उरई मेडिकल कॉलेज विवाद: दूसरे दिन भी 300 नर्सिंग छात्रों का धरना जारी, तीन इंटर्न सस्पेंड
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में बीएससी नर्सिंग छात्रों और एमबीबीएस इंटर्न के बीच कथित झड़प का मामला 23 सितंबर 2026 को और गहरा गया, जब लगातार दूसरे दिन करीब 300 नर्सिंग छात्रों ने परिसर में धरना-प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए और भविष्य में नर्सिंग छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस विरोध प्रदर्शन के चलते कॉलेज की इमरजेंसी और क्लिनिकल सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
कथित तौर पर सामने आए एक वीडियो में दो नर्सिंग इंटर्न के साथ एमबीबीएस छात्रों द्वारा बदसलूकी का दृश्य दिखाया गया है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद से छात्रों में आक्रोश और बढ़ा है। एक नर्सिंग छात्रा ने बताया कि घटना के दो दिन बाद भी न कोई बातचीत हुई है, न सुनवाई और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया है।
विडंबना यह है कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई होने के बजाय, तीन नर्सिंग इंटर्न को ही सस्पेंड कर दिया गया है। छात्रों का आरोप है कि यह कदम उन्हें चुप कराने की कोशिश है।
छात्रों की माँगें
बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के छात्र अमन सिंह ने कहा कि घटना में जिन लोगों की गलती है, वे सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगें और संस्थान प्रशासन उन्हें निलंबित करे। उन्होंने यह भी कहा, 'अगर हमारी माँगें पूरी नहीं हुईं तो हम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे।'
प्रदर्शनकारियों ने तीन मुख्य माँगें रखी हैं — निष्पक्ष जाँच, जिम्मेदार एमबीबीएस छात्रों के नाम सार्वजनिक कर उनके विरुद्ध कार्रवाई, और नर्सिंग छात्रों की सुरक्षा के लिए एक स्थायी नीति।
प्रशासन पर गंभीर सवाल
एक अन्य इंटर्न ने बताया कि जिन लोगों ने नर्सिंग छात्रों के साथ झड़प की, प्रशासन को अब तक उनके नाम तक की जानकारी नहीं है — या जानकारी होने के बावजूद जानबूझकर कार्रवाई नहीं की जा रही। छात्रों का कहना है कि उन्हें 'गुमराह' किया जा रहा है।
गौरतलब है कि नर्सिंग इंटर्न बिना किसी स्टाइपेंड के दिन-रात काम करते हैं। एक छात्र ने यह भी उठाया कि कॉलेज परिसर में नर्सिंग छात्रों को हीन भावना से देखे जाने की संस्कृति लंबे समय से चली आ रही है, और यह घटना उसी का परिणाम है।
अस्पताल सेवाओं पर असर
प्रदर्शन के कारण उरई सरकारी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और क्लिनिकल सेवाएं लगातार दूसरे दिन भी बाधित रहीं। इससे आम मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ा। स्थिति तब तक सामान्य होने की संभावना नहीं, जब तक प्रशासन छात्रों की माँगों पर ठोस प्रतिक्रिया नहीं देता।
क्या होगा आगे
छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी माँगें नहीं मानी जातीं, तब तक धरना जारी रहेगा। अमन सिंह सहित अन्य प्रदर्शनकारियों ने न्यायालय जाने का विकल्प भी खुला रखा है। अब सब की निगाहें कॉलेज प्रशासन और जालौन ज़िला प्रशासन पर हैं कि वे इस बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।