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उन्नाव शिक्षा घोटाला: ₹3 करोड़ के गबन में दो गिरफ्तार, डीएम घनश्याम मीणा बोले — दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

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उन्नाव शिक्षा घोटाला: ₹3 करोड़ के गबन में दो गिरफ्तार, डीएम घनश्याम मीणा बोले — दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

सारांश

उन्नाव के एमआरआरएस इंटर कॉलेज में चार साल तक चले वेतन-आधारित गबन का भंडाफोड़ — ₹3 करोड़ की हेराफेरी, दो गिरफ्तार, ₹75 लाख की रिकवरी। डीएम का संदेश साफ है: अब पूरे जिले के इंटर कॉलेजों की विशेष ऑडिट होगी।

मुख्य बातें

उन्नाव के एमआरआरएस इंटर कॉलेज, पुरवा में माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े ₹3 करोड़ से अधिक के गबन का खुलासा।
गड़बड़ी लगभग चार वर्षों तक चलती रही — शिक्षकों के वेतन बढ़ाकर दिखाकर और एरियर में हेरफेर कर धन निकाला गया।
अब तक दो कर्मचारी गिरफ्तार ; शेष आरोपियों की तलाश जारी; ₹75 लाख की रिकवरी हो चुकी है।
डीआईओएस कार्यालय के कर्मचारियों पर भी अलग से कार्रवाई; शासन को कठोर दंड हेतु रिपोर्ट भेजी जा रही है।
डीएम घनश्याम मीणा ने जिले के अन्य इंटर कॉलेजों की जांच के लिए विशेष ऑडिट टीम गठित करने हेतु शासन को पत्र भेजा।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े ₹3 करोड़ से अधिक के गबन मामले में दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस कार्रवाई जारी है। जिला मजिस्ट्रेट घनश्याम मीणा ने 12 जून को जानकारी दी कि कथित मास्टरमाइंड सहित कई संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी है और दोषी किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे।

घोटाले का मूल स्वरूप

पुरवा स्थित एमआरआरएस इंटर कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की, जिसकी अध्यक्षता पीडी, डीआरडीए ने की। जांच में सामने आया कि कॉलेज में कार्यरत शिक्षकों के वेतन को कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया जा रहा था और उसी आधार पर अतिरिक्त धनराशि निकाली जा रही थी। कर्मचारियों के एरियर भुगतान में भी बड़े पैमाने पर हेरफेर पाई गई।

डीएम मीणा के अनुसार यह गड़बड़ी पिछले लगभग चार वर्षों से चल रही थी। अभिलेखों के सत्यापन के बाद कुल ₹3 करोड़ रुपए के गबन की पुष्टि हुई। अब तक ₹75 लाख की रिकवरी करा ली गई है।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

मामले में संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब तक दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शेष आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय हैं। डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।

इंटर कॉलेज के अन्य संबंधित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ शासन को कठोर दंड हेतु रिपोर्ट भेजी जा रही है, ताकि प्रशासनिक और आपराधिक — दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय हो सके।

डीएम की चेतावनी और भविष्य की रणनीति

डीएम घनश्याम मीणा ने स्पष्ट किया कि केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा जाएगा — शासन स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पाए गए किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षा संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि वेतन-आधारित गबन के इस तरीके का उपयोग अन्य जिलों में भी सामने आ चुका है।

विशेष ऑडिट और व्यापक जांच

डीएम ने बताया कि इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष ऑडिट टीम गठित करने हेतु शासन को पत्र भेजा जा रहा है। इस टीम का दायरा केवल एमआरआरएस इंटर कॉलेज तक सीमित नहीं रहेगा — जिले के अन्य इंटर कॉलेजों की भी जांच की जाएगी। यदि किसी भी संस्थान में अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस कदम से उन्नाव जिले में शिक्षा विभाग की वित्तीय प्रणाली की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है, और यह मामला प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह ऑडिट स्वतंत्र एजेंसी करेगी या उसी विभाग के अधिकारी जो पहले से इस तंत्र का हिस्सा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सरकारी इंटर कॉलेजों में वेतन-आधारित गबन की यह पहली घटना नहीं है — बिना प्रणालीगत सुधार के, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उन्नाव शिक्षा घोटाला क्या है?
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के पुरवा स्थित एमआरआरएस इंटर कॉलेज में माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने शिक्षकों के वेतन को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाकर और एरियर में हेरफेर कर लगभग चार वर्षों में ₹3 करोड़ से अधिक की धनराशि का गबन किया। मामला तीन सदस्यीय जांच टीम की जांच के बाद सामने आया।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
मामले में दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मुकदमा दर्ज है। ₹75 लाख की रिकवरी भी कराई जा चुकी है। डीआईओएस कार्यालय के कर्मचारियों पर अलग से कार्रवाई चल रही है और शासन को कठोर दंड हेतु रिपोर्ट भेजी जा रही है।
डीएम घनश्याम मीणा ने क्या कहा?
जिला मजिस्ट्रेट घनश्याम मीणा ने कहा कि दोषी किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे और केवल गिरफ्तारी तक नहीं रुका जाएगा — शासन स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने जिले के अन्य इंटर कॉलेजों की जांच के लिए विशेष ऑडिट टीम गठित करने हेतु शासन को पत्र भेजने की बात कही।
क्या अन्य कॉलेजों की भी जांच होगी?
हाँ, डीएम ने शासन को पत्र भेजकर एक विशेष ऑडिट टीम गठित करने का अनुरोध किया है जो उन्नाव जिले के अन्य इंटर कॉलेजों की भी जांच करेगी। यदि किसी भी संस्थान में अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गबन किस तरीके से किया गया?
जांच टीम के अनुसार कॉलेज में कार्यरत शिक्षकों के वेतन को कागजों पर वास्तविक से अधिक दर्शाया जाता था और उसी आधार पर अतिरिक्त धनराशि निकाली जाती थी। इसके साथ ही कर्मचारियों के एरियर भुगतान में भी हेरफेर की गई। यह सिलसिला लगभग चार वर्षों तक चलता रहा।
राष्ट्र प्रेस
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