हैदराबाद: उस्मानिया मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में रैगिंग, 12 बीडीएस छात्रों पर मुकदमा दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद पुलिस ने 17 जून 2026 को सरकारी डेंटल कॉलेज के 12 फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों के खिलाफ तेलंगाना रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि इन वरिष्ठ छात्रों ने उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) के प्रथम वर्ष के जूनियर छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
मुख्य घटनाक्रम
डेंटल कॉलेज के छात्र फिलहाल उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रह रहे हैं, और कथित रैगिंग इसी परिसर में हुई। कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच पूरी होने तक छह फाइनल-ईयर बीडीएस छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है।
कॉलेज के प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव की शिकायत पर सुल्तान बाजार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी छात्रों को समझाया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घटना में और भी छात्र शामिल थे या नहीं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रैगिंग में संलिप्त किसी भी छात्र को कॉलेज से स्थायी निष्कासन और कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने जूनियर छात्रों से अपील की कि वे बिना किसी भय के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें। इसके साथ ही कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी को और अधिक सशक्त बनाया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
कानूनी प्रावधान और दंड
गौरतलब है कि 1997 में अविभाजित आंध्र प्रदेश ने शैक्षणिक संस्थानों के भीतर और बाहर रैगिंग पर रोक लगाने के लिए 'आंध्र प्रदेश रैगिंग निषेध अधिनियम' लागू किया था, जो अब तेलंगाना में भी प्रभावी है। इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर छात्र को संस्थान से निकाला जा सकता है। यदि सजा छह महीने से अधिक की होती है, तो दोषी छात्र को राज्य के किसी भी अन्य शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश नहीं मिलेगा।
इस अधिनियम में एक विशेष प्रावधान यह भी है कि रैगिंग में संलिप्त छात्र के मार्क्स कार्ड और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर मोटे अक्षरों में यह अंकित किया जाएगा कि वह रैगिंग में शामिल था — जो उसके पूरे करियर पर स्थायी कलंक बन सकता है।
आगे क्या होगा
पुलिस इस मामले में आगे की जांच जारी रखे हुए है और यह स्थापित करने की कोशिश में है कि क्या और अधिक छात्र इस घटना में शामिल थे। यह मामला तेलंगाना के मेडिकल शिक्षा संस्थानों में रैगिंग-रोधी तंत्र की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।