और माँग

अंकिता के चाचा अण्णासाहेब सांगले ने बताया, 'हमारी भतीजी नीट में कम अंक आने के बाद बहुत निराश हो गई थी। वह डॉक्टर बनने की बहुत उम्मीद लेकर बैठी थी। परीक्षा भी उसकी हुई थी, लेकिन कम अंक मिलने से वह सदमे में चली गई और उस सदमे से बाहर नहीं निकल पाई। हमें समय नहीं मिला और हम अपनी भतीजी को खो बैठे।'

उन्होंने आगे कहा, 'देश में पेपर लीक जैसी घटनाएँ बार-बार हो रही हैं, जिससे छात्रों की जिंदगी प्रभावित हो रही है। हमारी माँग है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों, ताकि कोई और बच्चा इस तरह अपनी जान न गंवाए।'

स्थानीय प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही रिश्तेदार और आस-पड़ोस के लोग अंकिता के घर पहुँचने लगे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि पेपर लीक न हुआ होता और री-एग्जाम की नौबत न आती, तो अंकिता का सपना शायद पूरा होता। यह घटना नीट विवाद के मानवीय पहलू को एक बार फिर सामने लाती है।

आगे क्या

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक और री-एग्जाम को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पहले से व्याप्त है। अंकिता की मृत्यु ने इस बहस को और तीखा कर दिया है। विशेषज्ञ लंबे समय से यह माँग उठाते रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक संकट में है, तो iCall हेल्पलाइन 9152987821 पर संपर्क करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस प्रणालीगत विफलता का भी प्रमाण है जिसमें पेपर लीक की जवाबदेही छात्र अकेले वहन करते हैं। पहली परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बावजूद री-एग्जाम की मार झेलना और फिर कम अंकों के साथ सपना टूटते देखना — यह चक्र उन लाखों छात्रों की कहानी है जो परीक्षा प्रणाली की खामियों के शिकार बनते हैं। नीट विवाद अब सिर्फ नीतिगत बहस नहीं रहा; यह जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन चुका है। जब तक पेपर लीक की जवाबदेही तय नहीं होती और छात्रों के लिए संस्थागत मानसिक स्वास्थ्य सहायता नहीं बनती, ऐसी खबरें आती रहेंगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकिता सांगले कौन थीं और उन्होंने आत्महत्या क्यों की?
अंकिता सुरेश सांगले महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के जलालपुर गाँव की छात्रा थीं। परिवार के अनुसार, नीट री-एग्जाम में कम अंक आने के सदमे में उन्होंने 27 जुलाई को आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना टूटने की बात लिखी।
नीट री-एग्जाम क्यों हुआ था और इसका अंकिता पर क्या असर पड़ा?
पेपर लीक की घटना के कारण नीट का री-एग्जाम कराया गया था। परिवार के अनुसार, अंकिता को पहली परीक्षा में अच्छे अंक मिले थे, लेकिन री-एग्जाम में अंक कम रहे, जिसके बाद वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगी थीं।
अंकिता के परिवार ने क्या माँग की है?
चाचा अण्णासाहेब सांगले ने माँग की है कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएँ न हों और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाएँ छात्रों पर बेहद बुरा मनोवैज्ञानिक असर डालती हैं।
इस घटना का नीट विवाद से क्या संबंध है?
यह घटना उस व्यापक नीट विवाद की पृष्ठभूमि में हुई है जिसमें पेपर लीक और री-एग्जाम को लेकर देशभर में छात्र और अभिभावक आंदोलित हैं। अंकिता का मामला इस बात को रेखांकित करता है कि परीक्षा प्रणाली की खामियाँ छात्रों के जीवन पर कितना गहरा मनोवैज्ञानिक असर डाल सकती हैं।
मानसिक संकट में छात्र किससे मदद ले सकते हैं?
मानसिक संकट की स्थिति में iCall हेल्पलाइन नंबर 9152987821 पर संपर्क किया जा सकता है। यह सेवा प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा संचालित है और छात्रों सहित सभी के लिए उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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