13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-पराग्वे राजनयिक संबंधों के 65 साल, व्यापार-रक्षा सहयोग को नई गति देने की प्रतिबद्धता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-पराग्वे राजनयिक संबंधों के 65 साल, व्यापार-रक्षा सहयोग को नई गति देने की प्रतिबद्धता

सारांश

भारत और पराग्वे ने अपने राजनयिक संबंधों के 65 साल पूरे होने पर सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाने का संकल्प दोहराया है। जून 2025 की मोदी-पेना शिखर वार्ता की ज़मीन पर खड़ी यह साझेदारी अब व्यापार, रक्षा और ग्लोबल साउथ के साझे लक्ष्यों तक फैल रही है।

मुख्य बातें

भारत और पराग्वे ने 13 सितंबर 2026 को अपने राजनयिक संबंधों की 65वीं वर्षगाँठ मनाई।
दोनों देशों के बीच सितंबर 1961 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे।
विदेश मंत्रालय ने व्यापार, आर्थिक आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पालासियोस ने हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में व्यापक वार्ता की थी, जिसमें रक्षा, खनन, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने माना कि भारत और पराग्वे ग्लोबल साउथ के अभिन्न हिस्से हैं और उनकी आकांक्षाएँ साझी हैं।

विदेश मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को घोषणा की कि भारत और पराग्वे अपने राजनयिक संबंधों की 65वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं, और दोनों देशों ने रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने तथा आर्थिक व व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सितंबर 1961 में स्थापित यह साझेदारी छह दशकों से अधिक समय से मित्रता, आपसी सम्मान और निरंतर संवाद पर आधारित रही है।

65 वर्षों की साझेदारी का सफ़र

भारत और पराग्वे के बीच राजनयिक संबंध सितंबर 1961 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच गर्मजोशी और मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बने हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी सहित विविध क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार हुआ है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, 'दोनों सरकारें अब तक हासिल की गई प्रगति को रेखांकित करती हैं और साझा हित वाले रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी इच्छा दोहराती हैं। साथ ही, आर्थिक और व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ाने के उद्देश्य से नई पहलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ग्लोबल साउथ कूटनीति को तेज़ी से विस्तार दे रहा है।

मोदी-पेना वार्ता: द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा

जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पालासियोस ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की थी। राष्ट्रपति पेना पालासियोस की यह भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा थी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, उस वार्ता में व्यापार एवं निवेश, स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा एवं सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे और खनन समेत द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे पर व्यापक चर्चा हुई थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान कहा था कि पराग्वे के राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा ऐतिहासिक है, क्योंकि यह किसी पराग्वे राष्ट्रपति की भारत की दूसरी यात्रा है। गौरतलब है कि मोदी ने यह भी कहा था कि दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने से साझा विकास और समृद्धि का रास्ता तैयार किया जा सकता है।

ग्लोबल साउथ में भारत-पराग्वे की साझी भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया था कि भारत और पराग्वे ग्लोबल साउथ के अभिन्न हिस्से हैं, और दोनों देशों की उम्मीदें, आकांक्षाएँ और चुनौतियाँ समान हैं। पराग्वे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में भारत के उभरते व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।

यह वर्षगाँठ ऐसे समय में आई है जब भारत दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ अपनी कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को व्यवस्थित रूप से मज़बूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मास्यूटिकल्स और आईटी में भारत की विशेषज्ञता तथा पराग्वे की कृषि एवं खनन क्षमता दोनों देशों के लिए पूरकता का आधार बना सकती है।

आगे की राह

दोनों देशों ने इस संबंध को सहयोग, समृद्धि और पारस्परिक लाभ के एक नए चरण में ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है। 65वीं वर्षगाँठ का यह अवसर दोनों सरकारों के लिए जून 2025 में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में तय किए गए सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मौका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो परंपरागत रूप से उपेक्षित रहा है। जून 2025 की राजकीय यात्रा में रक्षा और खनन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को एजेंडे में शामिल करना दर्शाता है कि यह साझेदारी महज़ प्रतीकात्मक नहीं रह गई। हालाँकि, दोनों देशों के बीच वास्तविक व्यापार मात्रा अब भी सीमित है, और बड़े वादों को ठोस संख्याओं में बदलने की चुनौती बनी हुई है। ग्लोबल साउथ की साझी पहचान एक मज़बूत कूटनीतिक आधार है, लेकिन असली कसौटी आगामी वर्षों में व्यापार और निवेश के आँकड़ों से तय होगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और पराग्वे के राजनयिक संबंध कब स्थापित हुए थे?
भारत और पराग्वे ने सितंबर 1961 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। 13 सितंबर 2026 को दोनों देश इन संबंधों की 65वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं।
65वीं वर्षगाँठ पर दोनों देशों ने क्या प्रतिबद्धता जताई?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों सरकारों ने साझा हित वाले रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने और आर्थिक व व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए नई पहलों को बढ़ावा देने की इच्छा दोहराई है।
PM मोदी और पराग्वे के राष्ट्रपति के बीच वार्ता कब और कहाँ हुई थी?
जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पालासियोस ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की थी। राष्ट्रपति पेना पालासियोस ने भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा की थी।
भारत और पराग्वे के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग हो रहा है?
दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे और खनन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार हुआ है।
ग्लोबल साउथ के संदर्भ में भारत-पराग्वे संबंध क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत और पराग्वे दोनों ग्लोबल साउथ के अभिन्न हिस्से हैं और उनकी उम्मीदें, आकांक्षाएँ और चुनौतियाँ समान हैं। पराग्वे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में भारत के उभरते व्यापारिक साझेदारों में शामिल है, जिससे यह साझेदारी भारत की दक्षिण-दक्षिण कूटनीति के लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले