क्या सीबीआई ने राजौरी में सहायक आयुक्त को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया?

सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई ने राजौरी में एक सहायक आयुक्त को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा।
- 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी।
- सीबीआई की कार्रवाई 25 अगस्त को की गई थी।
- आरोपी के आवास से 1.5 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों के दस्तावेज मिले।
- सीबीआई लगातार रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
राजौरी, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में एक बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर के खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह जानकारी सीबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से साझा की है।
सीबीआई के अनुसार, एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले ड्रग्स एंड फूड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के राजौरी जिले में तैनात सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) को एक शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। यह रिश्वत उन्होंने शिकायतकर्ता से मांगी थी।
सीबीआई ने 25 अगस्त को शिकायतकर्ता की शिकायत पर इस मामले में केस दर्ज किया था। आरोप था कि सहायक आयुक्त ने शिकायतकर्ता से उसकी दुकान से नमूने न लेने और एक साल तक निरीक्षण से छूट देने के लिए 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी, ताकि शिकायतकर्ता बिना किसी परेशानी के अपना व्यवसाय चला सके।
सीबीआई ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और शिकायतकर्ता से 10 रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
सीबीआई ने आरोपी के आवास में तलाशी ली, जिसमें 1.5 करोड़ रुपए से अधिक की अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज सहित आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन दस्तावेजों की जांच चल रही है।
यह ध्यान देने योग्य है कि सीबीआई देशभर में लगातार रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई कर रही है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हाल ही में दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल को भी गिरफ्तार किया था, जिसे रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। सीबीआई को इस मामले में हेड कांस्टेबल के रिश्वत लेने की जानकारी मिली थी। इसी क्रम में सीबीआई ने आरोपी पुलिसकर्मी को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
सीबीआई ने 25 अगस्त को थाना अशोक विहार में तैनात दिल्ली पुलिस के आरोपी हेड कांस्टेबल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता से उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के लिए 3 लाख रुपए की मांग की थी।