11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हैदराबाद: उस्मानिया मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में रैगिंग, 12 बीडीएस छात्रों पर मुकदमा दर्ज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हैदराबाद: उस्मानिया मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में रैगिंग, 12 बीडीएस छात्रों पर मुकदमा दर्ज

सारांश

हैदराबाद के उस्मानिया मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में बीडीएस के जूनियर छात्रों को प्रताड़ित करने के आरोप में 12 वरिष्ठ छात्रों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। 6 छात्र निलंबित, एंटी-रैगिंग कमेटी सशक्त — लेकिन सवाल यह है कि मेडिकल परिसरों में रैगिंग की यह संस्कृति बार-बार क्यों उभरती है।

मुख्य बातें

हैदराबाद पुलिस ने 17 जून 2026 को सरकारी डेंटल कॉलेज के 12 फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों के खिलाफ सुल्तान बाजार थाने में मुकदमा दर्ज किया।
आरोप है कि उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में प्रथम वर्ष के जूनियर छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
कॉलेज प्रशासन ने जांच पूरी होने तक 6 छात्रों को 6 महीने के लिए निलंबित किया।
प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव की शिकायत पर तेलंगाना रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
दोषी पाए जाने पर छात्र के मार्क्स कार्ड पर रैगिंग का उल्लेख और राज्य के किसी भी संस्थान में प्रवेश पर प्रतिबंध संभव।

हैदराबाद पुलिस ने 17 जून 2026 को सरकारी डेंटल कॉलेज के 12 फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों के खिलाफ तेलंगाना रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि इन वरिष्ठ छात्रों ने उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) के प्रथम वर्ष के जूनियर छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

मुख्य घटनाक्रम

डेंटल कॉलेज के छात्र फिलहाल उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रह रहे हैं, और कथित रैगिंग इसी परिसर में हुई। कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच पूरी होने तक छह फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है।

कॉलेज के प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव की शिकायत पर सुल्तान बाजार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी छात्रों को समझाया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घटना में और भी छात्र शामिल थे या नहीं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रैगिंग में संलिप्त किसी भी छात्र को कॉलेज से स्थायी निष्कासन और कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने जूनियर छात्रों से अपील की कि वे बिना किसी भय के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें। इसके साथ ही कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी को और अधिक सशक्त बनाया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

कानूनी प्रावधान और दंड

गौरतलब है कि 1997 में अविभाजित आंध्र प्रदेश ने शैक्षणिक संस्थानों के भीतर और बाहर रैगिंग पर रोक लगाने के लिए 'आंध्र प्रदेश रैगिंग निषेध अधिनियम' लागू किया था, जो अब तेलंगाना में भी प्रभावी है। इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर छात्र को संस्थान से निकाला जा सकता है। यदि सजा छह महीने से अधिक की होती है, तो दोषी छात्र को राज्य के किसी भी अन्य शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश नहीं मिलेगा।

इस अधिनियम में एक विशेष प्रावधान यह भी है कि रैगिंग में संलिप्त छात्र के मार्क्स कार्ड और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर मोटे अक्षरों में यह अंकित किया जाएगा कि वह रैगिंग में शामिल था — जो उसके पूरे करियर पर स्थायी कलंक बन सकता है।

आगे क्या होगा

पुलिस इस मामले में आगे की जांच जारी रखे हुए है और यह स्थापित करने की कोशिश में है कि क्या और अधिक छात्र इस घटना में शामिल थे। यह मामला तेलंगाना के मेडिकल शिक्षा संस्थानों में रैगिंग-रोधी तंत्र की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बावजूद इसके कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश और राज्य स्तरीय कानून दशकों से मौजूद हैं। असली सवाल यह है कि एंटी-रैगिंग कमेटियां घटना के बाद 'सशक्त' क्यों होती हैं, पहले क्यों नहीं। मार्क्स कार्ड पर कलंक और संस्थान से निष्कासन जैसे कड़े प्रावधानों के बावजूद यह प्रथा जारी है, जो बताता है कि निवारण तंत्र कागज पर मजबूत है, जमीन पर कमजोर।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद डेंटल कॉलेज रैगिंग मामले में क्या हुआ?
हैदराबाद के सरकारी डेंटल कॉलेज के 12 फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों पर उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में प्रथम वर्ष के जूनियर छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है। 17 जून 2026 को सुल्तान बाजार थाने में तेलंगाना रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
कितने छात्रों को निलंबित किया गया और क्यों?
कॉलेज प्रशासन ने जांच पूरी होने तक 6 फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों को 6 महीने के लिए निलंबित किया है। यह कार्रवाई अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत की गई है, जबकि शेष 6 छात्रों के खिलाफ पुलिस जांच जारी है।
तेलंगाना रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत क्या सजा हो सकती है?
इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर छात्र को संस्थान से निकाला जा सकता है। 6 महीने से अधिक की सजा होने पर राज्य के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके अलावा, दोषी छात्र के मार्क्स कार्ड और प्रमाणपत्रों पर रैगिंग में संलिप्तता का उल्लेख मोटे अक्षरों में किया जाएगा।
इस मामले में पुलिस की शिकायत किसने दर्ज कराई?
कॉलेज के प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सुल्तान बाजार थाने में 12 छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई कदम उठाए गए हैं?
हां, कॉलेज प्रशासन ने एंटी-रैगिंग कमेटी को और सशक्त बनाने की घोषणा की है। प्रिंसिपल ने जूनियर छात्रों से अपील की है कि वे बिना भय के पढ़ाई करें और किसी भी उत्पीड़न की सूचना तुरंत दें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले