भारत-पराग्वे राजनयिक संबंधों के 65 साल, व्यापार-रक्षा सहयोग को नई गति देने की प्रतिबद्धता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को घोषणा की कि भारत और पराग्वे अपने राजनयिक संबंधों की 65वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं, और दोनों देशों ने रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने तथा आर्थिक व व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सितंबर 1961 में स्थापित यह साझेदारी छह दशकों से अधिक समय से मित्रता, आपसी सम्मान और निरंतर संवाद पर आधारित रही है।
65 वर्षों की साझेदारी का सफ़र
भारत और पराग्वे के बीच राजनयिक संबंध सितंबर 1961 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच गर्मजोशी और मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बने हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी सहित विविध क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, 'दोनों सरकारें अब तक हासिल की गई प्रगति को रेखांकित करती हैं और साझा हित वाले रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी इच्छा दोहराती हैं। साथ ही, आर्थिक और व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ाने के उद्देश्य से नई पहलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ग्लोबल साउथ कूटनीति को तेज़ी से विस्तार दे रहा है।
मोदी-पेना वार्ता: द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा
जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पालासियोस ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की थी। राष्ट्रपति पेना पालासियोस की यह भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, उस वार्ता में व्यापार एवं निवेश, स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा एवं सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे और खनन समेत द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे पर व्यापक चर्चा हुई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान कहा था कि पराग्वे के राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा ऐतिहासिक है, क्योंकि यह किसी पराग्वे राष्ट्रपति की भारत की दूसरी यात्रा है। गौरतलब है कि मोदी ने यह भी कहा था कि दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने से साझा विकास और समृद्धि का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
ग्लोबल साउथ में भारत-पराग्वे की साझी भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया था कि भारत और पराग्वे ग्लोबल साउथ के अभिन्न हिस्से हैं, और दोनों देशों की उम्मीदें, आकांक्षाएँ और चुनौतियाँ समान हैं। पराग्वे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में भारत के उभरते व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
यह वर्षगाँठ ऐसे समय में आई है जब भारत दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ अपनी कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को व्यवस्थित रूप से मज़बूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मास्यूटिकल्स और आईटी में भारत की विशेषज्ञता तथा पराग्वे की कृषि एवं खनन क्षमता दोनों देशों के लिए पूरकता का आधार बना सकती है।
आगे की राह
दोनों देशों ने इस संबंध को सहयोग, समृद्धि और पारस्परिक लाभ के एक नए चरण में ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है। 65वीं वर्षगाँठ का यह अवसर दोनों सरकारों के लिए जून 2025 में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में तय किए गए सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मौका है।