सीबीआई का बडगाम में बड़ा एक्शन: वन विभाग के दो अधिकारी व एक कर्मचारी रिश्वतखोरी में गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रविवार, 14 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार-रोधी अभियान के तहत वन विभाग के दो अधिकारियों और एक अस्थायी कर्मचारी को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गई।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार है: कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; तथा रामहामा, बीरवाह के अस्थायी कर्मचारी बशीर अहमद गनी। तीनों जम्मू-कश्मीर के वन विभाग से संबद्ध थे।
कैसे हुई गिरफ्तारी
सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया। बशीर अहमद गनी को उस समय रंगे हाथों पकड़ा गया जब वह कथित तौर पर ₹15,000 की रिश्वत स्वीकार कर रहा था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए रेंजर और फॉरेस्टर को भी हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन अवैध रूप से धन की मांग किए जाने की शिकायतों के आधार पर शुरू किया गया था।
सीबीआई का अधिकार क्षेत्र और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए यहाँ के अधिकारी सीबीआई के प्राथमिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सीबीआई मुख्यतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के मामलों की जांच करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम की धारा 6 के तहत दी गई 'सामान्य सहमति' वापस ले ली है। उन राज्यों में सीबीआई को जांच के लिए अब मामले-विशेष की सहमति या न्यायालय का आदेश आवश्यक होता है। हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय सीबीआई को देश में कहीं भी जांच का अधिकार दे सकते हैं।
एसीबी की भूमिका और समानांतर ढाँचा
जम्मू-कश्मीर की अपनी एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) भी है, जो सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने के लिए अधिकृत है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय पुलिस और एसीबी को भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार है।
आगे क्या होगा
सीबीआई सूत्रों के अनुसार इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित संलिप्तताओं की पड़ताल की जा रही है। तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में वन विभाग के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।