भारत और जर्मनी ने रक्षा और नई तकनीकों में सहयोग को बढ़ाने का किया संकल्प

Click to start listening
भारत और जर्मनी ने रक्षा और नई तकनीकों में सहयोग को बढ़ाने का किया संकल्प

सारांश

भारत और जर्मनी ने बर्लिन में हुए एक महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है। इस बैठक में दोनों देशों के विदेश सचिवों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और नई तकनीकों में सहयोग के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की।

Key Takeaways

  • भारत-जर्मनी कूटनीतिक संबंधों का 75वां वर्षगांठ।
  • रक्षा और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए चर्चा।
  • बातचीत में व्यापार और निवेश के पहलुओं की समीक्षा।
  • जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान।
  • पश्चिम एशिया और वैश्विक विकास पर विचार-विमर्श।

बर्लिन, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और जर्मन विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव डॉ. गेजा एंड्रियास वॉन गेयर ने 14 अप्रैल 2026 को बर्लिन में भारत-जर्मनी फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन (एफओसी) की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान, विक्रम मिस्री ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहन वेडेफुल से भी मुलाकात की।

यह मीटिंग भारत और जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष में आयोजित की गई। वास्तव में, इस वर्ष, भारत और जर्मनी अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इससे पहले 2025 में, रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था।

सह-अध्यक्षों ने इस अवसर पर भारत-जर्मनी कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 75वें वर्षगांठ का लोगो भी लॉन्च किया। इस बातचीत के माध्यम से दोनों पक्षों को आपसी संबंधों की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत करने के रास्ते तलाशने का अवसर मिला।

बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-जर्मनी के आपसी संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की, जिसमें व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, तकनीक, ग्रीन और सतत विकास, मोबिलिटी और लोगों के बीच बातचीत शामिल है।

वे आज के समय की महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने और उसमें विविधता लाने पर सहमत हुए, जिसमें आवश्यक और उभरती तकनीक, रक्षा, औद्योगिक सहयोग, डिजिटल गवर्नेंस, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, नवाचार और तीसरे देशों में विकास सहयोग शामिल हैं। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित मुख्य क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

विदेश सचिव ने कोर्बर फाउंडेशन में वरिष्ठ विदेश नीति विशेषज्ञ, सांसदों और जर्मनी की फेडरल एवं राज्य सरकारों के सीनियर अधिकारियों से भी बातचीत की।

दोनों पक्षों के बीच बातचीत अच्छे और दोस्ताना माहौल में हुई। विदेश सचिव का यह दौरा जनवरी 2026 में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के बाद हुआ। मर्ज के इस दौरे ने दोनों देशों के संबंधों को काफी बढ़ावा दिया। इस दौरे ने महत्वपूर्ण क्षेत्र में चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने और इस वर्ष के अंत में होने वाले अगले भारत-जर्मनी इंटर-गवर्नमेंटल कंसल्टेशन के लिए अच्छे नतीजे खोजने में भी मदद की। विदेश सचिव मिस्री ने राज्य सचिव वॉन गेयर को आपसी सहमति वाले समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

Point of View

जो 75 वर्षों का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत और जर्मनी के बीच यह बैठक कब हुई?
यह बैठक 14 अप्रैल 2026 को बर्लिन में हुई।
इस बैठक में कौन-कौन शामिल था?
इस बैठक में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और जर्मनी के विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव डॉ. गेजा एंड्रियास वॉन गेयर शामिल थे।
क्या इस बैठक में किसी विशेष मुद्दे पर चर्चा हुई?
इस बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और पर्यावरणीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
भारत और जर्मनी के बीच सहयोग के क्षेत्र कौन से हैं?
इन क्षेत्रों में सुरक्षा, औद्योगिक सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, और डिजिटल गवर्नेंस शामिल हैं।
इस बैठक का महत्व क्या है?
यह बैठक भारत-जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच सुरक्षा और तकनीक में सहयोग को बढ़ावा देती है।
Nation Press