सीबीआई का बड़ा ट्रैप: डीजीएमएस डिप्टी डायरेक्टर ₹2 लाख रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, खदान हादसे को दबाने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अगस्त को ओंगोल में एक सुनियोजित जाल बिछाकर डीजीएमएस (खान महानिदेशालय), हैदराबाद-III रीजन, साउथ सेंट्रल जोन के डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग) को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में एक कंसल्टेंट/बिचौलिया और एक प्राइवेट माइनिंग कंपनी का प्रतिनिधि भी हिरासत में लिया गया। तीनों आरोपियों को 18 अगस्त को विजयवाड़ा की सक्षम अदालत में पेश किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
सीबीआई को सूचना मिली थी कि 25 जून को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की एक माइनिंग खदान में एक जानलेवा हादसा हुआ था। संबंधित माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधियों ने एक कंसल्टेंट/बिचौलिये के माध्यम से आरोपी डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग) से संपर्क साधा। उद्देश्य था कि हादसे की जांच रिपोर्ट कंपनी के पक्ष में तैयार हो और खदान मालिकों को कानूनी जिम्मेदारी से बचाया जा सके।
आरोप है कि बिचौलिये ने अनुकूल रिपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए पहले ही आरोपी डिप्टी डायरेक्टर को ₹1 लाख की रिश्वत दी थी। इसके बाद 17 अगस्त को ओंगोल में ₹2 लाख की अतिरिक्त रकम देने की योजना बनाई गई — जिसमें हादसे की रिपोर्ट के साथ-साथ कथित तौर पर प्राइवेट माइनिंग कंपनी और अन्य खदानों से जुड़ी तिमाही रिश्वत का भुगतान भी शामिल था।
सीबीआई का ट्रैप ऑपरेशन
सीबीआई ने 17 अगस्त को ओंगोल में जाल बिछाया और आरोपी डिप्टी डायरेक्टर को प्राइवेट माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधि की मौजूदगी में कंसल्टेंट/बिचौलिये से ₹2 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। ट्रैप के दौरान पूरी रकम बरामद कर ली गई। सीबीआई ने इस मामले में 17 अगस्त को ही डिप्टी डायरेक्टर, कंसल्टेंट/बिचौलिये, प्राइवेट माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधियों और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
तलाशी अभियान जारी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने ओंगोल, कडप्पा और हैदराबाद में आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। यह तलाशी अभियान मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और अन्य साक्ष्यों की तलाश में जारी है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई माइनिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार के व्यापक जाल की ओर संकेत करती है, जहाँ कथित तौर पर तिमाही आधार पर रिश्वत का लेन-देन होता था।
न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच
तीनों आरोपियों — डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग), प्राइवेट माइनिंग कंपनी का प्रतिनिधि और कंसल्टेंट/बिचौलिया — को 18 अगस्त को विजयवाड़ा की सक्षम अदालत में पेश किया गया। सीबीआई के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई जारी है। यह मामला इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि औद्योगिक हादसों के बाद नियामकीय जांच प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किस तरह श्रमिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।