18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीबीआई का बड़ा ट्रैप: डीजीएमएस डिप्टी डायरेक्टर ₹2 लाख रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, खदान हादसे को दबाने की कोशिश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीबीआई का बड़ा ट्रैप: डीजीएमएस डिप्टी डायरेक्टर ₹2 लाख रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, खदान हादसे को दबाने की कोशिश

सारांश

आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में एक जानलेवा खदान हादसे की जांच रिपोर्ट को अपने पक्ष में कराने के लिए एक माइनिंग कंपनी ने सरकारी अधिकारी को रिश्वत दी। सीबीआई ने 17 अगस्त को ओंगोल में जाल बिछाकर डीजीएमएस के डिप्टी डायरेक्टर समेत तीन लोगों को ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोचा।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 17 अगस्त को ओंगोल में ट्रैप ऑपरेशन चलाकर डीजीएमएस, हैदराबाद-III रीजन के डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग) को ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।
एक कंसल्टेंट/बिचौलिया और प्राइवेट माइनिंग कंपनी का प्रतिनिधि भी गिरफ्तार; तीनों को 18 अगस्त को विजयवाड़ा अदालत में पेश किया गया।
रिश्वत का उद्देश्य 25 जून को प्रकाशम जिले की खदान में हुए जानलेवा हादसे की जांच रिपोर्ट को कंपनी के पक्ष में कराना था।
आरोप है कि बिचौलिये ने पहले ही ₹1 लाख की रिश्वत दी थी; ₹2 लाख की अतिरिक्त रकम में कथित तिमाही रिश्वत भी शामिल थी।
सीबीआई की तलाशी ओंगोल , कडप्पा और हैदराबाद में आरोपियों के ठिकानों पर जारी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अगस्त को ओंगोल में एक सुनियोजित जाल बिछाकर डीजीएमएस (खान महानिदेशालय), हैदराबाद-III रीजन, साउथ सेंट्रल जोन के डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग) को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में एक कंसल्टेंट/बिचौलिया और एक प्राइवेट माइनिंग कंपनी का प्रतिनिधि भी हिरासत में लिया गया। तीनों आरोपियों को 18 अगस्त को विजयवाड़ा की सक्षम अदालत में पेश किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई को सूचना मिली थी कि 25 जून को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की एक माइनिंग खदान में एक जानलेवा हादसा हुआ था। संबंधित माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधियों ने एक कंसल्टेंट/बिचौलिये के माध्यम से आरोपी डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग) से संपर्क साधा। उद्देश्य था कि हादसे की जांच रिपोर्ट कंपनी के पक्ष में तैयार हो और खदान मालिकों को कानूनी जिम्मेदारी से बचाया जा सके।

आरोप है कि बिचौलिये ने अनुकूल रिपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए पहले ही आरोपी डिप्टी डायरेक्टर को ₹1 लाख की रिश्वत दी थी। इसके बाद 17 अगस्त को ओंगोल में ₹2 लाख की अतिरिक्त रकम देने की योजना बनाई गई — जिसमें हादसे की रिपोर्ट के साथ-साथ कथित तौर पर प्राइवेट माइनिंग कंपनी और अन्य खदानों से जुड़ी तिमाही रिश्वत का भुगतान भी शामिल था।

सीबीआई का ट्रैप ऑपरेशन

सीबीआई ने 17 अगस्त को ओंगोल में जाल बिछाया और आरोपी डिप्टी डायरेक्टर को प्राइवेट माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधि की मौजूदगी में कंसल्टेंट/बिचौलिये से ₹2 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। ट्रैप के दौरान पूरी रकम बरामद कर ली गई। सीबीआई ने इस मामले में 17 अगस्त को ही डिप्टी डायरेक्टर, कंसल्टेंट/बिचौलिये, प्राइवेट माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधियों और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

तलाशी अभियान जारी

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने ओंगोल, कडप्पा और हैदराबाद में आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। यह तलाशी अभियान मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और अन्य साक्ष्यों की तलाश में जारी है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई माइनिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार के व्यापक जाल की ओर संकेत करती है, जहाँ कथित तौर पर तिमाही आधार पर रिश्वत का लेन-देन होता था।

न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच

तीनों आरोपियों — डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग), प्राइवेट माइनिंग कंपनी का प्रतिनिधि और कंसल्टेंट/बिचौलिया — को 18 अगस्त को विजयवाड़ा की सक्षम अदालत में पेश किया गया। सीबीआई के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई जारी है। यह मामला इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि औद्योगिक हादसों के बाद नियामकीय जांच प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किस तरह श्रमिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक स्थापित व्यवस्था थी। सवाल यह है कि डीजीएमएस के भीतर आंतरिक निगरानी तंत्र इतने समय तक कहाँ था, और क्या यह जांच केवल तीन गिरफ्तारियों पर रुकेगी या पूरी श्रृंखला तक पहुँचेगी।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने डीजीएमएस डिप्टी डायरेक्टर को किस आरोप में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने डीजीएमएस, हैदराबाद-III रीजन के डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग) को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। यह रिश्वत आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की एक खदान में हुए जानलेवा हादसे की जांच रिपोर्ट को माइनिंग कंपनी के पक्ष में तैयार करने के बदले मांगी और ली गई थी।
प्रकाशम जिले की खदान में क्या हुआ था?
25 जून को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की एक माइनिंग खदान में एक जानलेवा हादसा हुआ था। इसके बाद संबंधित माइनिंग कंपनी के प्रतिनिधियों ने एक बिचौलिये के जरिए डीजीएमएस अधिकारी से संपर्क किया ताकि हादसे की जांच रिपोर्ट उनके पक्ष में आए।
इस मामले में कुल कितनी रिश्वत का लेन-देन हुआ?
आरोपों के अनुसार, बिचौलिये ने पहले ही ₹1 लाख की रिश्वत दी थी और 17 अगस्त को ₹2 लाख की अतिरिक्त रकम दी जानी थी। इस ₹2 लाख में हादसे की रिपोर्ट के साथ-साथ कथित तिमाही रिश्वत का भुगतान भी शामिल था।
गिरफ्तार आरोपियों को कहाँ पेश किया गया?
तीनों आरोपियों — डिप्टी डायरेक्टर (माइनिंग), प्राइवेट माइनिंग कंपनी का प्रतिनिधि और कंसल्टेंट/बिचौलिया — को 18 अगस्त को विजयवाड़ा की सक्षम अदालत में पेश किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
सीबीआई की तलाशी किन जगहों पर चल रही है?
सीबीआई ने ओंगोल, कडप्पा और हैदराबाद में आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया है। यह तलाशी मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और अन्य साक्ष्यों की तलाश में जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले