30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीबीआई का बडगाम में बड़ा एक्शन: वन विभाग के दो अधिकारी व एक कर्मचारी रिश्वतखोरी में गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीबीआई का बडगाम में बड़ा एक्शन: वन विभाग के दो अधिकारी व एक कर्मचारी रिश्वतखोरी में गिरफ्तार

सारांश

सीबीआई ने बडगाम में जाल बिछाकर वन विभाग के एक अस्थायी कर्मचारी को ₹15,000 की रिश्वत लेते पकड़ा, फिर दो वरिष्ठ अधिकारियों को भी दबोचा। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज, जांच जारी।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 14 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में वन विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में रेंजर मंजूर अहमद मलिक , फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार और अस्थायी कर्मचारी बशीर अहमद गनी शामिल हैं।
बशीर अहमद गनी को बीरवाह में ₹15,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के तहत की गई।
सीबीआई के अनुसार आगे की जांच जारी है और अन्य संलिप्तताओं की पड़ताल हो रही है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रविवार, 14 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार-रोधी अभियान के तहत वन विभाग के दो अधिकारियों और एक अस्थायी कर्मचारी को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गई।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार है: कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; तथा रामहामा, बीरवाह के अस्थायी कर्मचारी बशीर अहमद गनी। तीनों जम्मू-कश्मीर के वन विभाग से संबद्ध थे।

कैसे हुई गिरफ्तारी

सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया। बशीर अहमद गनी को उस समय रंगे हाथों पकड़ा गया जब वह कथित तौर पर ₹15,000 की रिश्वत स्वीकार कर रहा था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए रेंजर और फॉरेस्टर को भी हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन अवैध रूप से धन की मांग किए जाने की शिकायतों के आधार पर शुरू किया गया था।

सीबीआई का अधिकार क्षेत्र और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए यहाँ के अधिकारी सीबीआई के प्राथमिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सीबीआई मुख्यतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के मामलों की जांच करती है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम की धारा 6 के तहत दी गई 'सामान्य सहमति' वापस ले ली है। उन राज्यों में सीबीआई को जांच के लिए अब मामले-विशेष की सहमति या न्यायालय का आदेश आवश्यक होता है। हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय सीबीआई को देश में कहीं भी जांच का अधिकार दे सकते हैं।

एसीबी की भूमिका और समानांतर ढाँचा

जम्मू-कश्मीर की अपनी एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) भी है, जो सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने के लिए अधिकृत है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय पुलिस और एसीबी को भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार है।

आगे क्या होगा

सीबीआई सूत्रों के अनुसार इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित संलिप्तताओं की पड़ताल की जा रही है। तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में वन विभाग के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि वन विभाग जैसे संसाधन-संवेदनशील विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। ₹15,000 की रिश्वत एक छोटी रकम लग सकती है, लेकिन यह उस व्यापक संरचनागत समस्या का संकेत है जहाँ अस्थायी कर्मचारी भी अवैध वसूली में लिप्त हो जाते हैं। जम्मू-कश्मीर में एसीबी के समानांतर सीबीआई की सक्रियता यह भी दर्शाती है कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद यहाँ केंद्रीय निगरानी का दायरा बढ़ा है — जो जवाबदेही के लिहाज से सकारात्मक है, पर जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की चुनौती भी खड़ी करता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने बडगाम में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में वन विभाग के रेंजर मंजूर अहमद मलिक, फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार और अस्थायी कर्मचारी बशीर अहमद गनी को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया। बशीर अहमद गनी को ₹15,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।
इस मामले में कौन-सी धारा के तहत एफआईआर दर्ज की गई है?
यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत सीबीआई पुलिस स्टेशन, कश्मीर में दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के तहत की गई है। धारा 7 रिश्वत लेने या मांगने से संबंधित है।
जम्मू-कश्मीर में सीबीआई को जांच का अधिकार कैसे मिलता है?
जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए यहाँ के केंद्र सरकार के कर्मचारी सीधे सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। राज्यों के विपरीत, केंद्र शासित प्रदेशों में सीबीआई को अलग से 'सामान्य सहमति' की आवश्यकता नहीं होती।
क्या जम्मू-कश्मीर में एसीबी और सीबीआई दोनों एक साथ काम करती हैं?
हाँ, जम्मू-कश्मीर की अपनी एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) है जो सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच करती है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि एसीबी और स्थानीय पुलिस को भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सीबीआई के अनुसार इस मामले में आगे की जांच जारी है। तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा और अन्य संभावित संलिप्तताओं की भी पड़ताल की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले